13 अगस्त 1980 मुरादाबाद ईदगाह का वह काला दिन, जिसे भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक पन्नों में गिना जाता है।
ईद की नमाज़ अदा कर रहे 20,000 से अधिक बेकसूर मुसलमानों पर उस वक्त की कांग्रेस सरकार की देखरेख में गोलियाँ बरसाई गईं। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक 400 से ज़्यादा लोग शहीद हुए, जबकि अनधिकृत रूप से यह आँकड़ा ढाई हज़ार से अधिक था।
यह कोई हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की गंदी चाल के तहत किया गया एक प्रायोजित नरसंहार था।
आज इसकी बरसी पर मुख्यधारा की खामोशी इस सच को और गहरा कर देती है कि सत्ता के लिए अपनों का खून बहाने वालों को कभी माफ नहीं किया जा सकता।
न भूले हैं, न कभी भूलेंगे!
#MoradabadMassacre #13August1980
BJP के सांसद रवि किशन और संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू से उम्मीद करते हैं कि वे इस वीडियो क्लिप को सुनकर खुद का ज्ञान बढ़ा लें.
@KirenRijiju@ravikishann
2014 –– Give me only 60 months & i will change your life
2016 –– Give me just 50 days, i will change everything for good
2023 –– Give me just 5 years, i will pull out all corruption money
2026 –– Wait for 2047
Do you still trust his promises?
नारायणन ने पूरी ज़िंदगी यही सीखा, यही समझा और यही माना कि मुसलमान उनके दुश्मन हैं। आरएसएस के एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने वर्षों तक इसी बात का प्रचार किया और इसी नफ़रत को अपनी पहचान बनाए रखा।
फिर ज़िंदगी का आख़िरी मोड़ आया। मुँह का कैंसर, कमज़ोर होता शरीर और भूख से बेहाल हालत—कोझिकोड की एक दुकान के बरामदे में वे अकेले पड़े मिले।
जब यह ख़बर फैली तो लाखों कार्यकर्ताओं वाले संगठन को भी इसकी जानकारी हुई, लेकिन कोई उन्हें देखने नहीं आया। उनकी दो पत्नियाँ थीं, बच्चे थे, बहन थी—फिर भी कोई साथ देने नहीं पहुँचा।
अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। उनका शव पड़ा रहा। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, लेकिन परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया।
तब इरफ़ाना इक़बाल आगे आईं। वही मुसलमान। वही, जिन्हें "दुश्मन" बताया गया था। उन्होंने अपनी कम्युनिटी के लोगों को साथ जुटाया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार नारायणन का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और पूरी गरिमा के साथ कराया।
नारायणन की पूरी ज़िंदगी एक झूठ पर टिकी रही, और उनकी मृत्यु ने उस झूठ को बेनकाब कर दिया। जिस नफ़रत को उन्होंने अपनी ढाल बनाया था, वह आख़िरी समय में उनके किसी काम नहीं आई। और जिस मोहब्बत को उन्होंने दुश्मनी समझा, वही अंत में उनके सबसे ज़्यादा काम आई।
मुहम्मद साहब के अपमान के बाद प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय करने के लिए मैंने अनुरोध किया था कि 1000 लोग ट्वीट के नीचे #ArrestNaziaElahi लिखें।
मगर 500 से ज्यादा लोगों ने नहीं लिखा।
आज फिर PM @narendramodi को टैग कर रहा हूँ। इसके नीचे #ArrestNaziaElahi के साथ एक विचार सभ्य भाषा में कमेंट कर दें।
⚠️मैं वादा करता हूँ ये सरकार कम से कम इस मामले में जल्द कानूनी कार्यवाही करेगी।
मै भगत सिंह को मानने वाला हूं , मै सावरकर को मानने वाला नहीं हूं जो माफीवीर बन जाऊंगा।
भगत सिंह को पढ़ा है मैने , सुखदेव को पढ़ा है मैने , राजगुरु को पढ़ा है मैने , मौलाना हुसैन अहमद मदनी को पढ़ा है मैने।
जिन अंग्रेजों ने मौलाना हुसैन अहमद मदनी से कहा था ए हुसैन अहमद मदनी या तो तू अपना फैसला बदल दे या फिर तुझे तोप के सामने रखकर उड़ा देंगे।
तब मौलाना हुसैन अहमद मदनी जी ने कहा था कि मुझे मरना मंजूर है लेकिन तुम्हारी फ़ौज में भर्ती होना हराम है , हराम है , हराम है। तो वही मेरा उसूल है, डंके की चोट पर कह रहा हूँ कि इनकी गुलामी नहीं करूंगा।
सवाल करते करते मर जाऊं , नौकरी नहीं मिले तो चाय का ठेला लगा लूंगा , पानी की बोतल बेच लूंगा मगर इनकी गुलामी नहीं करूंगा ।।
वीडियो जंतर मंतर से है।
@lkopolice @55MTQ_ ये चोरी समान रखने और उतारने के समय होती है जहाँ पर cctv नहीं रहता ! दिल्ली एयरपोर्ट पर मेरा भी समान घड़ी परफ्यूम बैग से निकाल लिया था ! सब को पता है हाजी के बैग में कोई गिफ्ट होगा ही होगा ! लखनऊ पुलिस का आभार अगर ऐसी घटना पर लगाम लगे ।।।
लोकेशन: झारखंड हजारीबाग
हजारीबाग में संजीत पासवान ने 12 साल की एक मासूम मुस्लिम लड़की तमन्ना का रेप कर उसपर एसिड डालकर उसकी हत्या कर दी.
जब इन सब चीजों से मन नहीं भरा तो उसने तमन्ना के छोटे भाई रिजवान जिसकी उम्र महज 3 साल थी उसने उसकी भी हत्या कर शरीर के 4 टुकड़े कर दिए..
दुर्भाग्य से पुलिस वालों की बंदूक की नली जाम हो गई थी क्योंकि आरोपी हिंदू था…
हिंदू संगठन वालों के पैरों में लकवा लग गया था और कान से बहरे हो गए थे शायद इसी लिए उन मासूमो की चींख अभी तक उनके कानों में नहीं गई…