*💕 मैं उन दिव्य युगल श्री गौर श्याम [राधा कृष्ण] को प्रणाम करता हूँ जो केवल कृपा साध्य हैं, कोटि-कोटि कंदर्पों से भी सुन्दर हैं एवं जिनकी कोटि-कोटि सखियाँ सेवा में उपस्थित हैं।💕*
खालिस्तानी आतंकवादी ने आज दावा किया कि उसने कॉकरोच जनता पार्टी के लोगों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की है और उन्हें बता दिया है कि भारत में, दिल्ली में तख्ता पलट तक आंदोलन रुकना नहीं चाहिए।
किसान आंदोलन के समय भी इसने प्रदर्शन को लेकर ऐसे ही दावे किए थे। तब मैने #DoTook में बार बार कहा था कि किसान नेताओं को कहना चाहिए कि यह खालिस्तानी झूठ बोल रहा है और हमारे आंदोलन से इसका कोई संबंध नहीं। लेकिन किसी नेता ने इसका खंडन नहीं किया।
आज कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से अनुरोध है कि इस भारत विरोधी आतंकवादी को मुंहतोड़ जवाब दें और कह दें कि यह झूठ बोल रहा है और उससे हमारा कोई संबंध नहीं।
रवीश शुक्ला एक शानदार पत्रकार हैं, फ़िलहाल एनडीटीवी में है. मेरे तमाम मित्र इस वक्त गोदी कहे जाने वाले चैनलों में काम कर रहे हैं. आज रवीश से जंतर मंतर पर मिला. तक़रीबन दो सौ नवयुवक उनको और उनके चैनल को घेरकर हूट कर रहे थे. दरअसल वो जानते नहीं कि रवीश ने अपने जर्नलिज्म से देश और समाज को क्या दिया है.
दरअसल यह समाज जानने की कोशिश नहीं करता कि उसके इर्द गिर्द कौन ऐसा है जो अपने नाम की पहचान की परवाह किए बिना बस खबरों के लिए जिया है. टीवी ने पत्रकारों को चेहरे से पहचानने की आजादी दी है लेकिन जर्नलिज्म को आप इतनी आसानी से नहीं जान सकते.
बेरोजगारी का दर्द मैंने झेला है अब तक झेल रहा हूँ . कोई भी आकर कुछ भी कह जाता है. इस सरकार ने, दलाली ने, कोविड ने पत्रकारों से बहुत कुछ छीना है. हर कोई अंजना, रुबिका सुधीर नहीं होता ना रवीश, अजीत और विनोद होता है. पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो खामोशी से बस जीविकोपार्जन कर रहा है. वह बहुतों से बेहतर है लेकिन उसके लिए उसके अपनों की उदासी का भी मतलब है. रवीश जैसों से प्यार करिए अगर ख़बरों से प्यार करते हैं तो
जर्नलिज्म में तो जो नौकरी देगा वो यह सोचकर रखता है कि अपमान भी करेगा.
जहर का कारोबार, ये है रवीश कुमार
नौकरी जाने की आशंका के साथ ही इस व्यक्ति ने गोदी मीडिया का राग अलापना शुरू कर दिया था। इसका पूरा जीवन गोदी में ही बीता है और इसे लगा कि, गोदी में बैठकर लोग ताक़तवर हो जाते हैं। यह व्यक्ति समाज में सडांध पैदा कर रहा है। इसके न रहने पर एनडीटीवी बंद हो जाए, इसकी यह मंशा पूर्ण न हो सकी। यह पत्रकारिता पर धब्बे जैसा है। आज इसे पत्रकारों पर हुए हमले पर बोलना था, लेकिन यह उलटबाँसी कर रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, भारत को कमजोर करने के एवज में इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बुलाया गया। इससे देश में एक बड़ा वर्ग इसके जहर का शिकार हो रहा है।
अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान में जेहादियों के डर से मुंह छुपा कर सलवार पहन कर भागने वाले, यहां भारत में तलवारें दिखा रहे हैं। क्योंकि भारत में "तानाशाही" है।
ये व्यक्ति पत्रकारों के खिलाफ भीड़ को “लिचिंग” के लिये भड़का रहा है.
एक पॉलिटिकल पार्टी की राजनीतिक यात्रा में हिस्सा लेकर अपनी पत्रकारिता बेच देने वाला शख़्स पत्रकारिता सिखाने में लगा हुआ है.
यह भीड़ छात्रों के हितों के लिए लड़ने वाला हो ही नहीं सकती। यह बर्बर, उन्मादी, ज़हरीली भीड़ है जिसे @ravish_journo जैसे सत्ता की गोदी से बाहर किए गए लोगों ने तैयार किया है। थू है ऐसे नीच लोगों पर। उम्मीद करें कि, @DelhiPolice ने ऐसे लोगों को चिन्हित किया होगा।
ये किसके गुंडे है जो एक महिला पत्रकार के साथ खुलेआम अभद्रता कर रहे है, यह @dimpleyadav के गुंडे है ? या @SanjayAzadSln के गुंडे है..?
महिला पत्रकार के साथ खुलेआम छेड़छाड़ ऑन कैमरा हो रही है तो समझ सकते हो कि किस लोकतंत्र के बचाव की बात हो रही है और इसे कौन सा लोकतंत्र या जनतंत्र समर्थन करता है...?
आंदोलन तब तक ही जनांदोलन रहता है, जब तक वह सहमति - असहमति और स्वतंत्र पत्रकारिता का सम्मान करता है।
तुमसे बड़ा लोकतंत्र का हत्यारा कौन होगा? तुम्हारे बोए जहर से तैयार हुई भीड़ ने तुम्हारे साथ काम किए संवाददाताओं को भी नहीं बख्शा। नाम इसलिए नहीं लिख रहा कि, उसकी पीड़ा बताना है, उसे पीड़ित नहीं दिखाना। असली गोदी मीडिया तुम्हारे जैसे लोग हैं जो सारी जिंदगी गोदी में ही बैठे रहे और गोदी से उतार दिए जाने पर रोने लगे। जरा सा भी शर्म आ रही हो तो अलग-अलग चैनलों के उन रिपोर्टरों से बात करो जिनके साथ भीड़ ने गंदा व्यवहार किया है। शर्म आए तो उनसे माफी मांगो और खुद को पत्रकार कहना बंद कर दो।
उम्र मात्र 13 साल , लेकिन निर्भीकता की कोई उम्र नहीं होती ।
यह बच्चा अधिकारियों को बोल रहा कि "आप लोगों का क्या , कमीशन थोड़ी दे दो, बस "
और ये सारे अधिकारी हँस रहे हैं। उसके बाद डीएम साहब प्यार से धमकाने की कोशिश करते हैं कि बहुत ज्यादा नहीं बोलना चाहिए ।
क्योंकि अब बुरा लगने लगा है।
लेकिन किसी भी अफसर को इस बात पर शर्म की अनुभूति नहीं हो रही है कि बच्चे बच्चे को उनकी कमीशन खोरी के बारे में पता है।
वही सरकार में बैठे जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्री महोदय को इस कमीशनखोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं है ।
इसी सोच के लड़के प्रशासन द्वारा उपेक्षित होने पर बगावत करते हैं।
खैर , बच्चे को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं ।
और अधिकारियों का क्या है , जैसे चल रहा है उसी तरह चलता रहेगा ।
खाकी वर्दी के पीछे जो महिला है वो तनख्वाह न मिलने के दर्द में है । एमजीएम अस्पताल में एक महिला होमगार्ड का फफक-फफक कर रोना व्यवस्था की असंवेदनशीलता को उजागर करता है। पांच महीने से वेतन का इंतजार, ऊपर से गंभीर बीमारी का बोझ—यह कैसी परीक्षा है? क्या उसकी मेहनत का मोल केवल खामोशी और बेबसी है?" आर्थिक तंगी से टूटी महिला जवान की आंखों में आंसू नहीं, सिस्टम से सवाल हैं। उसे सहानुभूति नहीं, उसका हक़ चाहिए। @HemantSorenJMM सर कब खत्म होगी एक नारी के सम्मान की यह जंग?"
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पत्नी कौन से संवैधानिक पद पर हैं?
किस नियम से उन्हें प्रोटोकॉल मिल रहा है?
क्यों उनके साथ इतनी गाड़ियों का काफिला चल रहा है? SP उनके काफिले में चल रहे हैं?
इतने सारे पुलिसकर्मी साथ चल रहे हैं?
क्यों राज्य के खर्चे पर उन्हें इतने पुलिसकर्मियों की इस श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है?
सम्राट चौधरी की पत्नी किस अधिकार से शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण कर रही हैं?
पूरे राज्य के गवर्नेंस और अपने कार्यभार को सम्राट चौधरी ने अपने परिजनों को आउटसोर्स कर दिया है?
घर वालों का अलग से किचन कैबिनेट चल रहा है?
सम्राट चौधरी के पूरे खानदान को प्रोटोकॉल चाहिए?
विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा को घटाकर सम्राट चौधरी ने सारी सुरक्षा अपनी धर्मपत्नी और परिवार वालों के सुपुर्द कर दी है?
बिहार की नतमस्तक मीडिया को भी देखिए! मुँह ही नहीं खुल रहा!
@yadavtejashwi #RJD #Bihar
एक भारतीय महिला ने ऑस्ट्रेलिया में अपने घर पर ऑस्ट्रेलिया की एक मशहूर मॉडल को खाने पर बुलाया। उसे लगा था कि शायद कोई विदेशी डिश मिलेगी, लेकिन थाली में परोसा गया असली बिहारी स्वाद — दाल, भात और आलू भुजिया। 😍
🥹 पहला निवाला खाते ही मॉडल इस स्वाद की ऐसी दीवानी हुई कि बार-बार यही कहने लगी — "This is amazing!" ❤️