एथेनॉल की अपार सफलता के बाद,
आ गया है UPI.
पहले कार वाले बता रहे थे. सब बढ़िया है.
अब फिनटेक वाले बता रहे हैं. सब बढ़िया है.
हिस्ट्री बन रही है दोस्तों...बधाई...
ये जो नोट छपाई का पैसा बच रहा है, उसका क्या करेंगे? किराना लेना है, तो अपना ही पैसा खर्च करने पर टैक्स दो. कुछ बचत मार्केट में लगानी है, अपना ही पैसा खर्च करने पर टैक्स दो. ये कौन चित्रकार है भाई? जितने ट्रिलियन का मामला हो गया है, उसमें से निकालो न थोड़ा सा पैसा यूपीआई के लिए!
First of all, the reason I said Jinnah's points should be ignored is that, from exam perspective they are not important.
And secondly, how can you even compare Jinnah with Gandhi? One gave the call for Direct Action Day, which led to large-scale communal riots and killings, while the other withdrew his movement because of violence.
And as far as Gandhi is concerned, we don't need your certificate of recognition. The whole world recognises his contribution and his efforts towards non-violence.
आज झारखंड, रांची आया। इतने छात्रों का दर्द सुना।
मैं कहूँगा कि आज exam system इतना खोखला हो चुका है कि भर्तियों का इतना बुरा हाल है।
पहले भर्ती आए- इसके लिए लड़ो।
फिर exam के लिए सालों इंतज़ार करते रहो।
5 साल में एक मौका मिल भी गया तो paper leak हो जाएगा, या setting और cheating का खेल शुरू हो जाएगा।
इन सब से भी ऊपर निकलकर आप 300 में 299 भी ले आए, तो भी result में नाम आएगा इसकी कोई गारंटी नहीं।
आख़िर हर कदम पर इस देश के छात्रों के साथ क्यों छल किया जा रहा है?
और जो छात्र 100-200 रुपये की form fees जैसे-तैसे जमा करता है, वो बार-बार आंदोलन कैसे करे?
क्या करे?
असहाय महसूस करता है। जैसे-तैसे लड़ने की हिम्मत जुटाता है, सालों के अत्याचार के बाद…
कोई भी सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को ठीक नहीं कर रही। इसकी एक बड़ी वजह मुझे यह लगती है कि सरकारों की प्राथमिकताएँ में ये है नहीं और उनके funds का बड़ा हिस्सा freebies में indirectly वोट ख़रीदने में जा रहा है
जनता जिस विचारधारा के ख़िलाफ़ वोट देती है, कल को वही नेता पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चला जाता है। हर मोड़ पे बिस्वासघात ।
आज देश के सभी शिक्षकों को छात्रों के हितों के लिए आगे आना होगा। इनकी लड़ाई का हिस्सा बनना होगा।
तभी सबके पढ़ाने की सार्थकता है।
वरना आप भी सरकार की तरह ही है जिसका ध्यान बस पैसे आने से है,बस पढ़ाओ। Selection हो या न हो, उससे क्या मतलब?
जितनी भर्ती cancel होगी, जितनी delay होगी, उतना ज़्यादा coaching का पैसा आएगा।
इसलिए मैं सभी शिक्षकों से हाथ जोड़कर आग्रह करता हूँ 🙏🏻
please छात्रों के साथ हो रहे इस अन्याय में, जैसे भी संभव हो, वीडियो बनाकर उनकी आवाज़ उठायें या यहाँ की व्यवस्था के लिए आर्थिक मदद दे।
अगर शिक्षा से जुड़े लोग भी छात्रों के साथ खड़े नहीं होंगे, तो फिर उनके साथ खड़ा कौन होगा?
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
> Chat GPT से पोस्टर बनाया
> Blinkit पर प्रिंट आउट का ऑर्डर किया
> 10 मिनट में जंतर मंतर पर डिलीवरी
जंतर मंतर पर मीम्स वाले पोस्टर कहां से आ रहे हैं, देखिए।
भारत में Gen–Z का यह पहला प्रोटेस्ट है !!
याद रखिएगा,
जब हज़ारो स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट पर थे। लाठी खा रहे थे। बेहतर एजुकेशन सिस्टम के पेरेंट्स भी सपोर्ट देने आ रहे थे।
तब अर्नब गोस्वामी,सुधीर चौधरी जैसों के नेतृत्व में टीवी मीडिया का एक वर्ग इन्हें चीन/अमेरिका का एजेंट बता जार अपने ही नागरिकों का अपमान कर रहा था। उन्हें डिसक्रेडिट करने की कोशिश कर रहा था!
Delhi Police halting autorickshaws
to stop people (who appear like students/young) from going to the protest site at Jantar Mantar. This is near Nizamuddin. 17 metro stations leading to the protest site are already shut. @ikasnik reports