अरे भाई मैं झूठ थोड़ी न बोल रहा हूं यह वीडियो देखिए 👇
कैसे असित यादव पर एक शोषित पीड़ित वर्ग के सांसद द्वारा SCSTACT लगवाया गया है असित यादव खुद बता रहे हैं।
अब तो सांसद जी को मुआवजा राशि भी मिलेगी आखिर शोषण जो हुआ है।
सिर्फ मंदिर की लाइट मांगने पर भला कैसे शोषण हो सकता है?
भाई स्वतंत्र भारद्वाज @_kattar__hindu का फुल सपोर्ट है भाई ने जो भी किया ठीक किया क्योंकि हमारे सामने अगर कोई हमारे धर्म के बारे में बुरा बोलेगा तो उसका इलाज करना हमारा धर्म है।
सारे वामपंथी और सनातन विरोधी भाई को अरेस्ट करवाने के लिए कैंपेन चला रहे है इसलिए सभी सनातनियों को भाई का फुल सपोर्ट करना होगा।
इस्लाम के नाम पर 14 वर्षीय बच्ची की जबरन शादी एक 63 वर्षीय बुज़ुर्ग से कर दी जाती है और महिला अधिकारों का ढोल पीटने वाले ख़ामोश रहते हैं। इन्हें केवल हिंदू धर्म में कमियाँ निकालनी होती हैं।🤔
कर्मा 👇
आतंकी यासीन मलिक के जेल जाने के बाद उसकी बेगम मुशाल , यासीन मलिक को छुड़वाने के लिए इधर उधर भागी , और पाकिस्तान में रहकर बड़े बड़े आतंकी और नेताओं से मिली
फिर क्या यासीन मलिक को छुड़वाने का भरोसा देकर इमान वालों ने यासीन मलिक की बेगम मुशाल को पेल दिया और ये एक जगह पर नहीं हुआ , जहां जहां ये गई, वहां सबने आगे सप्लाई जारी रखी
और अब इसकी खबर जेल में बैठे आतंकी को लगी तो उसकी रूह कांप गई
अब आतंकी ने अपनी बेगम को तीन तालाक लिखकर भेज दिया
और कहा , जहां मर्जी मुंह मार , लेकिन उसे छुड़ाने के लिए इधर उधर मुंह मत मार 🤣🤣
सामन्य वर्ग को तो पता ही नहीं होगा कि 1990 में ज़ब मंडल आयोग आया तब वीपी सिंह की सरकार बीजेपी के सहयोग से बनी थी , बीजेपी ने विरोध नहीं किया ,जब सड़क पर बच्चे उतर आए और बच्चे मर गए तब भी बीजेपी रथ यात्रा की नौटंकी कर रही थी , बीजेपी शुरू से सवर्ण विरोधी है बस हम जान नहीं पाए ।
“जौहर”
लाशों के साथ तक बलात्कार करने वाली मुस्लिम सेना से ख़ुद के शरीर को बचाने के लिए हुआ था ।
सूअरा क्या जाने जोहर ?
पद्मिनी की जगह सूअरा होती तो मरने के बजाय मुगलों के हरम में रातें रंगीन करना पसंद करती!😃
जिन्होंने माल-ए-गनीमत बनने की बजाय चुना जौहर को
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आज पूरे 36 घंटे बाद मेरे भाई की डेड बॉडी मुझे मिल गई है और अब मैं उसे बिहार लेकर जा रहा हूं,
सरकारी व्यस्था के नाम पर ये व्यस्था लोगों कितना तड़पाती है कल से लेकर आज तक मैने समझ लिया है,
ये 36 घंटे काटना मेरे लिए 36 साल के बराबर था, शवगृह के बाहर भी मुझे नहीं रुकने दिया गया,
मै बगल में एक लॉज में रुका था और मेरा भाई मुर्दाघर में पड़ा था, जिस भाई के साथ खेला, खाया और बड़ा हुआ उसको मुर्दाघर में देखकर दिल इतना तड़प रहा था और विवश था कि मैं बयान नहीं कर सकता हूं,
मै सरकार से यहीं निवेदन करूंगा कि कृपया करके व्यस्था के नाम पर लोगो को ना तड़पाए,
सरकारी काम ठीक है लेकिन लोगों के भावनाओं का ख्याल रखना भी जरूरी है और कोई भी इंसान इतने देर तक अपनो को तड़पते हुए देख नहीं सकता है,
मेरे साथ तो 10 लोग थे तो मैं ये समय जैसे तैसे काट लिया लेकिन मैं यहां देखा कि कोई अकेले अपने बाप, बेटे और पति के शव के लिए तड़प रहा था और उन्हें सारी करवाई भी करनी थी और रोना भी था,
इसीलिए सरकार से कहना चाहूंगा कि इस व्यस्था में बदलाव करें और इसे आसान बनाए 🙏
चंद्रशेखर रावण का कहना है कि कोई नीची जाति का दुकानदार अपनी जाति का बोर्ड लगाकर मिठाई बेचे, तो कितने लोग उससे मिठाई खरीदेंगे—
तो मेरा उनसे एक सवाल है:
अगर कोई डॉक्टर आरक्षण के जरिए डॉक्टर बना है और अपने नाम के आगे लिख दे कि वह आरक्षण से डॉक्टर बना है, तो कितने मरीज उससे इलाज कराना पसंद करेंगे?
कैंची धाम से पहले कहाँ थे नीब करौरी बाबा?
आज दुनिया भर में नीब करौरी बाबा का नाम लेते ही उत्तराखंड का कैंची धाम याद आता है। लेकिन जिस गाँव के नाम पर बाबा को यह प्रसिद्ध नाम मिला, वह उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में स्थित नीब करौरी गाँव है।
लगभग 18 वर्षों तक बाबा इसी क्षेत्र में रहे। यही उनके जीवन के उस दौर का साक्षी रहा, जब वे एकांत साधना और तप में लीन रहते थे।
इससे पहले बाबा गुजरात में रहे थे।
यहाँ उन्होंने एक भूमिगत गुफा बनवाई, जिसमें वे साधना करते थे। इसी तपोभूमि में उन्होंने अपनी गुफा के ठीक ऊपर हनुमान मंदिर बनवाया, शिवलिंग स्थापित कराया, हवन-कुंड और कुआँ बनवाया।
मार्च 1934 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और एक महीने तक यज्ञ और भंडारा चला।
फिर आया कैंची धाम का अध्याय - 1960 के दशक में बाबा ने कैंची क्षेत्र को सोमवारी महाराज के पुराने हवन-कुंड से जोड़ते हुए वहाँ आश्रम बनवाया। धीरे-धीरे कैंची धाम उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे प्रसिद्ध केंद्र बन गया।
फर्रुखाबाद उनके तपस्वी जीवन का साक्षी रहा, जबकि कैंची उनके सत्संग और भक्तों से जुड़े संस्मरणों का केंद्र।
विडंबना देखिए - जिस मिट्टी ने बाबा के तपस्वी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों को सँजोया, उसी स्थान की पहचान आज कैंची धाम की विशाल प्रसिद्धि के सामने पीछे रह गई है।
कैंची धाम बाबा की प्रसिद्धि का केंद्र है, लेकिन नीब करौरी गाँव उनके नाम और तपस्या की जड़ों में से एक है।
जय बाबा नीब करौरी! 🙏
भीम आर्मी का नेता चन्द्रशेखर आजाद अपनी जाति वालो को शपथ दिला रहा हैं,
कि आने वाले चुनाव में हम योगी जी को मुख्यमंत्री के पद से हटा फेंकेंगे।
और बोल रहा है, अगर कोई नेता #UGC का विरोध करता है। तो हमे उसे आने वाले चुनाव में #वोट नहीं देंगे।
नशा माफिया पूरे देश में अगर कोई चलाता है,
मैं आज पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूं वो ईसाई मिशनरी चला रहा है।
: डॉ. सुरेंद्र जैन, संयुक्त महासचिव, विहिप
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