मुंबई में भी बड़ी संख्या में छात्र लोग प्रोटेस्ट कर रहे थे!
पुलिस विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को एक बस में भर कर ले जा रही थी!
तभी एक लड़के ने बस का गेट खोल दिया और सभी छात्र कूदकर भाग गए!
इन छात्रों से सरकार डर रही है!
देश के कोने कोने में प्रदर्शन कर रहे है छात्र लोग!
इस बंदे के अंदर डर नाम की कोई चीज है या नहीं? जबसे प्रोटेस्ट चालू है पहले ही दिन से जंतर मंतर में खतरनाक रिपोर्टिंग कर रहे हैं!
पुलिस की आँखों में आंखे डालकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं गोदी मीडिया को इनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है!
इस बंदे के लिए एक लाईक तो बनता है! ❣️
@IAmNehaBhart सच में उस भाई की हिम्मत काबिले तारीफ है, पुलिस के सामने भी डटकर रिपोर्टिंग! आप जैसे सच्चे सोशल एक्टिविस्ट और समर्थक ही हमें उम्मीद देते हैं।
जय भीम आपका काम और लगन हमेशा ऐसे ही प्रेरणा देता रहे।
VIDEO | Delhi: On SC declining urgent hearing of plea challenging police action against students during CJP's protest in Delhi, Advocate Narendra Mishra says, "Today, I mentioned before the Court the issue concerning the lakhs of students who are peacefully protesting at Jantar Mantar. The question is why, to suppress this peaceful protest against the various paper leak cases in the country, the Delhi Police resorted to such brutality. The lathicharge on students, the use of tear gas, and the deployment of individuals without uniforms or identification badges to take action against the students are all completely against the Constitution of India."
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
ABHIJEET CONFRONTS POLICE OVER JANTAR MANTAR LOCKDOWN 🚨
ABHIJEET 😡: Yesterday you beat students, injured young girls, and still they stayed peaceful. After all that, you are blocking them again today.
POLICE: Come inside and talk.
ABHIJEET 🎯: Why inside? Lathis were used on the road, so answer on the road, in front of the media.
POLICE: No one is being stopped.
ABHIJEET 🔥: Then why are entry points shut? Why are students saying they are being stopped? This is not miscommunication. The videos are there.
What happened today at Delhi was disheartening. We are praying for the recovery pf every injured and hoping for government to respond in a positive way.
🚨Samdish didn’t just report - he exposed the truth.
This video shatters the godi media + Delhi police lie that
"protesters started the violence."
Raw. Unfiltered. Furious.
आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
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Unacceptable abuse of power.
Additional DCP Sandeep Lamba must be suspended immediately for hitting a female protester. High-ranking officers should be held to higher standards, not given impunity.
‘मैं मरने से पहले नहीं मरना चाहता’ जंतर मंतर से Prakash Raj.
देखिए @Saurabh_Unmute की @SanjayAzadSln और @prakashraaj से Exclusive बातचीत और ग्राउंड रिपोर्ट The Red Mike के यूट्यूब चैनल पर।
हिंदू महिलाएं का फूटा गुस्सा: श्री राम करके आपने लोगों को मार डाला, आपने कितने मुस्लिम्स को लिंच कर डाला, अब आपके रिलीजियस सेंटीमेंट्स क्यों नहीं हर्ट हुए?