@WeIndiasMuslims Wherever you live .. step by step .. shoulder to shoulder .. with voice from voice .. keep standing .. like Sahaba e Rasool ALLAH peace be upon him
23 मई 1949 की रात को बाबरी मस्जिद में चोरी से घुस कर बैरागियों ने मूर्ति रख दी थी
फिर अगले दिन हंगामा किया के रामलला प्रकट हुए हैं।
आज वहां एक विशाल मंदिर है।
UN, वेस्ट बैंक और गाजा को Occupide Palestine Territory मानता है।
UN Seccurity Counsil Resolution 2334(2016 ) कहा: कि वहा इजरायली बतियां बनाना अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
लेकिन इजरायल फिलिस्तीनी के
जैतून के बागों पर बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जा जारी रखा है।
#freepalestine️
📍 शालीमार गाँव, दिल्ली
दिल्ली में एक मस्जिद की शहादत के बाद डीजे लेकर जश्न मनाने पहुँचे हिन्दू समाज के लोग...!!
आखिर किसी की इबादतगाह के टूटने पर जश्न मनाने की मानसिकता कहां से आती है? धर्म के नाम पर नफरत फैलाकर हम समाज को किस दिशा में ले जा रहे हैं?
इंसानियत और आपसी भाईचारे के लिए यह बेहद गंभीर सवाल है।
यूसुफ पठान को विवादित जमीन 99 साल की लीज पर मिल जाती है।
क्योंकि उन्होंने TMC छोड़कर बीजेपी के साथ वफादारी की?
वहीं पर दिल्ली में PM आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद पर संकट मंडरा रहा है क्योंकि उसकी लीज का टाइम नहीं बढ़ाया जा रहा है।
दिल्ली की रेस कोर्स रोड पर स्थित लगभग 125–150 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को तोड़े जाने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि एक अधिकारी ने मस्जिद को एक सप्ताह के भीतर तोड़ने की धमकी दी है।
दावा है कि यह मस्जिद 1977 के दिल्ली गजट नोटिफिकेशन के सीरियल नंबर 18 में दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित दस्तावेज़ों की स्थिति स्पष्ट किए बिना मस्जिद को हटाने की कार्रवाई क्यों की जा रही है?
मस्जिद में नमाज़ बंद, बिजली काट दी गई मुसलमानों को मस्जिद के करीब नहीं जाने दिया जा रहा और वहां बैरिकेटिंग कर दी गई। #SaveRaceCourseMasjid
दिल्ली में मुसलमानों के 150 साल पूरे मस्जिद को टारगेट किया जा रहा है।
जब स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद के सभी वैध दस्तावेज़ उपलब्ध हैं।
तो फिर एक ऐतिहासिक इबादतगाह पर ऐसी कार्रवाई क्यों?
#SaveRaceCourseMasjid
असम: इलाके की इकलौती मस्जिद को शहीद कर दिया गया!
असम–नागालैंड बॉर्डर पर मेरापानी में 17 अक्टूबर को प्रशासन ने मेरापानी में 59 बंगाली भाषी परिवारों के घरों पर बुलडोज़र चला दिया है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बावजूद, इन मुस्लिम परिवारों को एक बार फिर बेदखली का सामना करना पड़ रहा है। इलाके की इकलौती मस्जिद भी गिरा दी गई है।
This is Delhi not Gaza.
Near Race Course Mosque, the homes of more than 700 people have been bulldozed.
@DelhiPolice is this true?
#SaveRaceCourseMasjid
Bu vahşeti sonuna kadar izlemeden geçme!
Dünya bu vahşeti üç maymunu oynayarak izliyor olabilir ama bu kan yerde kalmayacak. Gazze’de dökülen her damla masum kanının hesabı elbette bir gün sorulacak! #Gazze#GazzeninKapılarınıAç Filistin İçin İnsanlık
एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा, जब हमारी दौलत, हमारी चीज़ें, हमारा रुतबा और दुनिया में हासिल की गई हमारी कामयाबियाँ किसी काम नहीं आएँगी। हमारे घरवाले और दोस्त हमें क़ब्र में छोड़कर अपने-अपने घर लौट जाएँगे, लेकिन हम अपनी क़ब्र में रह जाएँगे। उस दिन का इंतज़ार करते हुए, जब हमें अल्लाह के सामने हाज़िर होना होगा और अपनी ज़िंदगी के आमाल का हिसाब देना होगा।
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: “जब इंसान का इंतिक़ाल हो जाता है, तो उसके आमाल का सिलसिला ख़त्म हो जाता है, सिवाय तीन चीज़ों के: सदक़ा-ए-जारीया, ऐसा इल्म जिससे फ़ायदा उठाया जाए, या नेक औलाद जो उसके लिए दुआ करे।”
[📚 हवाला: सहीह मुस्लिम, हदीस 1631]
ज़रा एक पल ठहरकर सोचिए!
जिन हाथों ने दौलत कमाने के लिए दिन-रात मेहनत की थी, एक दिन वे हाथ बेजान हो जाएँगे। जिन होंठों से हमने अनगिनत बातें की थीं, वे ख़ामोश हो जाएँगे। जिन आँखों से हमने इस दुनिया की ख़ूबसूरती देखी थी, वे हमेशा के लिए बंद हो जाएँगी।
लेकिन हमने अल्लाह की ख़ुशी के लिए जो नेक आमाल किए होंगे, मुमकिन है कि हमारी मौत के बाद भी वे हमारे लिए फ़ायदे का ज़रिया बनते रहें।
इसलिए, उस दिन के आने से पहले अल्लाह की तरफ़ सच्चे दिल से लौट आइए।
सच्ची तौबा कीजिए, अपनी नमाज़ों की हिफ़ाज़त कीजिए, अपने गुनाहों की माफ़ी माँगिए, सदक़ा दीजिए, लोगों के हुक़ूक़ अदा कीजिए, दूसरों से अच्छे अख़लाक़ के साथ पेश आइए और ऐसे नेक आमाल करके जाइए, जिनका सवाब आपको उस वक़्त भी मिलता रहे, जब आप ख़ुद कोई अमल करने के क़ाबिल नहीं रहेंगे।
क़ब्र में जाने के बाद वक़्त की क़ीमत समझने का इंतज़ार मत कीजिए। इस फ़ानी दुनिया की चमक-दमक को अपने ऊपर इतना हावी मत होने दीजिए कि आप हमेशा बाक़ी रहने वाली आख़िरत को भूल जाएँ।
हममें से किसी को नहीं मालूम कि हमारी कौन-सी नमाज़ आख़िरी नमाज़ होगी, हमारी कौन-सी साँस आख़िरी साँस होगी और कब हमारे अपने जनाज़े का ऐलान कर दिया जाएगा।
इसलिए आज ही संभल जाइए, क्योंकि ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं और मौत का कोई वक़्त मुक़र्रर करके नहीं आता।
🤲 ऐ अल्लाह!
हमारे तमाम गुनाहों को माफ़ फ़रमा दे। हमें ईमान पर ख़ातिमा नसीब फ़रमा। हमें क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा। हमारी क़ब्रों को नूर से भर दे और क़यामत के दिन हमारे नेक आमाल को हमारे लिए रहमत का ज़रिया बना दे।
ऐ अल्लाह! हमें जन्नत के सबसे बुलंद दर्जे में जगह अता फ़रमा और हमारे उन प्यारे लोगों से दोबारा मिला दे, जिनसे हम मोहब्बत करते हैं, जहाँ न कोई जुदाई होगी, न कोई ग़म होगा और न ही मौत होगी।
आमीन या रब्बल आलमीन! 🤲