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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति क़े अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री @myogiadityanath से मांग की है कि उड़ीसा में हुए बिजली वितरण निजीकरण के विनाशकारी नतीजों को देखते हुए प्रदेश में पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को तुरंत वापस लिया जाए।
संघ ने स्पष्ट किया कि उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता फोरमों की शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लेकर टाटा पावर की चारों वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए 10 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय की है। आयोग ने पाया कि उपभोक्ता सेवाओं में ये कंपनियां पूरी तरह नाकाम रहीं और उपभोक्ताओं को लगातार उत्पीड़न झेलना पड़ा।
फोरमों ने अपने आवेदन में कहा है कि उड़ीसा में बिजली परिषद को तोड़कर निजीकरण का पहला प्रयोग 1999 में हुआ जो पूरी तरह विफल रहा। पहले एईएस कंपनी भागी फिर रिलायंस का लाइसेंस 2015 में निरस्त हुआ और अब टाटा पावर पर भी गाज गिरने वाली है।
उड़ीसा में उपभोक्ता गलत व भारी भरकम बिलों, घंटों की कटौती और स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अत्याचार से परेशान हैं। कर्मचारियों को किनारे कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
संयुक्त संघर्ष समिति संघ ने कहा कि अगर उड़ीसा जैसे औद्योगिक प्रदेश में निजीकरण पूरी तरह असफल रहा है तो उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की गरीब और किसान आधारित जनता पर इसे थोपना सीधा अन्याय है।
@uprvup @VTKESAZM @UPRVPAS @VtkesUPTG2 @UPPCLLKO @aksharmaBharat @UPGovt

@uprvup इसलिए पॉवर कॉरपोरेशन के उच्च अधिकारी निजीकरण के लिए फड़फड़ा रहे थे। सब पोल खुल रहा है।
#निजीकरण_मुर्दाबाद
#Save_UPPCL
निजीकरण कितना घातक है इसका एक और उदाहरण देखिए।
#save_uppcl

@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt बिजली महकमे को इंजीनियर ही अच्छे से चला सकते हैं, नौकरशाहों को मुखिया बनाने से ही विभाग घाटे की तरफ बढ़ा है
#save_uppcl
#Stop_Privatization_UPPCL #UPPCL_बचाओ_जनहित_बचाओ
#निजीकरण_मुर्दाबाद
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt #निजीकरण करके बहुजन का आरक्षण समाप्त करना है और अपने धन्नासेठ मित्रो को #uppcl बेचना है
#save_uppcl
#Stop_Privatization_UPPCL #UPPCL_बचाओ_जनहित_बचाओ
#निजीकरण_मुर्दाबाद
@AAPUttarPradesh @RahulGandhi @BoltaHindustan
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt जैसे मेडिकल को डॉक्टर चला सकता है ठीक वैसे ही बिजली महकमे को इंजीनियर ही अच्छे से चला सकते हैं, नौकरशाहों को मुखिया बनाने से ही विभाग घाटे की तरफ बढ़ा है
#save_uppcl
#Stop_Privatization_UPPCL #UPPCL_बचाओ_जनहित_बचाओ
#निजीकरण_मुर्दाबाद
सरकारी संस्थानों को बेचना बंद करो। यही देश के विकास की रीढ़ हैं।
डालना कितनी नैतिकता है?
#save_uppcl
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
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बिजली फ्री नही तो सस्ती दी ही जा सकती है, लेकिन UP में तो #निजीकरण से जनता को और लूटने की तैयारी हो रही है, क्या यही रामराज्य की बात आपलोग करते थे #save_uppcl
#Stop_Privatization_UPPCL #UPPCL_बचाओ_जनहित_बचाओ
#निजीकरण_मुर्दाबाद
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बिजली फ्री नही तो सस्ती दी ही जा सकती है, लेकिन UP में तो #निजीकरण से जनता को और लूटने की तैयारी हो रही है, क्या यही रामराज्य की बात आपलोग करते थे #save_uppcl
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#निजीकरण_मुर्दाबाद
@AAPUttarPradesh @BhimArmyChief @BoltaHindustan
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt बिजली फ्री नहीं दे सकते जनता तो कम से कम सस्ती ही दीजिए, #निजीकरण कर धन्नासेठों के हाथ में बिजली देकर क्या गरीब जनता को और बुरी तरह से मारने का इरादा है क्या
#save_uppcl
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#निजीकरण_मुर्दाबाद
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#निजीकरण_मुर्दाबाद
निजीकरण से देश बर्बादी और गुलामी की तरफ बढ़ रहा है
बिजली एयरपोर्ट रेल bhel सब निजी हाथों में देकर विश्वगुरु बनाना चाहते हैं ये
निजीकरण मुर्दाबाद
#save_uppcl
निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय: संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें जिससे देश के अन्य हिस्सों में विफल हो चुके निजीकरण के प्रयोग को उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर न थोपा जाय। बिजली कर्मचारियों ने आज लगातार 270 वें दिन निजीकरण के विरोध में विरोध में अवकाश के बावजूद व्यापक जनसंपर्क जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करते हुए कहा है कि उनके मार्गदर्शन में बिजली कर्मचारियों ने रिकॉर्ड विद्युत आपूर्ति की है और लाइन हानियां में कमी कर उसे राष्ट्रीय मानक के नीचे कर दिया है। महाकुंभ के दौरान बिजली कर्मियों ने अथक परिश्रम कर 65 दिनों तक चले महाकुंभ में पल मात्र के लिए भी विद्युत आपूर्ति में व्यवधान नहीं आने दिया। आंदोलन रत रहते हुए भी बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी के दौरान लगातार बेहतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में निजीकरण का प्रयोग एक विफल प्रयोग है। प्रांत के स्तर पर सबसे पहले वर्ष 1999 में उड़ीसा में विद्युत वितरण का निजीकरण किया गया था। निजीकरण का यह प्रयोग उड़ीसा के सबसे अधिक औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में एक वर्ष में ही विफल हो गया। अमेरिका की एईएस कंपनी एक वर्ष बाद ही काम छोड़कर भाग गई और उसने महा चक्रवात के दौरान टूटे बिजली के ढांचे का पुनर्निर्माण करने से इनकार कर दिया। रिलायंस पावर अन्य तीन विद्युत वितरण निगमों में काम करता रहा। फरवरी 2015 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब परफॉर्मेंस के चलते रिलायंस पावर के भी तीनों लाइसेंस रद्द कर दिये। उड़ीसा में यह दूसरी विफलता थी।
कोरोना के दौरान जून 2020 में उड़ीसा के चारों विद्युत वितरण निगमों का लाइसेंस टाटा पावर को दे दिया गया। इसी माह 15 जुलाई को उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बेहद खराब परफॉर्मेंस के कारण टाटा की चारों कंपनियों को नोटिस जारी किया है और उनके परफॉर्मेंस पर जनसुनवाई का आदेश जारी कर दिया है ।उड़ीसा में यह निजीकरण की तीसरी विफलता है। उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी टाटा पावर के विरोध में लगातार आंदोलन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पड़ोसी प्रांत बिहार में गया, भागलपुर और समस्तीपुर में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के नाम पर निजीकरण का प्रयोग किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसके पूरी तरह असफल रहने के चलते इसे एक साल बाद ही रद्द कर दिया। महाराष्ट्र में औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर और झारखंड में रांची और जमशेदपुर में निजीकरण के विफल प्रयोग निरस्त किए जा चुके है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में निजीकरण का प्रयोग असफल रहा है। ग्रेटर नोएडा में आए दिन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी का लाइसेंस निरस्त कराने हेतु स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार का खुलेआम उल्लंघन कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजी कंपनी मुनाफे के लिए काम करती है और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 जनपदों में बेहद गरीब जनता रहती है। अतः प्रदेश के और आम जनता के व्यापक हित में निजीकरण का विफल प्रयोग उत्तर प्रदेश में न लागू किया जाए और तत्काल इसे निरस्त किया जाए।
आंदोलन के 270 वें दिन आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक जनसंपर्क कर निजीकरण से होने वाले नुकसान से आम लोगों को और कर्मचारियों को अवगत कराया ।
#stop_privatization_of_uppcl
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#निजीकरण_मुर्दाबाद
निजीकरण जनता और कर्मचारी किसी के लिए सही नहीं है
@uprvup इसीलिए तो चरमनैन UPPCL बार बार शासन को #निधि_नारंग की सेवा विस्तार के लिए पत्र लिख थे ताकि इन सबकी मिलीभगत उजागर न होने पाए और निधि नारंग ही अपने पोस्ट पर बने रहे अभी निधि नारंग को गए 1 हफ्ता भी नहीं हुआ और पोल खुलना शुरू।
#जय_हिंद
#निजीकरण_मुर्दाबाद
#Save_UPPCL
#Avdhesh_Sir
@uprvup सर ये सब आपके मेहनत का उभरता हुआ रंग है जो अभी तक हिम्मत नहीं जुटा पाए ये I am Safe लोग।
#Proud of you Sir.
#निजीकरण_मुर्दाबाद
#Save_UPPCL
@UPRVPAS @narendramodi @PMOIndia @myogiadityanath @myogioffice @aksharmaBharat @UPGovt #निजीकरण एयरपोर्ट का हुआ है, वहां देख ले कोई कितना विकास हो गया, महंगाई का रिकॉर्ड टूट गया है
#save_uppcl
#Stop_Privatization_UPPCL #UPPCL_बचाओ_जनहित_बचाओ
#निजीकरण_मुर्दाबाद
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#निजीकरण_मुर्दाबाद
निजीकरण करके प्रदेश व युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेला जा रहा है @Nikhilchavdagj1 @AAPUttarPradesh @BhimArmyChief @BoltaHindustan @INCIndia @nehafolksinger @ndtvindia @Aloksharmaaicc
@uprvup कुछ दिन बाद चेयरमैन कहेंगे कि निजीकरण तो ऊर्जा मंत्री AK शर्मा जी की नीति थी हम तो उनके आदेश का पालन कर रहे थे। फिलहाल सत्य की जीत होगी। निजीकरण परास्त होगा।
#अवधेश_कुमार_वर्मा_जिंदाबाद
#Save_UPPCL
#निजीकरण_मुर्दाबाद
निजीकरण से 76500 बिजली कर्मियों की नौकरी खतरे में: निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष की तैयारी : सेवा करेंगे और हक भी लेंगे - संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया गया तो लगभग 76500 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण रोकने के लिये निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली की बढ़ी हुई मांग को देखते हुए बिजली कर्मी आंदोलन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की समस्याओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर अटेंड कर रहे हैं । संघर्ष समिति ने कहा कि उनका नारा है - सेवा करेंगे और हक भी लेंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 17500 और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगभग 10500 नियमित कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इन दोनों विद्युत वितरण निगमों में लगभग 50 हजार संविदा कर्मी काम कर रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि वे निजी कंपनी की नौकरी स्वीकार कर लें। दूसरा विकल्प यह है कि वे अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आ जाए और तीसरा विकल्प यह है कि वे स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर घर चले जाएं। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसे बिजली कर्मी बहुत बड़ी संख्या में हैं जो निजी कंपनियों की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी नौकरी करने आए थे। अब कई कई साल की नौकरी के बाद उनसे यह कहना कि वे फिर निजी कंपनी में चल जाए यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और बिजली कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
दूसरे विकल्प के रूप में यदि बिजली कर्मी अन्य विद्युत वितरण निगमों में वापस आते हैं तो वे सरप्लस हो जाएंगे और उनकी छटनी की नौबत आ जाएगी। इतना ही नहीं तो पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से अन्य विद्युत वितरण निगमों में आने वाली बिजली कर्मी नियमानुसार वरिष्ठता क्रम में 2025 बैच के नीचे अर्थात सबसे नीचे रखे जाएंगे। स्वाभाविक है कि सरप्लस होने पर सबसे पहले इन बिजली कर्मियों की ही छटनी होगी।
संघर्ष समिति ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में निजीकरण के बाद दिल्ली के विद्युत वितरण निगमों में कुल 18097 बिजली कर्मी कार्यरत थे। निजीकरण के एक वर्ष के अंदर-अंदर निजी घरानों के उत्पीड़न से तंग आकर 8190 बिजली कर्मियों ने सेवानिवृत्ति ले ली। इस प्रकार दिल्ली में निजीकरण के एक साल के अंदर ही अंदर-अंदर 45% बिजली कर्मी सेवानिवृत्ति लेकर घर चले गए। तब बिजली कर्मचारियों को पेंशन मिलती थी। अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत 90% बिजली कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलती वे सेवा निवृत्ति लेकर कहां जाएंगे ?
हाल ही में 1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ विद्युत विभाग का निजीकरण किया गया। निजीकरण जिस दिन किया गया उसी दिन लगभग 40% बिजली कर्मी सेवा निवृत्ति लेकर घर चले। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों की यूनियन और सरकार के बीच 1 फरवरी की रात जो समझौता हुआ था आज तक उसे लिखकर नहीं दिया गया है। और निजी कंपनी यह कह रही है कि यह समझौता सरकार ने किया था हमें इससे कोई मतलब नहीं है। निजीकरण की यही भयावह कहानी अब उत्तर प्रदेश में दोहराई जा रही है जिसे बिजली कर्मी कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 267 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण बिजली कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए अंधेरे का संदेश लेकर आ रहा है। बिजली कर्मियों ने कहा कि वे किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे और यह संघर्ष तब तक चलता रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता।
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