रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर इनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति कर छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण की सारी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग : स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 सार्वजनिक कर किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों की राय ली जाय: निजीकरण के बाद भी सरकार को निजी कंपनियों को कई साल तक अरबों खरबों रुपए की वित्तीय सहायता देनी पड़ेगी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही पूरी प्रक्रिया को प्रबंधन और निजी घरानों के बीच मिली भगत बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय और स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जिसके आधार पर निजीकरण किया जा रहा है,उसे सार्वजनिक कर इस पर उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की राय ली जाय।
संघर्ष समिति ने बताया कि निजीकरण हेतु तैयार किया गया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पूरी तरह एक तरफा है और निजी कंपनियां के पक्ष में बनाया गया है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 का पालन करने पर सरकार को निजी कंपनियों को ट्रांजिशन सपोर्ट के नाम पर न्यूनतम 05 से 07 वर्ष तक सस्ती दरों पर बिजली आपूर्ति करनी पड़ेगी और इस एवज में अरबों रुपए खर्च करने पड़ेंगे । यह अवधि तब तक और बढ़ाई जा सकती है जब तक निजी कंपनियां मुनाफे में न आ जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त निजी कंपनियों को सारी जमीन बेहद कम दाम पर मुहैया कराई जाएगी । निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे और देनदारियों का सारा बोझ सरकार अपने ऊपर ले लेगी।
कर्मचारियों की सेवान्त सुविधाओं के भुगतान हेतु निजी कंपनियों को अधिकृत किया जा रहा है कि वह इसे ए आर आर के जरिए उपभोक्ताओं के टैरिफ पर पास ऑन करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसके आधार पर निजीकरण करने के बाद भी सरकार को प्रतिवर्ष अरबों खरबों रुपए निजी कंपनियों को देना पड़ेगा, घाटे का सारा दायित्व सरकार उठाएगी और आम उपभोक्ताओं के टैरिफ में कर्मचारियों के टर्मिनल बेनिफिट्स का भार जोड़ा जाएगा।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन और शासन के कुछ उच्च अधिकारी निजी घरानों के साथ मिले हुए हैं और सरकार को अंधेरे में रखकर निजीकरण थोपना चाहते हैं जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा और आम उपभोक्ताओं का टैरिफ भी बढ़ेगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि भारत सरकार ने 14 मई 2025 को विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु स्टैंडर्ड बिल्डिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी किया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह जानकारी मिली है कि पावर कारपोरेशन ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जो आरएफपी डॉक्यूमेंट बनाया है वह स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पर आधारित है। इसके पूर्व जब ट्रांजैक्शन कंसलटेंट का चयन किया गया था तब लिखा गया था कि निजीकरण का आधार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट के चयन और आरएफपी डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने के बीच निजीकरण का आधार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 से बदलकर स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 हो गया है । ऐसे में निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और पहले स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 सार्वजनिक किया जाय जिसके आधार पर प्रदेश के 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था निजी घरानों को दी जा रही है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 278 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण का विफल प्रयोग उप्र की गरीब जनता पर न थोपा जाय: उप्र के सांसदों और विधायकों को पत्र भेजकर संघर्ष समिति ने की मांग
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के सभी सांसदों और विधायकों को पत्र भेज कर मांग की है कि वे प्रभावी पहल करें जिससे उत्तर प्रदेश की जनता पर निजीकरण का विफल हो चुका प्रयोग थोपा न जाय और ग्रेटर नोएडा व आगरा की बिजली वितरण व्यवस्था को पॉवर कारपोरेशन टेकओवर करे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि बिजली के निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा और अन्य स्थानों पर पूरी तरह विफल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा और आगरा में बिजली के निजीकरण से पावर कारपोरेशन को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है और हो रहा है। ऐसे में विकसित भारत और विकसित उप्र के विजन में सबसे बड़ी प्राथमिकता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करना और ग्रेटर नोएडा और आगरा की विद्युत वितरण व्यवस्था को तत्काल सरकारी क्षेत्र में टेकओवर करना होना चाहिए।
आगरा डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी मेसर्स टोरेंट पावर कंपनी के बारे में सांसदों और विधायकों को भेजे गए पत्र में वर्ष 2010 से 2024 तक का प्रत्येक साल का विवरण दिया गया है। विवरण के अनुसार प्रत्येक वर्ष पॉवर कॉरपोरेशन ने महंगी दरों पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को सस्ती दर पर आपूर्ति की है और इससे भारी घाटा होता जा रहा है। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि यह कौन सा निजीकरण है जिसमें निजी क्षेत्र को बिजली आपूर्ति करने में ही पावर कारपोरेशन को 2434 करोड रुपए का नुकसान हो चुका है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दरअसल यह नुकसान लगभग 10000 करोड रुपए का है। आगरा एक औद्योगिक और व्यावसायिक शहर है। आगरा भारत की लेदर कैपिटल है। वर्ष 2023 - 24 में जहां पावर कारपोरेशन ने 05 रुपए 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को 04 रुपए 36 पैसे प्रति मिनट की दर पर बेचा। महंगी बिजली खरीद कर सस्ते में बेचने से पॉवर कॉरपोरेशन को वर्ष 2023 - 24 में 274 करोड रुपए का नुकसान हुआ है। आगरा औद्योगिक शहर होने नाते आगरा में बिजली विक्रय की दर 07 रुपए 98 पैसे प्रति यूनिट है। इस प्रकार सस्ती बिजली खरीद कर टोरेंट पावर ने केवल एक वर्ष में 800 करोड रुपए का मुनाफा कमाया है। यदि आगरा की बिजली व्यवस्था सरकारी क्षेत्र में रहती तो यह मुनाफा पावर कारपोरेशन को मिलता । इस प्रकार एक वर्ष में ही लगभग 1000 करोड रुपए का घाटा पावर कारपोरेशन को उठाना पड़ा है।
संघर्ष समिति ने पत्र मे लिखा है कि इसके अतिरिक्त 01 अप्रैल 2010 को पावर कारपोरेशन का आगरा शहर में बिजली राजस्व का 2200 करोड रुपए का बकाया था जिसे एग्रीमेंट के अनुसार टोरेंट पावर को एकत्र करके पावर कारपोरेशन को वापस करना था। इसके एवज में पावर कॉरपोरेशन 10% धनराशि टोरेंट पावर को इंसेंटिव के रूप में देती। आज 15 वर्ष व्यतीत हो गए हैं और टोरेंट पावर ने 2200 करोड रुपए की बकाया की धनराशि में एक पैसा भी पावर कारपोरेशन को वापस नहीं किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि इस प्रकार आगरा के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी में हजारों करोड रुपए का नुकसान पावर कारपोरेशन को उठाना पड़ रहा है और पावर कारपोरेशन ने इस एग्रीमेंट को निरस्त करने के लिए एक बार भी टोरेंट पावर को नोटिस नहीं दिया।
ग्रेटर नोएडा के बारे मे संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी मेसर्स नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को शेड्यूल के अनुसार विद्युत आपूर्ति नहीं करती क्योंकि यह घाटे वाले क्षेत्र हैं। इसी कारण और कई अन्य शिकायतों के चलते उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का वितरण लाइसेंस निरस्त कराने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में उदाहरण देकर बताया है कि उड़ीसा में निजीकरण का प्रयोग तीसरी बार विफल हो गया है। उड़ीसा का विद्युत नियामक आयोग टाटा पावर की चारों कंपनियों के बहुत खराब परफॉर्मेंस के चलते 15 अगस्त के बाद टाटा पावर के विरुद्ध जन सुनवाई करने जा रही है। इसके अतिरिक्त अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का प्रयोग उज्जैन,सागर,ग्वालियर,रांची,जमशेदपुर, औरंगाबाद,नागपुर,जलगांव,मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया में विफलता के चलते निरस्त किया जा चुका है।
संघर्ष समिति ने माननीय सांसदो और विधायको से मांग की है कि वे अपने पद का सदुपयोग करते हुए प्रभावी पहल करें और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त कराने की कृपा करें।
चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में फर्जी आंकड़ों के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री जी को गुमराह कर किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के गांव-गांव घर-घर तक बिजली पहुंचाने का काम किया है अब बिजली के निजीकरण के बाद यह सारे गांव लालटेन युग में पहुंचने वाले हैं।
कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनेता, बड़े पूंजीपतियों के साथ मिलकर बिजली के निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने की फिराक में है।
माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले को रोके तथा गरीबों के हित में, किसानो के हित में, छोटे व्यापारियों के हित में, कर्मचारियों के हित में, छात्रों के हित में, बेरोजगार के हित में, सरकारी विभागों में पिछड़ों एवं दलितों का आरक्षण बचाने के लिए व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त करने की कृपा करें।
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