@ShivamMish78313@Parinda_2 जैसे चूतिये BJ पार्टी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाने का काम करते है। Cong का ऐसे भस्मासुरों से दूरी बना लेना ही बेहतर होगा।
@Neta_Bhushan असल में कथित आरक्षण विरोधी तत्व कट्टर ओबीसी डंकापति (हिसाब चुकता करने वाले) के ही वफादार मतदाता है, सरकार से निवेदन है इनके दबाकर लट्ठ बजाए क्योंकि यह मतदाता वर्ग लट्ठ खाकर भी वफादारी निभाता है।
जब मैंने रेंबल (जिसने अब अपना नाम बदल कर वेनाड फ़ूड इंडस्ट्रीज़ कर लिया है) के वित्तीय दस्तावेज़ खंगाले, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. रेंबल का सीधा जुड़ाव सियान एग्रो इंडस्ट्रीज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर से था, जो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के व्यावसायिक साम्राज्य की प्रमुख कंपनी है. गडकरी, जिन्हें बीजेपी में आरएसएस का बेहद क़रीबी माना जाता है, नागपुर से सांसद हैं. सियान एग्रो के मैनेजिंग डायरेक्टर उनके बेटे निखिल गडकरी हैं.
रेंबल के अधिकांश शेयरधारक और निदेशक गडकरी परिवार की कंपनियों से जुड़े हैं. इतना ही नहीं, बीफ़ के व्यापार से जुड़े कई पुराने शेयरधारकों ने सियान एग्रो में निवेश किया है. जिस सहकारी बैंक से रेंबल को बड़ा कर्ज़ मिला है, उसकी अध्यक्षा मंत्री गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं. रेंबल के प्रबंध निदेशक महेश कुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले ‘सियान कैपिटल’ के निदेशक थे, जिसका पंजीकृत पता वही है जो सियान एग्रो का है. किसी नई कंपनी को करोड़ों की व्यापारिक उधारी (ट्रेड पे एबल्स) की सुविधा मिलना व्यापारिक जगत में असाधारण है.
यह संबंध केवल वित्त तक सीमित नहीं था. रेंबल और मिथर (मार्केटिंग फर्म) के कामकाज की शैली पूरी तरह सियान एग्रो जैसी थी. मिथर की वेबसाइट पर गडकरी की अन्य कंपनियों के विवरण थे और उनके ब्रोशर पर सियान एग्रो का लोगो प्रमुखता से अंकित था. गूगल मैप्स पर 'रेंबल एग्रो' की तस्वीर में भी ‘सियान’ का लोगो स्पष्ट दिखता है.
यही अस्पष्टता उनके उत्पादों के साथ भी है. उनके कुछ विज्ञापनों में इसे भैंस का मांस (बफ़ या कैरबीफ़) बताया जाता है, जबकि मिथर की वेबसाइट पर कई उत्पादों पर 'बीफ़' (जो आमतौर पर गाय या बैल के लिए प्रयुक्त होता है) अंकित है. गडकरी के 27 कंपनियों के साम्राज्य की पड़ताल में यह विरोधाभास बार-बार उभरकर सामने आया.
गडकरी के व्यापारिक साम्राज्य से जुड़ी बीफ कंपनी पर कौशल श्रॉफ की पूरी रिपोर्ट: https://t.co/p60QAfoDIl
@Neta_Bhushan वो बात अलग है कि बाद में इनके पुत्र/पुत्री लिब्रांडु से संघी में भी कन्वर्ट हो जाते है, लेकिन केवल राजनीतिक रूप से, वरना निजी जीवन में तो यह सभी लिब्रांडुओ से भी बहुत बड़े पतित होते है। 😂
@Neta_Bhushan असल में कथित आरक्षण विरोधी तत्व कट्टर ओबीसी डंकापति (हिसाब चुकता करने वाले) के ही वफादार मतदाता है, सरकार से निवेदन है इनके दबाकर लट्ठ बजाए क्योंकि यह मतदाता वर्ग लट्ठ खाकर भी वफादारी निभाता है।
चर्चा हो रही थी पर बहुजन मीणा ने बहुजन बैरवा/मेघवाल को, बहुजन जाटव ने बहुजन वाल्मिकी को और बहुजन कोइरी ने बहुजन जाटव को शूद्र बोलकर उनके साथ चर्चा करने से मना कर दिया।
@Neta_Bhushan असल में कथित आरक्षण विरोधी तत्व कट्टर ओबीसी डंकापति (हिसाब चुकता करने वाले) के ही वफादार मतदाता है, सरकार से निवेदन है इनके दबाकर लट्ठ बजाए क्योंकि यह मतदाता वर्ग लट्ठ खाकर भी वफादारी निभाता है।
@AadeshSpeaking आमतौर पर देखा गया है कि विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के लिए वामपंथ बस एक खिलौना है, जब मन किया खेल लिया, तालियां बजवाली, मनोरंजन हो गया। दुकान सेट हो गई और अच्छा।