जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
विधायक अभय सिंह बिल्कुल सही कह रहे महाराज सुहेलदेव बैंस वंश के क्षत्रिय ही थे। कोई भी मनई यदि निष्पक्ष हो अवध के इतिहास और बसावट का अध्ययन करेगा तो इस दावे को झूठा करार नहीं देगा।
अवध में किसी भी जनपद का इतिहास पढ़िए आपको बैंस ठाकुरों की ढेरों ऐसी बसावट मिल जाएगी जो तुर्कों के भारत आगमन के पहले से अवध में निवासरत है। गड़बड़ केवल यह हो रखी है कि अवध के बैंसो की अधिकतर पुरानी बसावटे अब भूलवश महाराज सुहेलदेव बैंस के पूर्वज त्रिलोकचंद प्रथम के स्थान पर डोडियाखेड़ा के त्रिलोकचंद द्वितीय से अपना सम्बन्ध जोड़ना शुरू कर दिए है।
उदाहरण के लिए सीतापुर के बैंस क्षत्रियों का उदाहरण ले सकते है। सीतापुर गजेटियर में दर्ज दंतकथाओं की माने तो वहाँ के पीरनगर क्षेत्र में पहले छप्पनगढ़ के बैंसो का राज था और वे इस जनपद की सबसे पुरानी बसावट में से एक थे। अंग्रेजो के समय तक इस पीरनगर क्षेत्र के आसपास ही बैंस राजपूतों की अधिकतर तालुकदारी जमींदारी और बसावट हुआ करती थी। लेकिन एक बड़ा अंतर था इनमें से अधिकतर अब अपने को डोडियाखेड़ा से आया होना बताने लगे थे और स्वयं को त्रिलोकचंद प्रथम की बजाय त्रिलोकचंद द्वितीय से जोड़ने लगे थे।
विधायक अभय सिंह बिल्कुल सही कह रहे महाराज सुहेलदेव बैंस वंश के क्षत्रिय ही थे। कोई भी मनई यदि निष्पक्ष हो अवध के इतिहास और बसावट का अध्ययन करेगा तो इस दावे को झूठा करार नहीं देगा।
अवध में किसी भी जनपद का इतिहास पढ़िए आपको बैंस ठाकुरों की ढेरों ऐसी बसावट मिल जाएगी जो तुर्कों के भारत आगमन के पहले से अवध में निवासरत है। गड़बड़ केवल यह हो रखी है कि अवध के बैंसो की अधिकतर पुरानी बसावटे अब भूलवश महाराज सुहेलदेव बैंस के पूर्वज त्रिलोकचंद प्रथम के स्थान पर डोडियाखेड़ा के त्रिलोकचंद द्वितीय से अपना सम्बन्ध जोड़ना शुरू कर दिए है।
उदाहरण के लिए सीतापुर के बैंस क्षत्रियों का उदाहरण ले सकते है। सीतापुर गजेटियर में दर्ज दंतकथाओं की माने तो वहाँ के पीरनगर क्षेत्र में पहले छप्पनगढ़ के बैंसो का राज था और वे इस जनपद की सबसे पुरानी बसावट में से एक थे। अंग्रेजो के समय तक इस पीरनगर क्षेत्र के आसपास ही बैंस राजपूतों की अधिकतर तालुकदारी जमींदारी और बसावट हुआ करती थी। लेकिन एक बड़ा अंतर था इनमें से अधिकतर अब अपने को डोडियाखेड़ा से आया होना बताने लगे थे और स्वयं को त्रिलोकचंद प्रथम की बजाय त्रिलोकचंद द्वितीय से जोड़ने लगे थे।
“अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए, कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए"।
“सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़, सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए"।
—राहत इंदौरी
बसावन इंडिया के पत्रकार और बसावन इंडिया के गाज़ीपुर ब्यूरो चीफ साथी विवेक यादव को गाज़ीपुर करण्डा पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया है और उनके साथ बदसलूकी भी की गई है यह घटना बेहद चिंताजनक है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है।
#thefeeedomvoice#socialmedia
अखिलेश जी अपने चाहने वालों को कभी निराश नहीं करते इसलिए आज प्रदेश का बच्चा युवा बुजुर्ग सब इनसे अथाह प्रेम करते है
ये प्यार, ये अपनापन आपको अन्य किसी नेता के प्रति देखने को नहीं मिलेगा ।
“ अल्लाह ताला से दुआ की है , की वो 2027 में मुख्यमंत्री बने “
वायरल बच्ची मरियम की बात सुनिए कितनी प्यारी है !
सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद मरियम बोली , "अखिलेश भैया बहुत अच्छे हैं, उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई।" ❤️
यह प्यारी मुलाकात सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है !
जिनके परिवार और बच्चे हैं, वही परिवार और बच्चों का दर्द समझ सकते हैं....
एक नन्ही सी प्यारी बच्ची ईद के दिन रो रही थी कि अखिलेश यादव जी से नहीं मिल पाई, लेकिन कोई बात नहीं अल्लाह पाक से दुआ करुंगी केवल उनकी सरकार आ जाए...
आज अखिलेश जी उस बच्ची से मिले ढेर सारा प्यार दुलार दिए जैसे खुद के बच्चे से करते हैं। ❣️❣️ साथ में बच्ची का पूरा परिवार भी मौजूद रहा।
अखिलेश जी सबके प्यारे सबके दुलारे ❣️❣️