सिमडेगा :- बदलते तकनीकी दौर में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक स्मार्ट, तेज एवं प्रभावी बनाने की दिशा में सिमडेगा, जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों की क्षमता वृद्धि तथा सरकारी कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय AI प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों के लिए AI प्रशिक्षण आयोजित करने की दिशा में सिमडेगा राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हुआ है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार नई तकनीकों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर सक्रिय एवं प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सिमडेगा जिला प्रशासन की यह पहल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तकनीक के समावेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यशाला में जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशासनिक कार्यों में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी गई। प्रथम दिवस के प्रशिक्षण में AI की मूल अवधारणाओं, विभिन्न AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा सरकारी कार्यों में इसके उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखते हुए Hands-on Practical Sessions के माध्यम से प्रतिभागियों को AI टूल्स का प्रत्यक्ष अभ्यास भी कराया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने जाना कि AI की मदद से कार्यालयीन दस्तावेज तैयार करने, सूचनाओं एवं आंकड़ों का विश्लेषण करने, रिपोर्ट और प्रस्तुतीकरण तैयार करने, संचार कार्यों तथा दैनिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, तेज एवं व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
AI के माध्यम से पदाधिकारी कम समय में अधिक प्रभावी तरीके से कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाने के साथ आम नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। जिला प्रशासन का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को सरल, पारदर्शी, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना है।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन GDI के विशेषज्ञ श्री अंशुल गुप्ता एवं सुश्री जान्हवी बहादुर द्वारा किया गया। वहीं JSLPS की ओर से श्री अमित जैन, प्रोग्राम मैनेजर तथा श्री हेम राज, मैनेजर-कम्युनिकेशन ने प्रशिक्षण के समन्वय एवं तकनीकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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सफलता की कहानी-23
सरकारी योजना से मिला अवसर
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में झारखंड सरकार की पशुपालन विभाग की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं। जिला प्रशासन, सिमडेगा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है और परिवार आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
इसी क्रम में जलडेगा प्रखंड के टिनगिना पंचायत अंतर्गत ढोढ़ीबहार गांव निवासी श्री असीम होरो की कहानी सामने आती है।
12वीं तक पढ़ाई करने वाले असीम को सोशल मीडिया पर मुर्गी पालन से जुड़े वीडियो देखने के बाद इस काम को व्यवसाय के रूप में शुरू करने की प्रेरणा मिली। इसी दौरान जलडेगा में कार्यरत लीड्स (लाइफ एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सपोर्ट) संस्था द्वारा आयोजित बैठक में उनकी माता श्रीमती कुंवारी होरो, जो विधवा हैं, को पशुपालन विभाग की योजना के तहत मुर्गी पालन शुरू करने की जानकारी मिली।
योजना के तहत आवेदन करने के बाद उनकी माता को 500 ब्रॉयलर चूजे निःशुल्क प्राप्त हुए। असीम ने इस अवसर का सही उपयोग करते हुए जुलाई माह से व्यवस्थित तरीके से मुर्गी पालन शुरू किया। वे सिमडेगा से चारा लाकर मुर्गियों की नियमित देखभाल और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। उनकी मेहनत और लगातार देखभाल का परिणाम है कि आज उन्हें मुर्गी पालन से लगभग 10,000 रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।
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📍 सिमडेगा में ‘प्रोजेक्ट पोषण’ की शुरुआत!
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, संतुलित आहार और पोषण संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने आकांक्षी जिला सिमडेगा में अपनी CSR पहल ‘प्रोजेक्ट पोषण’ का शुभारंभ किया। सेंट ऐनीज गर्ल्स हाई स्कूल, लचरागढ़ में इसका उद्घाटन किया।
मुख्य आकर्षण:
🎯 उद्देश्य: बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और पोषक तत्वों की कमी को दूर करना।
👧 लाभार्थी: इंडियन ऑयल की पाइपलाइन के राइट ऑफ वे (ROW) के आसपास स्थित 41 सरकारी स्कूलों के 6,471 बच्चों को 6 महीने तक पौष्टिक मिलेट न्यूट्री बार उपलब्ध कराए जाएंगे।
💰 बजट: ₹34.95 लाख की स्वीकृत लागत।
🌾 विशेषता: मड़ुआ/रागी और स्थानीय सुपरफूड आधारित पौष्टिक खान-पान को बढ़ावा।
🤝 क्रियान्वयन: HLL मैनेजमेंट अकादमी द्वारा संचालित।
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सफलता की कहानी – 21
मिट्टी से जुड़कर रचा भविष्य
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार द्वारा संचालित किसान-हितैषी योजनाओं तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के सतत प्रयासों से जिले के अनेक युवा किसान आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। पाकरटांड़ प्रखंड के ग्राम सोगड़ा निवासी श्री हरीश प्रधान की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है। वनस्पति विज्ञान में एम.एससी. करने के बाद श्री हरीश प्रधान का चयन सहायक पुलिस, झारखंड के पद पर हुआ था। हालांकि, उन्होंने सरकारी नौकरी के बजाय अपने गांव और खेती को अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। लगभग 6 एकड़ भूमि में उन्होंने टमाटर, जरबेरा, मिर्च, फूलगोभी, कद्दू और मड़ुआ जैसी फसलों की खेती शुरू की।
खेती को अधिक लाभकारी और जल-कुशल बनाने के लिए उन्होंने RKVY-PDMC (Per Drop More Crop) योजना का लाभ लेते हुए ड्रिप इरिगेशन अपनाया। यह योजना सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से जल उपयोग दक्षता बढ़ाने, सिंचाई लागत कम करने और कम पानी में अधिक उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। ड्रिप सिंचाई से फसलों की जड़ों तक आवश्यकता के अनुसार सीधे पानी पहुंचता है, जिससे पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन में सुधार होता है। इसके साथ ही, उद्यान प्रभाग से प्लास्टिक मल्चिंग एवं संरक्षित फूलों की खेती का लाभ लेकर उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया।
इन प्रयासों का परिणाम आज स्पष्ट दिखाई दे रहा है। श्री हरीश प्रधान वर्तमान में खेती से ₹40,000 से ₹45,000 प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। उनके उत्कृष्ट कृषि कार्य के लिए उन्हें रांची के कृषि व्यापार मेले में सम्मानित भी किया गया।
युवाओं और किसानों के लिए उनका संदेश है—
आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और बाजार की मांग के अनुरूप खेती करें, तो गांव में रहकर भी अच्छी और सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है।
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08631/32 हटिया–बानो पैसेंजर उद्घाटन स्पेशल का बानो रेलवे स्टेशन पर सामान्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान ट्रेन को हल्के तौर पर फूल-मालाओं से सजाया गया और स्वागत के बाद ट्रेन को हटिया के लिए रवाना किया गया।
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सफलता की कहानी -19
स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना जी.यू.पी. हाई स्कूल, केशलपुर
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग से जिले के विद्यालय स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे हैं। पाकरटांड़ प्रखंड अंतर्गत जी.यू.पी. हाई स्कूल, केशलपुर इसका एक प्रेरणादायी उदाहरण है। इस विद्यालय में कुल 186 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। प्रधानाध्यापक श्री अमोद कुमार रंजन के नेतृत्व में विद्यालय को राज्य स्तर पर 4 बार ‘मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ तथा केंद्र स्तर पर 1 बार ‘स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग’ से सम्मानित किया जा चुका है। राज्य स्तरीय पुरस्कार के रूप में विद्यालय को 2 लाख रुपये की राशि भी प्राप्त हुई है।
विद्यालय में गोबर एवं अंडे के छिलकों से जैविक खाद तैयार की जाती है। औषधि वाटिका के माध्यम से जैविक कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण भी विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्वच्छ शौचालय, नियमित स्वच्छता व्यवस्था, विद्यार्थियों के लिए आर.ओ. फिल्टर से शुद्ध पेयजल, तथा दीवारों, गेट और शौचालयों पर बाला पेंटिंग के माध्यम से विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर और सीखने के अनुकूल बनाया गया है। साथ ही, मासिक धर्म अपशिष्ट के उचित प्रबंधन और जैव-निम्नीकरणीय कचरे के निपटान की भी विशेष व्यवस्था की गई है। विद्यालय परिसर में किचन गार्डन विकसित किया गया है, जहाँ बैंगन, टमाटर, केला और नींबू जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। ऊर्जा की बचत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल भी स्थापित किए गए हैं। विद्यालय में नियमित रूप से ऊर्जा अंकेक्षण, जल अंकेक्षण एवं आपदा अंकेक्षण भी किया जाता है, जिससे संसाधनों के बेहतर उपयोग और सुरक्षित विद्यालय वातावरण को सुनिश्चित किया जा सके।
इन सभी प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर भी दिखाई देता है। स्वच्छ, सुरक्षित और सीखने के अनुकूल वातावरण के कारण विद्यालय में ड्रॉपआउट की दर बेहद कम है तथा विद्यार्थी विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों और सीखने की प्रक्रियाओं में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। विद्यालय द्वारा बाल तस्करी एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया जाता है। इसके साथ ही, विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं आसपास के ग्रामीणों के बीच बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने तथा शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता भी फैलाई जाती है। इस प्रकार विद्यालय बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के लिए समुदाय को भी जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में पंचायत एवं पुरस्कार राशि से प्राप्त वित्तीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विद्यालय की यह उपलब्धि न केवल स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि बाल संरक्षण, शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।
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सफलता की कहानी -18
संघर्ष से समृद्धि तक: दयामनी किंडो ने स्वयं सहायता समूह से बदली अपनी तकदीर
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग से जिले की महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। केरसई प्रखंड के पथरीटोली गांव निवासी श्रीमती दयामनी किंडो की पारिवारिक आजीविका पहले मुख्यतः धान की खेती, बकरी पालन एवं मजदूरी पर निर्भर थी। वर्ष 2020 में वे जेएसएलपीएस अंतर्गत कमल स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और सक्रिय भागीदारी को देखते हुए उन्हें बागवानी सखी कैडर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
सितंबर 2025 में हार्डनिंग सेंटर के माध्यम से उन्हें 40 बतख के चूजे प्राप्त हुए तथा समूह से 32,000 रुपये का ऋण लेकर बतख एवं बकरी पालन गतिविधियों का विस्तार किया। बतख-अंडा बिक्री से 20,000 रुपये, बकरी-खस्सी बिक्री से 52,000 रुपये तथा कैडर व कृषि गतिविधियों से 22,600 रुपये सहित कुल 94,600 रुपये की आय अर्जित की।
आज इस आय से उनकी दोनों बेटियों की शिक्षा एवं घरेलू जरूरतें सहजता से पूर्ण हो रही हैं। दयामनी की सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य परिवार भी अब पशुपालन अपनाने लगे हैं, जो झारखंड सरकार एवं जिला प्रशासन, सिमडेगा की सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था का जीवंत प्रमाण है।
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राष्ट्रीय खेल दिवस सह हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की जयंती के अवसर पर ‘खेलेगा भारत, जीतेगा भारत’ की थीम के तहत सिमडेगा में हॉकी सिमडेगा एवं खेल विभाग, सिमडेगा के संयुक्त तत्वावधान में 21वीं मेजर ध्यानचंद सीनियर सिमडेगा जिला महिला एवं पुरुष हॉकी चैंपियनशिप-2026 का भव्य शुभारंभ किया गया।
अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन समारोह में खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया तथा महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
उद्घाटन समारोह के दौरान 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर राष्ट्रीय महिला हॉकी चैंपियनशिप-2026 में रजत पदक जीतने वाली हॉकी झारखंड टीम की सदस्य खिलाड़ियों को जिला खेल कार्यालय की ओर से मोमेंटो, अंगवस्त्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा अंडर-18 एशिया कप हॉकी में भारतीय टीम की सदस्य रहीं तथा तीन मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार हासिल करने वाली संदीपा कुमारी की प्राथमिक कोच सुभीला मिंज को भी जिला खेल कार्यालय, सिमडेगा की ओर से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के अवसर पर जिला खेल कार्यालय, सिमडेगा द्वारा दिनांक 28.08.2026 को “TRIBUTE - श्रद्धांजलि" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई साथ ही " push up Challenge", " dribbling Challenge" shipping Challenge å "Meet the Champions" जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं खेलप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम परिसर में सिंदूर का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। खिलाड़ियों एवं जिलेवासियों से अपने जीवन में प्रत्येक वर्ष कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने का आह्वान किया। इस दौरान कई खिलाड़ी एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
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🚆Good news for Bano, Simdega District! 🎉
A daily unreserved passenger special train (05869/05870) will run between Hatia–Bano–Hatia from Sept 1 to Nov 30, 2026, with 8 coaches.
A big relief for rural passengers! 🙌
Thank you @drmrnc sir.!
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One Portal. One Purpose. Easier Access.
The PM-KISAN Portal helps farmers with PM-KISAN-related agricultural queries and services—making information more accessible, simple, and convenient.
Simple. Farmer-friendly. Accessible.
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Thhethaitangar NTFP Farmers Producer Co Ltd., #FPO with 1182 farmer members, from #Simdega#PMDhanDhaanyaKrishiYojana district #Jharkhand is cultivating vegetables using seeds received through CSR support from @IRFC_1986.
Farmers adopting good practices like intercropping, intercultural operations, ridge & furrow field preparation to improve crop production.
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सफलता की कहानी – 13
हरियाली से खुशहाली: सिमडेगा की पोषण वाटिकाओं की कहानी
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार की जन-केंद्रित एवं संवेदनशील विकास नीति तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के प्रभावी, सतत एवं जमीनी प्रयासों से जिले में चयनित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों को अधिक सुदृढ़ एवं पोषण-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
दृष्टि स्पष्ट है- गांव कितना भी दूर क्यों न हो, हर बच्चे तक केवल भोजन नहीं, बल्कि पौष्टिक और ताज़ा भोजन पहुँचे। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए समाज कल्याण विभाग द्वारा जिले के सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाओं का निर्माण एवं विकास किया जा रहा है। इन पोषण वाटिकाओं का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध कराए जाने वाले गर्म-पके भोजन में स्थानीय स्तर पर उगाई गई ताज़ी एवं पौष्टिक हरी सब्ज़ियों और साग को शामिल कर भोजन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है।
इन पोषण वाटिकाओं के माध्यम से ‘Farm-to-Fork’ की अवधारणा को आंगनबाड़ी केंद्रों में साकार किया जा रहा है। वाटिका में उगाई गई ताज़ी सब्ज़ियों को आवश्यकतानुसार तोड़ा जाता है, उनकी स्वच्छता एवं तैयारी के बाद इन्हें गर्म-पके भोजन में शामिल किया जाता है। इस प्रकार बीज से लेकर बच्चों की थाली तक की यात्रा स्थानीय स्तर पर पूरी हो रही है- एक ऐसी यात्रा जो छोटी, शुद्ध और पोषण से भरपूर है।
जिला प्रशासन, सिमडेगा ने इस पहल को केवल एक अभियान तक सीमित न रखते हुए नियमित निगरानी, मार्गदर्शन एवं निरंतर सहयोग को प्राथमिकता दी है। बीज उपलब्ध कराने से लेकर तकनीकी सहयोग, अनुश्रवण और आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रोत्साहित करने तक, प्रशासन द्वारा हर स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि पोषण वाटिकाएं केवल स्थापित न हों, बल्कि निरंतर विकसित और उपयोगी बनी रहें। पोषण वाटिकाओं से प्राप्त ताज़ी हरी सब्ज़ियों के उपयोग से बच्चों को मिलने वाला भोजन विटामिन एवं खनिजों से अधिक समृद्ध हो रहा है। इसके सकारात्मक प्रभाव भी धीरे-धीरे दिखाई देने लगे हैं- बच्चे अधिक सक्रिय और ऊर्जावान नजर आ रहे हैं तथा माताएं भी इस बदलाव को महसूस कर रही हैं। कुपोषण के खिलाफ लंबे संघर्ष में ये छोटी-छोटी हरी वाटिकाएं अब एक महत्वपूर्ण सहयोगी बन रही हैं।
यह पहल झारखंड सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा और जिला प्रशासन, सिमडेगा की निरंतर जमीनी प्रतिबद्धता का परिणाम है। पोषण को केवल एक योजना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानते हुए साधारण आंगनबाड़ी केंद्रों को देखभाल, पोषण और स्वस्थ बचपन के जीवंत केंद्रों में बदला जा रहा है।
कुपोषण के खिलाफ इस प्रयास में पोषण वाटिका केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि उम्मीद का प्रतीक बन गई है। यह दर्शाती है कि जब सरकारी संकल्प, प्रशासनिक समर्पण और सामुदायिक सहभागिता एक साथ आते हैं, तो जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा भी पूरी पीढ़ी के पोषण और बेहतर भविष्य की नींव बन सकता है।
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सफलता की कहानी-12
बकीकोना में सौर ऊर्जा से विकास की नई रोशनी
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार की जन-केंद्रित विकास नीति एवं जिला प्रशासन, सिमडेगा के सक्रिय एवं संवेदनशील प्रशासन के सतत प्रयासों से जिले के दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन हो रहे हैं। वर्ष 2026 में सिमडेगा के 6 प्रखंडों के 129 गांवों तक पहुंच बनाकर इस समावेशी विकास की दिशा को और विस्तार दिया गया है।
केरसेई प्रखंड का बकीकोना इस परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है। यहां 85 परिवार लंबे समय तक विद्युत सुविधा से वंचित थे। रोशनी के लिए केरोसिन तथा सिंचाई के लिए डीजल पंप पर निर्भरता से ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ पड़ता था और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। वर्ष 2025 में 17.98 किलोवाट क्षमता का सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित होने से सभी 85 परिवारों, प्राथमिक विद्यालय, सामुदायिक संस्थानों एवं पूरे टोले को विद्युत सुविधा प्राप्त हुई।
सौर ऊर्जा के आगमन के बाद गांव में राइस हॉलर, आटा चक्की एवं 5 सिंचाई पंप संचालित हो रहे हैं, जिससे कृषि एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
श्रीमती माधुरी सामा मिंज के परिवार के लिए बिजली ने शिक्षा एवं घरेलू सुविधाओं के नए अवसर खोले, वहीं किसान श्री इमैनुअल तिर्की के लिए सौर ऊर्जा ने सिंचाई तथा फसल विविधीकरण की संभावनाओं को मजबूत किया।
इस परिवर्तन को जमीन पर साकार करने में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला प्रशासन, सिमडेगा के मार्गदर्शन, सहयोग और निरंतर समर्थन के बिना इस पहल को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारना संभव नहीं होता। जिला प्रशासन के समन्वय एवं TRI के तकनीकी और सामुदायिक सहयोग ने बकीकोना जैसे दूरस्थ गांव में स्थायी ऊर्जा समाधान को आकार दिया।
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सफलता के कहानी-11
संघर्ष से सफलता की ओर: अनिमा बागे की शिक्षा यात्रा
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में झारखंड सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के निरंतर प्रयासों से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा एवं विकास के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बानो प्रखंड के कौवाजोर गाँव की अनिमा बागे की कहानी इसी प्रयास का एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जहाँ सरकारी सहायता ने उन्हें अपनी शिक्षा पुनः शुरू करने और शिक्षक बनने के अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।
बानो प्रखंड के कौवाजोर गाँव की रहने वाली अनिमा बागे एक साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं। उनके पिता सुखमन बागे एवं माता मुनिका बागे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण इंटरमीडिएट के बाद शिक्षक प्रशिक्षण की फीस, पुस्तकों एवं अन्य शैक्षणिक खर्चों का प्रबंध करना परिवार के लिए कठिन था। आर्थिक परिस्थितियों के कारण अनिमा को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी।
इसी दौरान उन्हें ‘सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ की जानकारी मिली। संबंधित विभाग एवं कर्मियों के सहयोग से अनिमा ने योजना के लिए आवेदन किया और प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ₹20,000 की आर्थिक सहायता प्राप्त की।
यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपने सपनों को दोबारा साकार करने का अवसर बनी। वर्ष 2025 की शुरुआत में अनिमा ने राँची स्थित एस.पी.जी. महिला प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में नामांकन कराया। इसके बाद से वह निरंतर शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और अपने जीवन को बेहतर दिशा देने की ओर आगे बढ़ रही हैं।
अनिमा की यह यात्रा दर्शाती है कि सही समय पर मिली सरकारी सहायता किसी जरूरतमंद बेटी के जीवन में निर्णायक बदलाव ला सकती है। यह उपलब्धि झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और जिला प्रशासन, सिमडेगा की योजनाओं को पात्र लाभुकों तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
अनिमा की कहानी संघर्ष से संकल्प, और संकल्प से सफलता की ओर बढ़ते कदमों की कहानी है—जहाँ सरकारी योजना ने सपनों को सहारा दिया और मेहनत ने उन्हें नई उड़ान दी।
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