नहीं चाहिए ऐसा ट्रांसफर जिसमें ट्रांसफर करने वाले को ये तक नहीं समझ कि किसको ट्रांसफर की नितांत जरूरत है और किसका ट्रांसफर बाद में किया जा सकता है।
#ReconsiderTeachersTransfer
कुछ दिनों पहले कंगना रनौत का एक फोटो वायरल हो रहा था , जिसको लेकर दावा किया जा रहा था कि उन्होंने शादी कर लिया हैं ,
लेकिन बाद में कंगना ने क्लियर किया कि ये उनकी अगली फिल्म का लुक हैं , न कि शादी कर लिया हैं !
इसके खबर के बाद मेरे मन में एक सवाल उठ रहा हैं कि ये भी फिल्म की शूटिंग कर रही हैं ,
रवि किशन भी हर साल दो चार फिल्म और वेबसीरीज में दिख जाते हैं , जबकि दोनों सांसद हैं !
सरकार से हर महीने लाखों की तनख्वाह लेते हैं , बंगला लेते हैं , ऑफिस के लिए भी पैसे मिलते हैं , रोज के क्षेत्र में खर्च करने के लिए ढाई हजार अलग से मिलते हैं , मोबाइल रिचार्ज के लिए भी 15 हजार लेते हैं ,
ट्रेन , प्लेन का फ्री टिकट भी लेते हैं , कैंटीन में सस्ता रायता भी पीते हैं , आजीवन पेंशन भी लेते हैं , फिर भी करोड़ो लेकर फिल्मों में काम करते हैं !
जबकि एक 30 से 35 हजार कमाने वाला सरकारी कर्मचारी कोई और काम नहीं कर सकता , यहां तक कि कही इन्वेस्ट भी नहीं कर सकता !
फिर इन नेताओं को इतनी छूट क्यों ?
सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए लेकर भी अपना काम करते रहते हैं , जबकि जनता ने जिस काम कर लिये वोट देकर चुना था वो काम नहीं करते हैं !
इस लिस्ट में राजीव प्रताप रूड़ी का भी नाम है जो आज भी पायलट की नौकरी करते हैं , हरभजन सिंह कमेंट्री करके पैसे कमाते हैं ,
ऐसे ही न जाने कितने ही सांसद विधायक मलाई खा रहे हैं , इनके लिए भी कोई कानून बनना चाहिए,
सांसद भी अपने क्षेत्र में उपलब्ध रहे दिन भर , तब जाकर विकास होगा !
Dear @TRAI,
Imagine your recharge plan is going to expire in 2 days.
Imagine someone is following your sister late at night, and she is trying to call you for help.
Imagine you are injured on the road and desperately trying to call a family member.
But before the call even connects, telecom companies play long warnings like “your plan is expiring soon, please recharge” in two languages. During this warning, the actual call does not connect, and valuable time gets wasted.
In emergency situations, even a few seconds matter. These repeated recharge reminders are extremely frustrating.
We already know when to recharge. Customers should not be forced to listen to long, nonsensical warnings.
Please order all telecom companies to immediately stop these nonsense warnings before calls, or allow the call to connect while the warning plays in the background.
Be serious.
उसका नाम रुचिका गिरहोत्रा था।
वह 14 साल की थी। हरियाणा के पंचकूला की एक टेनिस खिलाड़ी।
12 अगस्त 1990 को वह S.P.S. राठौड़ से मिलने उनके ऑफिस गई। वह हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के प्रमुख और आईजीपी थे। उन्होंने उसके पिता से वादा किया था कि वह उसे खास कोचिंग दिलवाएंगे।
जैसे ही उसकी दोस्त कमरे से बाहर गई, उसने रुचिका के साथ छेड़छाड़ की।
तीन दिन बाद परिवार ने शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद प्रताड़ना शुरू हुई।
राठौड़ ने उसे स्कूल से निकलवा दिया। उसके पिता को बैंक की नौकरी से सस्पेंड करवा दिया गया। उसके भाई आशु पर छह झूठे केस दर्ज किए गए। परिवार का घर बिकवा दिया गया।
परिवार को शिमला के बाहरी इलाके में जाकर मिट्टी भराई का काम करके गुज़ारा करना पड़ा।
28 दिसंबर 1993 को, जब आशु को हथकड़ी लगाकर मोहल्ले में घुमाया गया, कुछ ही दिनों बाद रुचिका ने ज़हर खा लिया।
अगले दिन उसकी मौत हो गई। वह सिर्फ 17 साल की थी।
उसी रात राठौड़ ने पार्टी की।
उसने रुचिका के पिता को उसकी लाश देने से मना कर दिया, जब तक कि वे खाली कागज़ों पर साइन न करें। बाद में उन्हीं कागज़ों से झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई।
पुलिस जांच में FIR की सिफारिश हुई, फिर भी राठौड़ को प्रमोशन मिलते रहे।
1999 में वह हरियाणा का डीजीपी बन गया।
यह केस 19 साल चला।
40 से ज्यादा स्थगन और 400 से ज्यादा सुनवाई।
दिसंबर 2009 में उसे छेड़छाड़ का दोषी ठहराया गया।
सिर्फ 6 महीने की सजा और ₹1000 का जुर्माना।
बाद में सजा 18 महीने की हुई।
2016 में सुप्रीम कोर्ट ने दोष कायम रखा, लेकिन सजा पहले ही काटी हुई मानकर उसे छोड़ दिया गया।
जिस जज ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ने की कोशिश की, उसे समय से पहले रिटायर कर दिया गया।
जिस जज ने ये आरोप खारिज किए, वह रुचिका के परिवार का पड़ोसी था और संपत्ति विवाद में शामिल था।
बाद में S.P.S. राठौड़ को पंचकूला के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में VIP गेस्ट के रूप में बुलाया गया।
रुचिका 14 साल की थी जब उसके साथ छेड़छाड़ हुई।
17 साल की थी जब उसने दम तोड़ा।
ऐसी कहानियां जिन्हें भारत को याद रखना चाहिए।
•जब हमें हवा साफ करनी थी तब हमने एयर प्यूरीफायर लगाए
•जब हमें नदियां ,तालाब और अंडरग्राउंड एक्विफर्स को साफ रखना था तब हमने वाटर प्यूरीफायर लगाए,
•जब हमें गर्मी से बचने के लिए पेड़ लगाने थे तब हमने AC लगाए,
•जब हमें पूरे देश को साफ रखना था , तब हमने केवल अपना घर साफ किया ,
•जब हमें पानी बचाना था , तब हमने कई फीट बोरिंग करके फिजूल पानी बर्बाद करना उचित समझा,
•जब हमें असल मुद्दों पर सवाल उठाने थे , तब हम जाति धर्म जैसे मुद्दों में उलझे रहे ,
•जब हमें देश का सोचना था , तब हमने केवल अपना सोचा।
अब भुगतो।
शीर्षक: बिहार में एक शिक्षक के घर पर बिजली विभाग की गुंडागर्दी! @GAYAPOLICEBIHAR@bihar_police@SspGaya
विषय: मैं गया का एक शिक्षक हूँ। पटना मुख्यालय द्वारा ईमेल पर ₹35,321 की बिलिंग त्रुटि स्वीकारने के बावजूद सुधार नहीं किया गया। मामला CGRF गया (वाद: 166/2025-26) में लंबित होने पर भी 31.03.26 से बिजली काट दी गई है।
आज की घटना (24.04.26): स्थानीय JEE 15 अज्ञात लोगों के साथ मेरे घर में जबरन घुसे। मेरी पत्नी (जो स्वयं अकेली थीं) के साथ अभद्रता की गई और डरा-धमकाकर साक्ष्य (मीटर) उखाड़ लिया गया। एक शिक्षक के साथ ऐसा अपराधी जैसा व्यवहार BNS की धारा 329(3), 74/79 और 238 का उल्लंघन है।
मैंने फतेहपुर थाना को ईमेल से शिकायत भेजी है पर अभी तक रसीद नहीं मिली। @NitishKumar@samrat4bjp@EnergyBihar महोदय, क्या बिहार में शिक्षकों की यही गरिमा है? कृपया दोषियों पर FIR दर्ज करें और न्याय दिलाएं।
#TeacherInsulted #JusticeForTeacher #BiharPolice #Gaya @SEVA_SBPDCL@gaya_dm@India_NHRC@VijayKrSinhaBih@BiharEnergy@nch1915@DARPG_GoI@VijayKChy
◾19/20 अप्रैल को टीआरई 4.0 की अधिसूचना जारी की जाएगी।
◾ आवेदन प्रक्रिया 25/26 अप्रैल से प्रारंभ होगी।
◾ परीक्षा निर्धारित समय पर आयोजित की जाएगी।
:-BPSC
7 people die on Mumbai’s railway tracks every single day.
In 2024, 2,468 people lost their lives.
In 2023, it was 2,590.
In 2022, it was 2,507.
How many more deaths will it take before action is treated as a priority?
New York roads are filled with potholes and garbage.
New York officials should visit Bihar and travel through the bypass road from Gaya to Bodh Gaya, or just visit the Kedarnath Market and learn how to build proper road infrastructure.
>स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे,
>बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं,
>ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है,
>ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था।
>1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था
> मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था
>लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था
>दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था।
"दरअसल इन सबके बारे में सिस्टम को पता होता है, बस भ्रष्टाचार की वजह से चलता रहता है।
जब पकड़े जाते हैं तब सबकुछ सामने आता है।
हाइयर ज्यूडिशियरी के जजों का जीवन
>भाई भतीजावाद की सीढ़ी चढ़कर जज बनो
>सर पर बरतानिया हुकूमत वाली टोपी पहन कर शपथ लो
>कांख में अंग्रेजी किताबें फंसा कर सेमिनारों में दिस डैट करो
>विधायिका और कार्यपालिका के कामों में टांग अड़ाओ
>दुनिया भर को मोरालिटी पर ज्ञान पेलो
>हर चीज में रिफॉर्म की बात करो लेकिन जब खुद की बात आए तो उसको ज्यूडिशियरी पर हमला बताओ
>जब कोई आपसे सवाल पूछे तो तुरंत कंटेंप्ट लगाओ
>देश भर में अपराधियों को सजा दो
>लेकिन जब खुद को सजा मिलने वाली हो तो इस्तीफा देकर मस्त टैक्स के पैसों से रिटायरमेंट के मजे लो।
NCERT शायद इस बारे में लिख पाए या न लिख पाए ,
लेकिन हम लिखेंगे कि देश की जुडिशरी और जज इतने ईमानदार हैं कि भ्रष्टाचार की कार्यवाही चालू होने पर इंपीच होने से पहले ही पेंशन चालू रखने के लिए इस्तीफा दे देते हैं।
>नाम जस्टिस यशवंत वर्मा
>पहले दिल्ली हाईकोर्ट ,अब यूपी हाई कोर्ट में
>घर से जले हुए नोटों की गड्डियां मिली
>पहले मामले को दबाने की कोशिश हुई
>लेकिन सोशल मीडिया ने उसे नाकाम कर दिया
>फिर कार्यवाही हुई , इंपीचमेंट होने वाला था
>लेकिन उससे पहले जज साहब ने इस्तीफा दे दिया
>इंपीचमेंट से पहले इस्तीफा देने से उनके पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स चालू रहेंगे
>इससे पहल भी दो जजों ने इसी रास्ते का इस्तेमाल किया
>अब देश की जनता एक भ्रष्टाचारी के पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स के लिए टैक्स देगी
>इसके खिलाफ हम सबको आवाज उठानी चाहिए।
पूरे देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति बचा होगा जिसने कैंसर जैसी बीमारी को नजदीक से न देखा हो , क्या नेता क्या अभिनेता कोई इससे बचा नहीं है,
इसके अलावा तमाम ऐसे डिसऑर्डर्स हैं जिनसे लोग डेली बेसिस में जूझ रहे हैं, डॉक्टर्स से आप कारण पूछेंगे तो वो आपको लाइफस्टाइल बोल कर आगे बढ़ जायेंगे,
आज के समय में हर कोई व्यक्ति स्वयं के लिए सारे सामान नहीं बना सकते , सुबह दांतों की सफाई से लेकर रात में कुल्ला करके सोने तक हम फैक्टरीज द्वारा बनाई गई पैकेज्ड चीजों पर निर्भर हैं और हर चीज पर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स दे रहे हैं,
हम इस भरोसे पर चल रहे हैं कि इतना टैक्स देने के बाद सरकार द्वारा संचालित एजेंसियां अपना काम बखूबी कर रही हैं और हम सही चीज़ें कंज्यूम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं , हम इस मामले में पूरी दुनिया से काफी पीछे हैं,
पूरे देश में मिलावट चरम पर है, जो भी चीजें हम सुबह से शाम तक इस्तेमाल करते हैं ,उनमें प्रिजर्वेटिव्स से लेकर खराब और खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है, कुछ ब्रांडेड प्रोडक्ट्स को छोड़ दे तो हालत बहुत खराब है , ये काम धड़ल्ले से चल रहा है और रोज बढ़ रहा है ,
जहां दुनिया के कई देशों में एजेंसियां बहुत सजग होकर काम कर रही हैं, बेहतरीन से बेहतरीन गाइडलाइंस और पैरामीटर्स बना रही हैं और टेक्नोजिकली बहुत एडवांस्ड हैं,वहां FSSAI जैसी एजेंसियां केवल लाइसेंस देने में और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ,
आप और हम क्या बीमार होने का इंतजार कर रहे हैं?
इस मामले में हम सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए , खुद बीमार होने का इंतजार न करें। @fssaiindia
गाइज,
~जितने भी बड़े हॉस्पिटल और बड़े प्राइवेट स्कूल हैं,
~वो सब किसी न किसी मंत्री, विधायक, नेताओं के हैं।
~इसलिए ये लड़ाई थोड़ी लंबी चलेगी, इसके लिए आवाज उठानी पड़ेगी।
आर यू रेडी?