#हरियाणा के कर्मचारी साथियों ने जी खोल कर #voteForOPS चलाया। जिसने, उन्हें
विपक्षी पार्टी प्रेरित/समर्थित आंदोलन घोषित कर दिया। आज उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि अब #OPS की डिमांड किससे करें? यही हाल 03दिसम्बर2023 को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के दौरान हुआ था। लोकसभा 2019 और 2024 में क्या हुआ, सब जानते हैं। कर्मचारियों की डिमांड और लड़ाई दोनों सरकार से है न कि किसी पार्टी से। कर्मचारियों की लड़ाई को राजनीतिक बनाकर कुछ लोगों का फायदा तो हो सकता है पर कर्मचारियों का अब तक नुकसान ही हुआ है। #17नवंबर_दिल्लीचलो का अभियान सरकार से अपनी दो मांगों के लिए है: पहला, कर्मचारी अंशदान पर #GPF की मान्यता और दूसरी 20 वर्ष की सेवा पर ही अंतिम सेलरी का 50% DA के साथ पेंशन की सुविधा। उसके बाद सरकार जो चाहे नाम रख ले हमें फर्क नहीं पड़ता। #ManjeetSinghPatel
मैं भी इस देश का मतदाता हूं लेकिन कुछेक पार्टियों को छोड़कर मेरा मुद्दा #पुरानी_पेंशन राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र से नदारद है।
मेरे जैसे लाखों कर्मचारी और उनका परिवार यह चाहते हैं कि उनका मुद्दा आपके घोषणापत्र में रहे
#OPSisOurRight#NoPensionNoVote#OPS@INCIndia@ajitanjum