असहमतियाँ
नहीं होतीं हर समय
सहमति का विपरीत
असहमति कई बार
बस ये जताने के लिए भी होती है
कि समझ पाए अहमियत ।
(...है न! से)
~मुकेश कुमार सिन्हा
@Tweetmukesh#Hindyugm
मेरी कविताएँ केवल मेरे Facebook / X Wall तक सीमित नहीं हैं।
वे आपको यहाँ भी मिल जाएँगी :
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कभी मन हो, तो उनसे होकर गुज़रिए…
शायद कोई कविता आपको कुछ देर अपने पास बैठा ले।
और यदि ऐसा हो, तो अप��ी टिप्पणी जरुर छोड़ जाइए
'प्रत्याशा' है एक ऐसा हाईवे
जिसपर स्पीड ब्रेकर नहीं होता।
नहीं होते रेड/ग्रीन सिगनल्स।
बस सकारात्मकता की टॉर्च जलती रहे,
ताकि उसके औरा में भागता रहे मन !
#क्षणिका
रोज़ाना तुम्हारे चेहरे पर
खिला होता है
मेरे मन का स्नेहसिक्त सूरज.!
जिसके आभा से,
प्रदीप्त हो जाता हूँ मैं भी !!
~मुकेश सिन्हा
@Tweetmukesh#Roz#Shair
ख़्वाहिशों से
ख़्वाबों तक,
ख़्वाबों से
वास्तविकता तक,
बस
तस्वीरों की पुतलियां
चमकती रहीं
छमकती रहीं
कभी झांकना मुझमें
मेरे नजरों में
क्रोनिया का दर्पण
फ्रे�� में जड़ित
तुम्हें
बांधे स्थिर है
ताजिंदगी।
जिया हुआ क्षण भर का आलिंगन
देता है जीवन भर के लिए सिहरन।
समय की घड़ी
उसे एक पल लिखती है,
पर जिस्म और स्मृति
उसे बरसों तक पढ़ते रहते हैं।
कुछ स्पर्श
त्वचा से उतर जाते हैं
स्वेद की तरह,
और कुछ
नसों में बहते रहते हैं
रक्त की तरह....!
��ेन लिली और बॉल लिली की पहली खेप ❤️
लिली
तुम गुलाबीयत से भरपूर
प्रेमिल बौछार हो
जिसमें खिली पंखुड़ियों पर
पड़ती है जैसे ही मेरी बोझिल नजरें
परावर्तित होकर
तरंगित हो जाती हैँ.....
लिली तुम प्रेम हो ❤️
#पिता
संज्ञा-सर्वनाम
की विशेषता
बताने वाले शब्द होते हैं विशेषण
पिता
ऐसी ही चाहत भरी नजर से
ताकता है संतान को।
कि संतान से
पता चले विशेषता
पिता की ।।
~मुकेश कुमार सिन्हा
@Tweetmukesh#poetryonpaper#FathersDay#पितृ_दिवस की शुभकामनाएं
ओहो, सिर व छाती में दर्द
बेचैनियां भी
सांस तक लेने में तकलीफ
ठंडा पसीना
बेहोशी जैसी फीलिंग।
उफ्फ, जिसे तुम
प्रेम का लक्षण समझ रहे
कहीं वो
हाई ब्लड प्रेशर तो नहीं
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समय रहते डॉक्टरी सलाह लें
आज ऐसे भी ब्लड प्रेशर डे है 😊💐
कुछ अदरक के टुकड़े
कूटे जाने के बाबजूद
खुश होते हैं.....
आखिर उनकी शहीदी
उनके कड़कपन का स्वाद
तुम्हारी चाय को
खास जो बनाता है!
आया करो
अदरक, इलायची दोनों
तुम्हे याद कर रहे !
~ मुकेश सिन्हा @Tweetmukesh#अंतर्राष्ट्रीय_चाय_दिवस ☕
#ल���खनी ✍️
चाय पीते हुए निहारा था
वो पूछ बैठी -
कम मीठी है क्या?
नजरें थमी रही, पर कह बैठा
...न, अब ज्यादा मीठी हो गई
कुछ कॉकटेल असर जो करते हैं।
~मुकेश कुमार सिन्हा
@Tweetmukesh#अंतर्राष्ट्रीय_चाय_दिवस
गांव में पनपी प्रेम कहानी
स्कूल डेस्क पर बने प्रेम चिन्ह तक
सिमट कर मिट गई
या होगी अबतक, अमर हो गई
बस अमरूद व अमिया के उपहार को
कम्पास का चाकू बनाकर
मीठा नहीं है के, तंज भरे गुस्से के साथ
रूठती रही, मनाते रह��
कब बिता समय
कब उसका गौना हुआ
अब ख्यालों में आकर
प्रेम कविता लिखवा रही
स्टेपलर पिन जैसी हो क्या तुम?
बांधे रखती हो अपने प्रेम में
पर फिर भी कहाँ होता चैन तुम्हे
वक्त बेवक्त, गर ध्यान न रखा
नहीं मिली तुम्हे अहमियत
तो चुपके से चुभो भी देती हो
तुम्���ारे साथ में
है स्नेह की मिठास तो
कभी कभी पड़ती है जरूरत
पेन किलर, टिटभेक और एंटीबायोटिक टेबलेट की ।