#AshokGehlot Sir,plz defer the draconian bill you are planning to put in assembly tomorrow as RTH-2022 as this will disturb all the quality medical work,reasonably economic services and peaceful working of Doctors and so also the care of patients will suffer,plz review the same.
@ANI@ABPNews@DDNewslive@CNNnews18@AmitShah@ashokgehlot51 शर्म आनी चाहिए भारत की ऐसी न्याय प्रणाली को जहां पर एक डॉक्टर के हत्या के जिम्मेदार लोगों को इतनी जल्दी जमानत मिल जाती है, तथा हजारों बेगुनाह डॉक्टर बिना किसी जुर्म के सजा भोगते रहते हैं
#justice for drarchana
एक वांछित अपराधी का स्टूडीओ में महिमा मंडन भारतीय पत्रकारिता में मूल्यों के ह्रास का स्पष्ट सूचक है ,इतिहास @zeerajasthan_ को इस कृत्य के लिए कभी माफ़ नहीं करेगा ।@UPCHAR4 @IMAdwarka @fogsiofficial
Is this what the @BJP4India stands for?we know their are political compulsions but does that justify leaving ideology & siding with criminals.Time u interveaned mr @PMOIndia@narendramodi
डा अर्चना उपाध्याय सुसाइड नही हत्या है
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन का पालन किए बिना ,विशेषज्ञ डॉक्टर्स की सलाह के बिना हत्या का मुकदमा कैसे दर्ज किया ?
जब उपद्रवी अस्पताल के बाहर शव रखकर डॉक्टर दंपति पर दबाव बना रहे थे तब प्रशासन उन्हे सुरक्षा क्यों न दे सका ?
#pmo#AshokGehlot#AAP#BJP#BJP4IND#congress
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इलाज के दौरान मरीज की मौत होने पर चिकित्सक के ऊपर धारा 302 के तहत मुकदमा दायर नहीं हो सकता,पुलिस ने डॉ अर्चना शर्मा के ऊपर 302 में मुकदमा दर्ज करके उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया
@NMC_IND द्वारा भारतीय चिकित्सा पद्धति के संरक्षण हेतु जैसे त्वरित/स्पष्ट/कठोर आदेश पारित किए जाते हैं, वैसे ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति के लिए भी होने चाहिए।
रोगों के गारंटी से उपचार की नुमाईश क्या जनताके संग धोखा नहीं?
एलोपैथी की निंदा करते विज्ञापनो पर कृपया संज्ञान लेवें? सादर।
@yogrishiramdev बाबाजी कमेंट करने से पहले थोड़ा रिसर्च कर लेना चाहिए......... ज्यादातर दूरदराज़ के इलाको के सरकारी हॉस्पिटल मे डिलीवरी तो हो सकती है पर सेजरियन नहीं हो सकता, उन मरीज़ों को प्राइवेट हॉस्पिटल मे ही जाना पड़ता है इसके अलावा ऑपरेशन का नाम आते ही लोग प्राइवेट का रुख कर लेते हैँ.
#StopYellowJournalismAgainstDoctors
ग्रामीणक्षत्रों में सिज़ेरियन 15हज़ार तक में हो जाता है।
कई निजीअस्पतालों में नार्मल डिलीवरी/सिज़ेरियन के शुल्क लगभग समान हैं।
ऐसी एकतरफा आक्रामक पत्रकारिता से मरीज़/डॉक्टर का रिश्ता आहत होता है।
कभी डॉक्टरो के सकारात्मक पक्ष क्यों नहीं छपते?
@1stIndiaNews@rituraj9999 Ias के कमरे मे कोई अनजान मिल गया तो राज्यवपी खबर बन गयी......... कोई चिकित्सक या अन्य कर्मचारी ड्यूटी करते हुए भीड़ द्वारा मार भी दिया जाये तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता.......... क्या कानून सबके लिए बराबर है.....
सीईए की सबसे बड़ी समस्या है अथॉरिटीज़ के असीमित अधिकार और उन अधिकारों के दुरुपयोग की आशंका।निजी अस्पतालों पर अनावश्यक नियम क़ानूनों का इतना भी भार न डालें कि उनका अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ जाए @UPCHAR4@RaghusharmaINC@1stIndiaNews@ashokgehlot51@patrikaraj
धोलपुर के जीवांश चिल्ड्रन हॉस्पिटल में तोड़ फोड़ व नर्सिंग कर्मचारी से मार पीट के दस दिन बाद भी अपराधियों के ख़िलाफ़ पुलीस द्वारा कोई कार्यवाही न करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है,मुख्यमंत्री जी संज्ञान लें @ashokgehlot51@UPCHAR4
@PoliceRajasthan sir इस घटना की गंभीरता और अपराधियों के दुस्साहस को देखते हुए तुरंत संज्ञान लें एवम दोषियों को कड़ी सजा दिलवाएं।
ये डॉक्टर और स्टाफ पर नहीं बल्कि धौलपुर शहर और कानून व्यवस्था का मखौल बनाया गया है ।
पूरे चिकित्सक समुदाय में इसे लेकर भारी रोष व्याप्त है
राजस्थान में चिकित्साकर्मियों के साथ हिंसा के विरुद्ध क़ानून बनने के तेरह वर्ष बाद भी इसे सही भावना से लागू नहीं किया जाना दुखद है,धोलपुर की घटना जीवंत उदाहरण है।@DholpurPolice
भीलवाड़ा के स्थानीय प्रशासन का तानाशाही उदाहरण-प्रजातांत्रिक तरीकों से नहीं बना काम तो अपनाया दमनकारी तंत्र।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में कार्य करने को अनिच्छुक एक स्थानीय अस्पताल को बिना ठोस कारणों से शनिवार को देर दोपहर में किया सीज़। ताकि सोमवार तक कानूनी मदद ही न मिल सके।
@lkantbhardwaj दिवंगत आत्मा को भगवान अपने चरणों में स्थान दे पर अगर हम भावनाओं को अलग रखकर सोचें तो बताओ इसमें हॉस्पिटल की क्या गलती है......
क्या हॉस्पिटल ने लापरवाही की.....
क्या हॉस्पिटल ने मरीज़ की जान बचाने की कोशिश नहीं की.....
क्या हॉस्पिटल ने मरीज़ के साथ भेदभाव किया.