ऐतिहासिक अवसर सामने है। बिहार के शिक्षकों की वर्षों से लंबित 7वें वेतन आयोग के अनुरूप Pay Level की मांग अब समाधान की प्रतीक्षा में है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी @samrat4bjpएवं माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी जी @mkrtiwari_bjp ,
यदि लंबे अंतराल के बाद भाजपा के नेतृत्व में शिक्षा विभाग को नई दिशा देने का अवसर मिला है, तो शिक्षकों की इस बहुप्रतीक्षित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा जा सकता है।
आगामी शिक्षक संवाद केवल संवाद न रहे—शिक्षकों की वर्षों पुरानी अपेक्षा के समाधान का अवसर बने।
7th Pay Level देकर बिहार के शिक्षकों के साथ न्याय कीजिए।
इतिहास निर्णयों से लिखा जाता है।
#7thPayForBiharTeachers
📢 सभी सम्मानित साथियों से विनम्र अनुरोध है कि इस संदेश को अपने WhatsApp Status एवं अन्य सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें और अधिक से अधिक शिक्षक साथियों तक पहुँचाएँ।
आपका एक शेयर हमारी आवाज़ को और मजबूत करेगा। 🙏
सभी शिक्षक संगठन से मेरा नम्र निवेदन एक बार जरूर पढ़े.......
🙏🙏
हम किसी भी संगठन को यह नहीं कह रहे हैं कि आप प्रोन्नति,सेवा निरंतरता,वेतन संरक्षण, स्थानांतरण पर चुप हो जाइए.....
जितना लड़ना है इस मामले पर आप लड़ते रहिए।
लेकिन हाथ जोड़ कर निवेदन है सभी संघ से कि 7वाँ वेतनमान को लेकर वर्तमान में शिक्षक के एकजुटता को देखते हुए वर्तमान में बस एक मांग रखिए और इस मांग पर सभी शिक्षक संगठन एक मंच पर आइए और 2 अक्टूबर से होने वाले अनिश्चितकालीन अनशन पर राय विचार करिए।।
सभी शिक्षक संगठन को भी इतिहास रचने का समय है।
एक स्लैब में शिक्षक को दिलवा दीजिए फिर आप 100 मांग के साथ जाइए कौन रोका है।
#BiharTeachersNeed7thPay
शिक्षक हित में कठोर फैसला- जब तक हम सभी कोटि के शिक्षकों को सरकार से सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ नहीं दिलवा देते, तब तक मैं MLC चुनाव नहीं लड़ूंगा- आनंद कौशल सिंह @AnandKaushal_BR#BiharTeachersNeed7thPay
सातवें वेतनमान को लेकर अब वक्त है जमीनी स्तर पर कार्य करने का । सभी शिक्षक साथी एकजुटता बनाए रखिए । 30 अगस्त के ट्विटर कैंपेन में हुए ग्लोबल ट्रेडिंग का असर रहा की आज हर कोई आपके मुद्दे पर बात कर रहा है अब इस मुद्दे पर जीत जमीनी स्तर के प्रयास से ही मिलेगा ।
शिक्षकों के अधिकार की लड़ाई में हम उनके साथ हैं।
आज बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ (BRVAS) के प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई। इस दौरान बिहार के शिक्षकों के 7वें वेतनमान की मांग पर विस्तार से चर्चा हुई।
7वां वेतनमान कोई उपकार नहीं—शिक्षकों का अधिकार है।
सभी शिक्षक,प्रधान शिक्षक,प्रधानाध्यापक
धीरे धीरे गोलबंद होते हुए एकजुट हो रहे है जो बहुत ही अच्छी बात है।
चारों तरफ से शिक्षक समाज का बस एक ही माँग है।।
वेतनमान
वेतनमान
वेतनमान
वेतनमान #7thCPC के तहत लेवल (6 से 8 अथवा 9) के स्लैब में लाना ही होगा।
जिसमें
PRT (1-5) LEVEL 6 -35400
TGT (6-10) AND HEAD TEACHER
LEVEL 7-44900
PGT (11-12)LEVEL 8 -47600
HEAD MASTER LEVEL 9-53400
ये स्लैब शिक्षकों का वास्तविक स्लैब है
शिक्षक सड़क पर ना उतरे उससे पहले ही इस स्लैब को लागू करके आदरणीय मुख्यमंत्री @samrat4bjp जी आप इतिहास रचते हुए अपने कार्यकाल को योद्धा के रूप में प्रस्तुत कर सकते है।
#BiharTeachersNeed7thPay
जिस तरह से यूपी सहित अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को बिहार की TRE 1, 2 और 3 की शिक्षक बहाली में समान अवसर दिया गया उसी तरह से यूपी में आने वाली शिक्षक बहाली में भी बिहार के अभ्यर्थियों को बराबर मौका मिलना चाहिए। वहां डोमिसाइल लागू न हो इसके लिए बिहार के युवाओं को हर तरह की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार होना चाहिए। इसके लिए हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जानी चाहिए।
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य आदरणीय @DrMadanMohanJha जी का दिल से आभार जिन्होंने शिक्षकों के सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण माँग 7वें वेतनमान लेवल 6 से 8 तक के लिए सर्वप्रथम मजबूती से आवाज उठाए है और लगातार उठा रहे।।
उसके उपरांत अब अन्य प्रतिनिधि भी आवाज उठा रहे है।।
शिक्षक के चिर परिचित मांग वेतनमान के बिना शिक्षक का सम्मान अधूरा है।।
#BiharTeachersNeed7thPay
बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' के सफल क्रियान्वयन एवं व्यापक तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के सचिव श्री नवीन कुमार शामिल हुए।
#SewaSankalpAbhiyan
बीपीएससी TRE 2.0: क्या संविधान और सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर है आयोग?
छात्रों के हक पर डाका और परीक्षा नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा!
बीपीएससी टीआरई 2.0 के विज्ञापन में स्पष्ट नियम था कि भाषा अर्हता परीक्षा (Qualifying Paper) में 30% अंक लाना अनिवार्य होगा। लेकिन परीक्षा संपन्न होने के बाद रातों-रात इस नियम को शून्य कर दिया गया। यह केवल एक नियम का बदलाव नहीं है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेश की सीधी अवहेलना:
सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक और स्थापित सिद्धांत है— "Rules of the game cannot be changed midway" (खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जा सकते)।
* विज्ञापन के समय जो योग्यता तय की गई थी, उसे परीक्षा के बाद बदलना पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध है।
* भाषा की अर्हता समाप्त करने से कट-ऑफ में भारी हेरफेर हुआ है, जिससे योग्य छात्र बाहर हो गए हैं।
* परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाली इस अनियमितता को कानूनी रूप से चुनौती देना हर अभ्यर्थी का संवैधानिक अधिकार है।
हमारी स्पष्ट मांगें और चेतावनी:
* अवैध फैसले को रद्द किया जाए: सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों का पालन करते हुए भाषा अर्हता को हटाने के मनमाने फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।
* मेरिट का पुनर्मूल्यांकन हो: मूल विज्ञापन के नियमों के आधार पर ही अर्हता अंक लागू करके दोबारा निष्पक्ष मेधा सूची जारी की जाए।
* न्यायालय का दरवाजा: यदि आयोग और सरकार अपनी तानाशाही वापस नहीं लेती है, तो इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की धांधली के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और इस असंवैधानिक फैसले को रद्द कराया जाएगा।
> सभी अभ्यर्थियों से अपील:
> चुप रहना आयोग की मनमानी को बढ़ावा देना है। इस पोस्ट को शेयर करें, एकजुट हों और इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें!
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