मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।
India’s goods trade surplus with the USA in 2025-26 was $34.4 billion as compared to $40.1 billion in 2024-25.
India’s goods trade deficit with China in 2025-26 was $112.2 billion as compared to $99.2 billion in 2024-25.
Modinomics = Appeasement of USA + Capitulation to China
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने के हादसे में कई लोगों की मृत्यु और कई अन्य के घायल होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
सभी शोकाकुल परिवारों को अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं।
Wishing the Chief Minister of Tamil Nadu, Thiru Joseph Vijay, a very happy birthday.
I wish you good health and success in all your efforts. I stand with you in defending the rights, dignity, and aspirations of the Tamil people, and in working together for the state’s progress.
शुक्रवार, 19 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को भारत के संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया।
संविधान सभा ने सरदार पटेल की अध्यक्षता में मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों तथा जनजातीय एवं अपवर्जित क्षेत्रों (Excluded Areas) पर एक सलाहकार समिति का गठन किया था। 21-22 अप्रैल, 1947 को हुई इसकी बैठक में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने के प्रश्न पर जीवंत चर्चा हुई। डॉ. आंबेडकर और जगजीवन राम ने इसके पक्ष में जोरदार तर्क दिए। वहीं, सरदार पटेल, सी. राजगोपालाचारी और कुछ अन्य सदस्यों का मत था कि यदि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बना दिया गया, तो रियासतें भारतीय संघ में शामिल होने को लेकर अनिच्छुक हो सकती हैं। उनका मानना था कि संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान कर देना ही पर्याप्त होगा।स्वयं सरदार पटेल का मत था कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार अपने आप में एक निहित मौलिक अधिकार है। यही अनुच्छेद 326 की पृष्ठभूमि है, जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव कराने का प्रावधान करता है।
पिछले सात दशकों में इस बात पर लगातार बहस होती रही है कि मतदान का अधिकार, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा प्रदत्त एक वैधानिक अधिकार है या फिर यह एक स्पष्ट मौलिक अधिकार है। इस संबंध में अलग-अलग मत व्यक्त किए गए हैं। हाल ही में, मार्च 2023 में दिए गए अनुप बरनवाल बनाम भारत संघ के फैसले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ने अपने असहमति वाले मत में कहा था कि मतदान का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट स्वयं यह मान्यता दे चुका है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास, उनके वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे के स्रोतों के बारे में जानने का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। उसने मतपत्र की गोपनीयता की रक्षा की है और NOTA के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के अधिकार को भी मान्यता दी है। इसलिए, यह और भी अधिक विसंगतिपूर्ण है कि मतदान का अधिकार अब भी केवल एक वैधानिक अधिकार बना हुआ है।
प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर काम कर रहे भारत निर्वाचन आयोग की खुली पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। ऐसे में अब समय आ गया है कि मतदान के अधिकार को एक मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए, जिससे उसे सर्वोच्च स्तर की न्यायिक समीक्षा और संरक्षण प्राप्त हो सके।यह SIR प्रक्रिया के तहत विभिन्न राज्यों में खगोलीय संख्या में हुए मतदाता दमन या मतदाताओं को मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम होगा। इसका मतलब यह भी होगा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और ज्यादा होगी।
Re-NEET देने वाले सभी छात्रों को मेरी अनेक शुभकामनाएँ।
पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दीजिए। कुछ भी हो, मैं हमेशा आपके साथ हूं और आपकी रक्षा करता रहूंगा।
सरकार से अपेक्षा है कि इस बार NEET बिना किसी गड़बड़ी के होगी। छात्र पहले ही बहुत तनाव झेल चुके हैं - अब किसी बच्चे की उम्मीद न टूटने पाए।
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
अखिलेश जी, आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद।
संविधान, सामाजिक न्याय और PDA के हक़ की रक्षा का हमारा ‘एक लक्ष्य’ पूरी मजबूती से जारी रहेगा, और उत्तर प्रदेश के हर नागरिक तक इसका लाभ पहुँचे - यही हमारा प्रयास रहेगा।
Thank you, Kharge ji, our Congress President, our leaders, and my dear Babbar Sher karyakartas, for the warm birthday wishes.
Your love and your commitment to the ideals of the Congress is my source of strength.
And to my brothers and sisters across the country: thank you for your affection. It means more to me than I can say.
It is our collective resolve to keep raising the voice of every Indian, to fight injustice, and to keep working for the unity and progress of the country we love.
कोटा, आप कमाल थे।
यकीन मानिए, कल हमने मिलकर इतिहास की शुरुआत की।
हज़ारों छात्र मैदान में थे, लाखों लोगों ने ऑनलाइन देखा - और देश को पहली बार खुलकर पता चला कि शिक्षा के नाम पर कितनी बड़ी वसूली चल रही है।
लेकिन यह तो सिर्फ़ शुरुआत है। कोटा में जो लौ जली है, उसे अब पूरे देश में बदलाव की मशाल बनाना है। और इस सफ़र में आपकी जगह तय है।
अपने सुझाव भेजिए। Petition पर अभी Sign कीजिए।
#ChhatronKiGoonj
If you've suffered because of paper leaks, exam issues, or high fees
If this education system has shattered your dreams
If your family has invested a lifetime of savings in your education
Then “Chhatron Ki Goonj” is your voice.
This isn't just a campaign - it's a platform to take your demands directly to the government.
Affordable education. Fair examinations. Dignified employment.
Join the movement:
1️⃣ Click the link below.
2️⃣ Fill in your name and share your ideas.
3️⃣ Sign the petition - that's it.
Your signature will strengthen this movement. More the signatures, louder the goonj!
👉 Sign the petition now: https://t.co/g6mbw7X5XC
#ChhatronKiGoonj
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj