देश के अमर सेनानी महाराणा प्रताप को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस साहस और शौर्य का परिचय दिया था, वह आज भी हमारे वीर-वीरांगनाओं के लिए पथ-प्रदर्शक बना है। मां भारती को समर्पित उनका पराक्रमी जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
राणा सांगा को गद्दार कहने वालों
गद्दारों आंख खोलकर डाटा देख लेना।
गद्दारी हमारे दिमाग में कभी इस राजस्थानी माटी ने आने ही नहीं दिया और जिस दिन आया ये माटी स्वयं अपने अंदर समाहित कर लेगी।
राजस्थान की 1070 KM सीमा लगती है पाकिस्तान से लेकिन कभी अलग देश या किसी के साथ जाने की बात नहीं हुई भारत के लिए जिए हैं और आगे भी अखण्ड भारत के लिए जिएंगे।
दिलजीत दोसांझ के दिल-लुमिनाटी कॉन्सर्ट के बाद दिल्ली के JLN स्टेडियम का हुआ बुरा हाल। एथलीट ने वीडियो पोस्ट कर दिखाई सच्चाई। एथलीटों के खेल के सामान को भी तोड़ने के लगाए आरोप।
[Diljit dosanjh, delhi, concert, stadium, athlete]
@RituRathaur Entire Rohingya population has been settled in India.
Rohingya & Bangladeshi together are more than 10 Cr.
They have Ration cards/Aadhar/Voter Id. Some even have Indian Passport
After elections Amit Shah will give house under EWS & Jobs under OBC quota
How they have Voter ID:
वर्तमान में जो जाति के नाम पर ध्रुवीकरण ट्विटर पर चल रहा है, वो एक लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट है और लगभग हर जाति में ही चल रहा है..
इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में अपनी अपनी जातियों के इमोशनल/गर्व वाले मुद्दे उठाये जाते हैं...कुछ हफ्ते ट्विटर ट्रेंड चलाये जाते हैं..और जब एक क्रिटिकल मॉस अचीव कर लिया जाता है तब एक संगठन/वेबसाइट लांच की बात शुरू कर दी जाती है..और ऐसा कहा जाता है कि इस संगठन/वेबसाइट को पॉपुलर कीजिये यह हमारे समाज के मुद्दों को उठाने का मंच बनेगा..फिर उसकी एक UPI ID भी बना ली जाती है..कुछ दिन यह वेबसाइट न्यूट्रल तरीके से ही चलती है...फिर शुरू होता है खेल..
खेल है धीरे धीरे करके अपनी जाति को विक्टिम और बाकी अन्य जातियों को शत्रु जाति बताने का...फिर अगले चरण में अपनी जाति की वर्तमान हालत हिन्दू यूनिटी के चलते ignored बताने का. फिर अपनी अपनी जाति के लोगों बड़े ट्विटर एकाउंट्स ढून्ढ कर उनके नीचे कमेंट में उन्हें गरियाने का कि आप फलां मंच से क्यों नहीं जुड़े और फलां मंच की बात क्यों नहीं उठा रहे...कई लोग इस प्रेशर में आकर जाने अनजाने उन मुद्दों को हवा देनी शुरू कर देते हैं जो यह गिरोह संगठित तरीके से उठवा रहा था..
फिर धीरे धीरे यह हिन्दू शब्द और बीजेपी-मोदी-संघ इतने इन्टरचेंजेबीली इस्तेमाल किये जाते हैं कि इनका पूरा समूह ही यह भूल जाता है कि उनका निर्माण क्यों हुआ था..और जो उन्हें बरगला रहे हैं उनका पोलिटिकल इंटरेस्ट क्या है..जाति चूँकि emotional मुद्दा होता है तो लोग अपनी जाति के नाम पर बने संगठन को बेनिफिट ऑफ़ डॉउट देते रहते हैं...और सीधे सीधे एक अलगावाद सोच को अपने ऊपर हावी कर लेते हैं..
यह प्रक्रिया अलग अलग स्वरूपों में भारत में शुरू तो 1920s में हुई थी...फिर इसमें तेजी 1990s में आयी...और इसका इंटरनेटिकरण 2008 से देखा जा रहा है..
अगर आप जाने अनजाने किसी ऐसे समूह का हिस्सा हैं जो अपनी जाति को लगातार विक्टिम बता रहा हो/ अन्य जातियों के बारे में आपको उकसा रहा हो/ आपके अंदर हिन्दू न होने का नैरेटिव हल्का हल्का डाल रहा हो और देश से पहले जाति की तरफ आपको ले जा रहा हो तो एक बार अपने अपने डिजिटल assets से जुड़े लोगों के नाम/पहचान/उनकी पोलिटिकल लीनिंग्स और कई केस में तो "मजहब" भी चेक जरूर करते रहें. आपको सब स्पष्ट दिखने लगेगा.
बाकी मॉडस ऑपरेंडी इधर है.. 👇