कैब ड्राइवर का आरोप है कि चार रेलवे कर्मचारी बैठे थे जिनमे से किसी ने “चमार साले” कहकर जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया। जहाँ कैब ड्राइवर ने तुरंत कैमरा चालू किया और जातिसूचक शब्द के विरोध में उन रेलवे कर्मचारियों को ऐसी फटकार लगाई कि उनका चेहरा उतर गया और मुझे लगता अब कभी जीवन में ये लोग जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
कैब ड्राइवर सच में बहादुर था उसने समाज के अपमान को बर्दाश्त नहीं ना उस जातिगत अपमान को जहर की तरह पिया बल्कि अकेला ही उन चारों से भिड़ गया और तरीके से फटकार लगाई।