96.7 એફ.એમ .આકાશવા���ી અમદાવાદ વડોદરા પરથી તારીખ 22 જૂન 2025 રવિવારે રાત્રે 8:30 એ સાયબર ફ્રોડ થી બચો એ વિશે હાર્દિ ભટ્ટની મૌલિન મુનશી એ લીધેલ મુલાકાત પ્રસારિત થશે.
@rpfwrrjt@rpfwr1@WesternRly@RailMinIndia@PMOIndia@AshwiniVaishnaw@CMOGuj There should be high safety standards to ensure the safety in the reserved compartment. Requesting you to take necessary steps against the responsible personnel who gave them permission to board on a fully occupied train.
@RailMinIndia रेलवे अब सुरक्षित नहीं है।
कल हम ट्रेन 22969 से यात्रा कर रहे थे। ��ाजकोट स्टेशन से कुछ लोग ट्रेन में चढ़े और बदतमीजी करने लगे। हम सात महिलाएँ अकेली थीं। हमने हर हेल्प लाइन मे बार-बार शिकायत की लेकिन कोई एक्शन ली नहीं गई।
@PMOIndia @AshwiniVaishnaw @CMOGuj
@rpfwrrjt@rpfwr1@WesternRly@RailMinIndia@PMOIndia@AshwiniVaishnaw@CMOGuj There should be high safety standards to ensure the safety in the reserved compartment. Requesting you to take necessary steps against the responsible personnel who gave them permission to board on a fully occupied train.
रिजर्व कोच मे भी अगर बिना रोकटोक जनरल यात्री इस तरह प्रवास कर सकते है तो फिर एडवांस मे अपनी सीट आरक्षित करने का क्या मतलब ?
यात्रियों को हो रही ये शारीरिक मानसिक मुसीबत रोकने के लिए रेल्वे ���ो ठोस कदम उठाने पड़ेंगे ।
@AshwiniVaishnaw @DarshanaJardosh @RailMinIndia
@RailMinIndia રેલ્વે હવે સલામત નથી.
ગઈકાલે અમે ટ્રેન 22969 માં મુસાફરી કરી.રાજકોટ સ્ટેશનથી લોકોનું ટોળું ટ્રેનમાં ચડ્યું અને અડાઅડી - ગાળો - ધક્કામુક્���ી શરૂ કરી. અમે સાત સ્ત્રીઓ એકલી હતી. અમે વારંવાર ફરિયાદ કરી પરંતુ કોઈ જવાબ મળ્યો નહીં.
@PMOIndia @AshwiniVaishnaw @CMOGuj
@RailMinIndia railway is not safe anymore.Yesterday,we travelled by train 22969.A bunch of people boarded the train from Rajkot station and started misbehaving. We were seven women alone.We complained repeatedly but got no response.@PMOIndia@AshwiniVaishnaw@CMOGuj
ગુજરાત અને ગુજરાતીની અસ્મિતા સમાન ઉત્કૃષ્ટ કલા અને સાહિત્ય પીરસતા 'કુમાર' સામયિક શતાબ્દી વર્ષના સળંગ અંક ૧૧૫૩માં હૃદયસ્થ શ્રી 'પંકજ ઉધાસ'ને શબ્દાંજલિ આપતો મારો લેખ.
सुनो लड़कियों,
जो कर सको तो इतना करना,
कि तुम्हारी अगली आने वाली नस्लों की हर बेटी को,
खिलौने के नाम पर बस किचन सेट ना मिले,
तुम उन्हें भी बंदूकों से खेलने देना।
जो कर सको तो इतना करना,
कि चाहे रोटी गोल बनाना ना सिखा सको उसको,
जूडो कराटे सिखा देना,
ताकि आँखों में आँखें डाल मुँह नोच सके वो,
वहशी हैवानों, दरिंदों का।
सुनो लड़कियों,
जब माँ बनो बरसों बाद,
तो याद करना वो सारे लम्हें,
जब माँ ने मुँह फेर लेने को कहा था,
जब दादी ने किसी से ना कहने को कहा था,
जब आँखों ही आँखों में दी घुड़की से सहमी थी तुम,
जब किसी अधेड़ ने बेशर्मी से हँसते हुए छुआ था,
उन अनगिनत लम्हों को बेबाकी से ��िना देना तुम,
आने वाली नस्ल के हर ‘नर’ और बेटियों को,
ताकि बेटियाँ चुप ना रहना सीखें,
ताकि नर, बेटे बनना सीखें,
तुम इन लम्हों को यूँ ही ज़ाया मत होने देना।
और कर सको तो ये भी करना,
कि जब तुम्हारा लाडला चिराग,
थोड़ी सी चोट खाकर रोने लगे,
तो कोई ये ना कहे उसको,
‘लड़की है क्या? बात बात पर रो देता है’
सुनो तुम उसे रोना ज़रूर सिखा देना।
जो कर सको तो अपने लाडले के कॉलेज के पहले दिन ही,
समझाना उसे बिठा, बेझिझक और बेबाक
कि उसकी और उसके जैसे लाडलों की
माँओं, चाचियों और दीदियों ने क्या सहा है,
उनको किसने, कैसे, कब और कहाँ जबरदस्ती छुआ है,
तुम उसे इस नस्ल के मर्दों सा मत होने देना।
सुनो लड़कियों,
जो कर सको तो इतना करना,
कि टोक सको अपने प्रेमियों, पिताओं और भाइयों को हर गाली पर,
कि किसी से कपड़ों से उसकी तरफ़ बढ़ने से हिचकें तुम्हारे दोस्त,
कि अनसुना ना करो अपने बेटे के दोस्तों के मजाक,
कि आटा, सब्जियों और चावल की मात्रा तय करने तक ना रह जाये तुम्हारी भूमिका घर में,
जो कर सको तो इतना करना,
कि हमारी आने वाली नस्ल बेहतर बन सके,
कि आने वाली दुनिया इतनी घिनौनी ना हो,
कि बेटियों के लिए अभयारण्य ना बनाने पड़ें,
कि इंसानियत हर पल घुटती ना हो।
सुनो लड़कियों तुमसे गुजारिश है,
कि कर सको तो इस दुनिया को अपने लायक बना लेना,
क्योंकि इस दुनिया को तुम्हारे लायक बना सकें,
हम लड़के इस लायक नहीं हैं।
देवेन्द्र शर्मा
Many many happy returns of the day, Happy Birthday to the most supportive person of my life. Thank You for always being the guiding light of my life...
માં અંબે આપને હંમેશા ઉત્તરોત્તર પ્રગતિ, સમૃદ્ધ સ્વાસ્થ્ય અને અંતરનો ઉજાસ આપે તેવી પ્રાર્થના.
#happybirthday@hemangmraval 💐🙏