“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
आज सबसे ज्यादा हैरान करने वाली खबर थी
शिवम कंप्यूटर साइंस से बीटेक थे,
10वीं, 12वीं में 90% से ज़्यादा नंबर।
ठीक जॉब नहीं थी तो बीएड भी किया।
फिर भी नौकरी नहीं मिली तो होमगार्ड के लिए दौड़ लगा दी
12 राउंड दौड़ने थे, 12वें राउंड में ही दौड़ पूरा होने से 50 सेकेंड पहले हार्ट अटैक के कारण गिर पड़े।
डॉक्टर्स ने सीपीआर दिया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
BIG BREAKING 🔥
तेरी डिग्री नकली नहीं, तू खुद भी नकली है, तू चोर है देश का !
सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील एडवोकेट बलराज मलिक ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार करते हुए व्यवस्था के धागे खोल दिए हैं।
आज देश में लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही चलाई जा रही है, जहाँ पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है।
चुनाव आयोग के सामने शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने जा रहे वकीलों और नागरिकों के रास्ते में सुप्रीम कोर्ट के बाहर धारा 163 लगाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार जनता की आवाज़ से डरती है।
EVM की पारदर्शिता, चुनावी प्रणाली और देश की सर्वोच्च व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जुगाड़ से सत्ता चलाने वाले लोग आज मीडिया और जनता के सवालों का सामना करने से कतरा रहे हैं।
लेकिन अब देश की जनता जाग चुकी है और इन जनविरोधी नीतियों को और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस जितना क्रूर इस देश में कोई नहीं रहा है..
वीडियो में कथित तौर पर शुक्रवार रात हाफ़िज़पेट रेलवे स्टेशन के बाहर एक RPF कॉन्स्टेबल एक महिला को पीटते और उसके बाल पकड़कर घसीटते हुए दिख रहा है।
@RahulGandhi नन्दी ग्राम उप चुनाव ...
एक तरफ खबर आई कि ममता टी एम सी की कैंडीडेट मैनेज हो कर मैदान से सट गई और कांग्रेस के उम्मीदवार को पुलिस पकड ले गई.
हो गया चुनाव
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है - लोकतंत्र की हत्या है।
BJP का निष्पक्ष चुनाव में भरोसा ही नहीं - इसलिए कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी से सत्ता बचाना चाहती है।
वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते, चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं।
कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी।
हम लड़ेंगे भी, जीतेंगे भी।
ब्रेकिंग: मोदी सरकार पर बड़ा सवाल 🔥
मोदी सरकार के दौरान:
सुभाष चंद्रा का ₹22,000 करोड़ का कर्ज निपटाया गया
अनिल अंबानी का ₹43,000 करोड़ का कर्ज निपटाया गया
भुगतान कौन करता है? आप
आप UPI से ₹5,000 भेजते हैं, तो दुकानदार को MDR के रूप में ₹20 का नुकसान होता है
यह पैसा बैंकों और GPay–PhonePe के साझेदारों तक जाता है
यही वे बैंक हैं जिन्होंने बड़े उद्योगपतियों के भारी कर्ज को राइट-ऑफ किया
SBI का ही ₹1.52 लाख करोड़ कथित तौर पर बट्टे खाते में जा चुका है
आरोप यह है कि BJP बड़े उद्योगपतियों के कर्ज की किताबें साफ करती है और फिर हर किराना दुकानदार के UPI लेनदेन पर शुल्क का बोझ डालती है
मोदी कहते हैं—“Digital India”
आलोचक कहते हैं—“Digital Loot”
अमीर के कर्ज की माफी,गरीब पर शुल्क का बोझ
यह सुधार नहीं है..यह QR कोड के जरिए चोरी है
मोदी जी, जन्मदिन का एक और तोहफ़ा मेरी तरफ से,
ये बूढ़ी अम्मा का आज शाम का विडियो 👇
इसे देखने के बाद थोड़ी सी भी शर्म बची हो तो आज जो 100 करोड़ रुपए के दिए जलाए गये उनके बचे हुए तेल में डूब मरना।