और फिर एक रोज़ मुझे समझ आया...
कुछ रिश्ते आवाज़ नहीं देते
वे बस भीतर
एक शांत दीपक की तरह
निरंतर जलते रहते है
न कोई वादा,
न कोई दावा,
न साथ निभाने की कोई शर्त...
फिर भी उनकी मौजूदगी
मन के हर बिखराव को
धीरे-धीरे समेट लेती है
इसीलिए जब भी
तुम्हारा ख़याल आता है,
लगता है जैसे
रूह ने पल भर के लिए
समय का हाथ थाम लिया हो,
और सारी बेचैनियाँ
किसी शांत नदी में उतर गई हो
यदि प्रेम का कोई दूसरा नाम हो,
तो शायद वह यही सुकून है...
जो आँखें बंद होने पर
ख़्वाब बन जाए,
आँखें खुलने पर
दुआ बनकर दिल में ठहर जाए,
और हर धड़कन से बस इतना कहे...
"तुम हो... इसलिए सब कुछ शांत है।"
#खनक_शब्दों_की
Morning- feeling sleepy (active delta wave)
Afternoon- feeling sleepy (mix alpha and delta wave)
Evening- feeling sleepy
Night- fully attentive ( active gama waves)..
Inner me - देश का भविष्य है तू !...........................…....
नींद भारी आँखों, सुबह ना उठने के आलसपन, पांच मिनट और सोने की इच्छा, चाह कर भी घड़ी को नजरअंदाज करने की चाहत रखने वालों सूरज ने पश्चिम की ओर अपना सफर तय भी कर लिया है !
अच्छा सुनो ,
छोटे शहरों से
बड़े कॉलेज
तक का सफ़र
तय करने वाले
बच्चों ,
जब तुम
200 / मंथ
वाले स्कूल से
2 k/मंथ रुपये वाले
स्कूल के बच्चों
साथ पढ़ने का
सफ़र तय कर
सकते हो
तो अंग्रेजी सीखना
कौन सी बड़ी बात है ❤️
डायरी के पन्नों में दबे वो पुराने किस्से,
इंतज़ार में हैं पन्नों के पलटने का,
तेरे अश्रु से मिटे अक्षर भी इंतज़ार में हैं,
उस स्याही का जो तेरी प्रिय हुआ करती थी!
Me to my diary -
तू ही तो मेरी संघर्ष की जुबानी है,
तू ही तो मेरी कामयाबी की कहानी है,
तेरे पन्नों का पीलापन ही तो यादों की नदियां है,
तू ही तो मेरे जीवन की गलियां है,
तेरे लिये दिल में एक विशेष कोना है,
एक विशेष कोना है !
- Priti Singh
डिअर पापा,
आपको शब्दों में अंकित करने को शब्द नहीं,
पर मां ने बताया था कि कैसे,
बचपन में आपके आने के इंतज़ार में,
आपकी चप्पल वो भी उलटी पहन कर,
घर की चौखट पर खड़ी हो जाती थी!
आपके घर आने के बाद आफिस का बैग हमारा हो जाता,
क्योंकि हर रोज हमारी मनपसंद चीज जो होती उसमें...
बस वापस जाना है उन गलियों मै,
जहाँ कागज की कश्ती हमारे अभी भी इंतज़ार मे खड़ी है किनारे पर ,
जहाँ आज भी अठन्नी आज भी वक़्त की भागम भाग की बलि चढ़ गयी,
जहाँ मेले में मिट्टी के खिलोने और गुब्बारे आज भी आँखे गड़ाये राह तक रहे!
बस वापस जाना है!
लोग चले जाते हैं—
जैसे स्टेशन से आख़िरी ट्रेन,
पत्तों से ओस,
फूलों से खुशबू,
शाम से धूप,
नींद से सपना,
होठों से मुस्कान,
हथेलियों से गर्मी,
रेत से पानी,
दीपक से लौ,
हवाओं से सरगोशी,
घावों से तीस,
धड़कनों से धुन,
वैसे ही दुनिया से लोग,
चले जाते हैं।