भूतकाल का शोक और भविष्य की चिंता, दो ऐसे चोर है�� जो ख़ुशियाँ और चैन को छिन लेते हैं ।
अतः ईश्वर में दृढ़ विश्वास के साथ वर्तमान में जीना भक्त का लक्षण है।
-#सप्रेम_हरिस्मरण
अकृत्यं नैव कर्तव्यं प्राणत्यागेऽपि संस्थिते।
न च कृत्यं परित्याज्यं एष धर्म: सनातन:॥
- सुभाषित
( न करने योग्य कार्य को प्राण जाने की परिस्थिति में भी नहीं करना चाहिए और कर्त्तव्य का कभी त्याग नहीं करना चाहिए, यह सनातन धर्म है।)
करुणा और कृपणता कैसे एक साथ रह सकते हैं !
क्रोध और शांति का सहअस्तित्व संभव है ?!
द्वेष और प्रेम दोनों ढाई अक्षर के शब्द, लेकिन फ़ासला बहुत बड़ा है ।
-#सप्रेम_हरिस्मरण
आज उमरेठ (नडिआद) के संतराम मंदिर के महंत, श्री संतराम महाराज की अखंड ज्योति में लीन,सरल और कर्मठ संत गणेशदास जी महाराज की गुणानुवाद और षोडशी भंडारा में उपस्थित हो कर संतों के साथ श्रद्धांजलि समर्पित करी। इस स्थान में ४/५ बार कथा सेवा हुई है। गत दिसम्बर में भी भागवत कथा सेवा हुई ।
चित्त चित्रकूट है और रामकथा मंदाकिनी । कथा रुपी मंदाकिनी चित्त में प्रवाहित होती रहेगी और प्रभु के प्रति स्नेह रुपी वन में श्री सीताराम जी विहार करते रहेंगे ।
- #सप्रेम_हरिस्मरण
कल दारेसलाम-टांझानिया पूर्व अफ्रिका में नवीनीकृ��� सनातन मंदिर के विभिन्न प्रकल्पों का उद्घाटन किया । महादेव जी का अभिषेक पूजन एवम् बाल सं��्कार केन्द्र की प्रवृत्ति का निरीक्षण किया। यहाँ पिछले तीन वर्षों से सांदीपनि के ३ ऋत्विजों के द्वारा पूजन अर्चन और धार्मिक मार्गदर्शन हो रहा है। सत्संग बालसंस्कार सभी प्रवृत्तियों में वृद्धि हुई है। जनता की उपस्थिति बढ़ी है। उसका आनंद है।
प्रवचन हाल का भी नवीनीकरण हुआ । बडी संख्या में भक्तों ने सत्संग लाभ प्राप्त किया। यहाँ कई वर्षों से रहे हुए और हाल में भारत से आये हुए लोगों में ��क भारत जी रहा है। सनातन धर्म के प्रति श्रद्धा और भारत के प्रति स्नेह और उनका योगदान सराहनीय है।
सन् १९८४ से पूर्व अफ़्रीकी देशों की यात्रा पर आता रहा हूँ । बहुत बदलाव और विकास हुआ है। लेकिन यहाँ की नयी पीढ़ी के बच्चे भी सनातन धर्म के प्रति जागृत हैं और इस विरासत को आगे ले जाने के लिए तयार हो रहे हैं, यह भविष्य के लिए आश्वस्त करने वाली बात है।
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हार प्रिय दास।
तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास॥
- श्रीमद् रामचरितमानस
(हनुमान्जी ने कहा- हे प्रभो ! सुनिए, चंद्रमा आपका प्रिय दास है। आपकी सुंदर श्याम मूर्ति चंद्रमा के हृदय में बसती है, वही श्यामता की झलक चंद्रमा में है।)
नियम के खेत में फसल प्रेम की है पकती ।
नियम जो सद्गुरु से मिला…
मंत्र बीज निरंतर बोया..
साधना में जो सावधानी,
यही खेत की है रखवाली ..
प्रभु कृपा सूरज की धूप…
नामनिष्ठा पानी दे खूब..
काटो फसल को प्रेम से, बाँटो सबको धाई
बाँटने से बढ़ती रहे, समजो मेरे भाई ।
‘कथा’ वही है जिसमें केशवका कीर्तन हो!
‘कर्म’ वही है जो श्रीकृष्णकी प्रसन्नता के लिए किया जाए!
कथा के द्वारा कर्मको कर्मयोग बनानेकी युक्ति सीखें! @ppbhaishri के सुविचार का स्रोत,
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#TattvaDarshan
विचारों की शुद्धता, सात्विकता और सकारात्मकता बहुत हद तक अपने आसपास के परिवेश, संग और अपने खानपान पर आधारित होती हैं । अतः साधक को इसका ध्यान रखते हुए साधन भी सात्विक अपनाने चाहिये।
- #सप्रेम_हरिस्मरण