So @prakashraaj's name appears on the ASDDO list which was recently released for Karnataka, Which means, His name is removed from the voter list in Bangalore Central. It shows 'Permanently Shifted'.
क्या यह सही है?
यशवंत सहदेव शिंदे ने 25 साल तक संघ के लिए काम किया। उनका कहना है कि जब उन्हें बम बनाने और उसकी ट्रेनिंग देने वाली टीम में शामिल होने के लिए कहा गया, तो उन्होंने संघ छोड़ दिया। 2022 में उन्होंने नांदेड़ की CBI कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने 2003 में VHP नेता मिलिंद परांडे की देखरेख में कथित तौर पर लगाए गए बम बनाने के कैंप, इंद्रेश कुमार से जुड़े हथियारों की ट्रेनिंग और BJP को चुनावी फायदा पहुंचाने और समाज में ध्रुवीकरण करने के मकसद से किए जाने वाले धमाकों की सुनियोजित योजना के बारे में विस्तार से बताया।
जब पूरा दिन शांति से निकल गया था तो रात के अँधेरे में ये लाठीचार्ज क्यों किया ? @JharkhandPolice कई छात्रों को चोटें आई हैं @HemantSorenJMM कुछ छात्र आपके लिए केक काट रहे थे और बदले में आपने ये किया ?
जब सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी जाँच-सुनवाई के होने वाले ग़ैर-संवैधानिक 'बुलडोजर जस्टिस' पर रोक लगा दी थी तो इस चमन चोपड़ा ने बिलबिलाते हुए तुरंत अपने स्टूडियो में बैठे-बैठे सर्वे करके 'बुलडोजर जस्टिस' को बहुमत दिलवा दिया था...बुलडोजर राज का झोंपड़ा @AmanChopra_
अडानी को दोहरी खुशी मिली है।
पहली तो अमेरिका में अपने पापों को धोने की डील कामयाब रही।
दूसरे, महाराष्ट्र की मोडानी सरकार ने संरक्षित वन की तिरासी हज़ार वर्ग किलोमीटर ज़मीन उनको सौंप दी।
ग़ज़ब चल रहा है देश में भाजपा वाले राहुल गांधी शर्म करो बोल रहे है तो आगे से पवन खेड़ा एंड टीम ये सब बोल रही है देश का मीडिया मस्त मज़े लूट रहा है कंटेंट ही कंटेंट है . वैसे एक बात तो है कुछ समय पहले पीएम मोदी कहते थे कौन राहुल अब पूरी पार्टी सारा दिन राहुल गांधी का नाम लेती है ..
झारखंड का आंदोलन बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। बीजेपी के लोग उसे हिंसक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि दिल्ली जैसा कुछ हो जाए तो वे अपनी कटी हुई नाक को बचा पाएंगे।
शायद इसीलिए गृहमंत्री और प्रधानमंत्री बीस दिन तक संसद में नहीं दिखे। अब झारखंड की तरफ चर्चा को मोड़ा जा सकता है। कहा जा सकता है कि जहाँ विपक्ष की सरकार है, कांग्रेस सत्ता में हिस्सेदार है, वहाँ भी ताक़त का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
और नड्ढा तो कल कह ही चुके हैं कि जंतर मंतर पर कोई गोली-वोली नहीं चली। हालाँकि नई रिपोर्ट बताती है कि पेलेट गन से छह नहीं कम से कम दस लोग घायल हुए हैं।
20 जुलाई के संसद मार्च में कम से कम 10 प्रदर्शनकारी पैलेट से घायल हुए. इनमें 9 घायलों को दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक घायल का इलाज सफदरजंग अस्पताल में हुआ.
और ये तो सिर्फ दो अस्पतालों से सामने आई जानकारी है, नंबर इससे कहीं बड़ा हो सकता है.
कुछ घायलों से मैं खुद मिला हूं. मैंने देखा है कि वे कितनी तकलीफ में थे.
आख़िर ये संघी-भाजपाई इतनी बेशर्मी कर कैसे लेते हैं?
विपक्ष संसद में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जवाब माँग रहा है। अगर सरकार ने कुछ ग़लत नहीं किया, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सवालों से डर नहीं रहे हैं, तो सदन में आएँ और देश की जनता को जवाब दें।
लेकिन ग़ज़ब देखिए - जिनसे जवाब माँगा जा रहा है, वही उल्टा विपक्ष के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं!
सत्ता भी आपकी, पुलिस भी आपकी, गृह मंत्रालय भी आपका और जवाब माँगने पर प्रदर्शन भी आप ही करेंगे?
जो ख़ुद को लौह-पुरुष कहलाते थे, आज सदन का सामना करने से भी डर रहे हैं।
क्या ख़ाक लौह-पुरुष हैं?
इनसे कहिए, लौह-पुरुष सरदार पटेल थे, और वह कांग्रेस से थे।
यह चले थे सरदार पटेल से अपनी तुलना करने!
बड़ी अंतरराष्ट्रीय ख़बर
ईरान के हमले की डर से ट्रंप ने बदला था प्लेन
पिछले महीने NATO समिट के आखिर में एयर फ़ोर्स वन के तुर्की से उड़ान भरने से कुछ देर पहले, प्रेसिडेंट ट्रंप चुपके से प्रेसिडेंशियल जेट से उतर गए और उन्हें एयरपोर्ट केटरिंग ट्रक की मदद से दूसरे प्लेन में ले जाया गया, ऐसा इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक U.S. अधिकारी ने बताया।
यह चाल इसलिए चली गई क्योंकि U.S. को ईरान और उसके सहयोगी प्रॉक्सी से खतरे का पता चला था। CBS न्यूज़ ने खास तौर पर बताया कि U.S. इंटेलिजेंस ने एक पक्की साज़िश का पता लगाया था कि मिस्टर ट्रंप जिस प्लेन में थे, उस पर मिसाइल दागी जाएगी, जब वे तुर्की की राजधानी अंकारा से निकल रहे थे।
प्रेसिडेंट ने U.S.-ईरान युद्ध से होने वाले खतरों के बारे में अपनी जानकारी ज़ाहिर की थी, और NATO समिट के दौरान खुद को ईरान का "नंबर वन टारगेट" बताया था।
वॉशिंगटन पोस्ट ने सबसे पहले इस सीक्रेट प्लेन-स्विचिंग की रिपोर्ट दी थी।
Courtesy @CBS