AI के रूप में दुनिया को अब एक ऐसा अलादीन का चिराग मिल गया है, जो कुछ ही मिनटों में इंसान को उधार की बुद्धि दे सकता है और साधारण सोच को कई गुना तेज़ बना सकता है। AI की वजह से कम मेहनत करने वाले और ज़्यादा मेहनत करने वाले, दोनों के बीच का फर्क धीरे-धीरे मि��ता दिख रहा है। सुनने में ये बेहद लोकतांत्रिक लगता है-जैसे अब हर किसी को बराबर का मौका मिलेगा! लेकिन असली खतरा भी यहीं से शुरू होता है।
ये कौन है भाई, खुलेआम मनबढ़ई कर रहा है.
सड़क पर चलती गाड़ियों का गेट खोल दे रहा है. ये सब यह दिल्ली में कर रहा है. फिर अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लाइक्स और व्यू बटोर रहा है. इसे मानो कोई डर-भय नहीं है.