ज़िंदगी की बेपनाही का मुतालबा क्या करे। चिलचिलाती धूप में ज़ुल्फ़ों का साया क्या करे ॥ हर सहारा बेअमल के वास्ते बेकार है । आँख ही कोई ना खोले तो उजाला क्या करे॥
@MuslimVoiceCell@Uppolice Mene history padhi he maharana pratap kayi mahino tak akbar ke dar ke mare jangal me chupa raha or patte or ped ki chal khakar apna gujara kara tha
2017 की बात है. मध्य प्रदेश के अटेर विधानसभा में उपचुनाव से पहले EVM मशीन का डेमो हो रहा था.
जब तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह ने EVM का बटन दबाया, तो BJP की पर्ची निकली.
वहां मौजूद लोगों ने देखा- कोई भी बटन दबाने पर BJP की ही पर्ची निकल रही थी.
बताया गया मशीन खराब है, लेकिन विपक्ष ने तब सवाल उठाया- मशीन खराब होने पर सिर्फ BJP की पर्ची क्यों निकल रही है. कांग्रेस की पर्ची भी निकल सकती थी, लेकिन नहीं मशीन को पता है कि 'खराब' होने पर किसकी पर्ची निकालनी है.
ये मामला जब बहुत बढ़ा तो अधिकारियों को हटाकर मामला शांत कर दिया गया.
यह घटना यूपी के शामली के लिलौन गांव की है। लिलौन निवासी मोमीन के परिवार से इसी गांव का निवासी शिवम नामी एक शख्स रंजिश रखता है। रंजिश महज़ चुनावी है। लेकिन इस चुनावी रंजिश में शिवम ने ऐसी क्रूरता दिखाई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। बीते महीने मार्च की 10 तारीख को मोमीन के दो बच्चे घर से यह कहकर निकले कि वो खेलने जा रहे हैं। इन बच्चों को शिवम और उसके साथी नितिन और गोलू दोनों बच्चो को बहला फुसलाकर बडी नहर पर ले गए।
आरोप है कि इन तीनों ने दोनों बच्चों को पहले बेरहमी से पीटा और फिर नहर में फेंक दिया, चूंकि एक बच्चा तैरना जानता था तो वह अपने छोटे भाई को भी किसी तरह नहर से निकाल लाया। इसके बाद शिवम और उसके साथियों तीनों ने दोनों बच्चों को अपने घर में बन्धक बना लिया, और उन्हें निर्वस्त्र करके बेरहमी से पीट। बच्चों के साथ हो रहे अमानवीय एवं क्रूरता की सूचना पाकर मोमीन मौके पर पहुंचे, तो शिवम और उसके साथियों द्वारा उनके साथ भी गाली गलौज की गई। जिसके बाद मोमीन द्वारा @112UttarPradesh पर कॉल कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। आरोप है कि पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रावाई नहीं हुई है।
अब यहां से कई सवाल हैं। क्या @dgpup की @Uppolice बच्चों के साथ अमानवीय एवं क्रूर रवैया अपनाने वाले शिवम और उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त ऐसी कार्रावाई करेगी जो नज़ीर बने? इस घटना को एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन आरोपितों पर कोई कार्रावाई तक नहीं हुई है, ऐसा क्यों? @myogiadityanath की @UPGovt में बच्चों के साथ क्रूरता करने वालो के साथ पुलिस इतना ढुल मुल रवैया क्यों अपनाए हुए है। इस मामले का @NCPCR_ को संज्ञान लेना चाहिए, दोषियों को ऐसी सज़ा मिले जो नज़ीर बन जाए।
उत्तर प्रदेश –
सिर पर मुस्लिम टोपी, बड़ी दाढ़ी और कुर्ता पायजामा पहने इस व्यक्ति का नाम नरेश वाल्मीकि है। ये मुरादाबाद पुलिस का हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस से बचने के लिए 21 साल पहले मुरादाबाद से भाग गया। संभल जिले में रहने लगा। नाम सुल्तान रख लिया। पूरी पहचान मुस्लिम वाली बना ली। फर्जी डॉक्यूमेंट्स भी बनवा लिया। इसके बावजूद पकड़ा गया।
आखिरी बार ये पूरा देश इस तरह रेप की मुद्दे पर उठ खड़ा हुआ था, याद करो..
थू है ये दक्ष चौधरी, अक्कू, रिधिमा सिंह, अभिषेक चौधरी जैसे लोगों पर जहां हिंदू मुस्लिम एंगल हो तो तुम लोग पहचान जाते हो लेकिन यहां 3-4 साल की बच्ची का रेप हुआ तो कोई नहीं पहुंचता...
Justice for her
Part 1
जम्मू-कश्मीर से 509 नाबालिग लड़कियाँ लापता!
जानकारी के हिसाब से 509 में से सिर्फ 209 ट्रेस हुईं, 300 अब भी गायब, यह सिर्फ आंकड़े नहीं, 300 परिवारों का दर्द है!
@KashmirPolice @JammuAndKashmirGovt @PMOIndia तुरंत फास्ट-ट्रैक जांच शुरू करें, लापता बेटियों को सुरक्षित घर लाएं!
नाव को हाइजैक किया!
नाविक का अपहरण किया!
फिर गंगा नदी में इफ्तार पार्टी की गई!
वाराणसी पुलिस ने गंगा में इफ़्तार के मामले में जो नई धाराएँ जोड़ीं हैं, वो दंग करने वाली हैं!
गंगा में इफ़्तार का मामला अब अपहरण और अगवा करने तक पहुंच गया है!!
अब ये 10 साल से ऊपर की सजा का मामला हो चुका है?
इसी वाराणसी के UP कॉलेज में छात्र सूर्य प्रताप सिंह की गोली तड़तड़ाकर कर हत्या कर दी गई है।
ऐसा लगता है कि अपराधियों को पुलिस के ‘फ़ोकस’ का पता है।
पुलिस धर्म के ग्लेशियर में नई नई धाराओं पर शोध कर रही है!
और वे ज़मीन के टीलों पर अपराध की नई नई नर्सरी बना रहे हैं।
दो मुस्लिम पकड़े गए हैं जो अपने ही खेत में गाय को काट रहे थे और उसकी खाल उतार रहे थे। इनका नाम पता है क्या है एक का नाम संजू है एक का नाम रणवीर है, ये लोग करते खुद हैं और बदनाम मुसलमान होता है । वीडियो देखिए।
ब्राह्मणधर्म के कथाकथित धर्म ग्रंथ क्या कहते हैं और क्या सिखाते हैं ।।।
काला सच 😎😎
डेटॉल के सस्ते नशे कर अंग्रेजों के समय लिखे गए हैं और लोगों पर थोपे गये है ।।।