मोदी की कूटनीति, विदेश नीति, निर्णय लेने की क्षमता ,अनुशासन और जवाब देने का तरीका मुझे उस पर विश्वास करने के लिए विवश करते हैं यही कारण है कि मैं मोदी को पसंद करता हूं ,प्यार करता हूं और हमेशा अपने प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता हूं ।
असाधारण व्यक्ति था “भरत तिवारी ” अभी भी बिहार पुलिस और बिहार सरकार को पता नहीं चल रहा है क्या दुर्भाग्यपूर्ण कांड किया है उन्होंने ।
24 तारीख को महापंचायत होने दीजिए सबको पता चल जाएगा भोजपुर जिला क्या है ।
कौन कहता है कि बिहार में सबसे अधिक जातिवाद है…..?
भरत तिवारी के एनकाउंटर पर
- पासवान समाज के लोग रो रहे हैं
- भुइयां-मुसहर सहनी के घर में मातम है
- यादव समाज के लोग न्याय के लिए सड़कों पर हैं
- सामान्य वर्ग पूर्णतः इसे अत्याचार बता रहा है
ये चाचा पासवान समाज के हैं। देखिए कैसे कैमरे पर रोने लगे।
Bihar का युवा Bharat Tiwari कलयुग का भगत सिंह था !
गरीबों के लिए क्रांतिकारी योद्धा दलित पिछडे भगवान मान चुके थे 10 किमी तक अंतिम यात्रा में सिर्फ लोगों की भीड़ थी
अभी के समय में चार लोग कंधे देने के लिए नहीं मिलते हैं यहां लाखों लोग एक साथ चल रहे हैं...🫡♥️
एक भगत सिंह को फासी पर चढ़ा दिया-दूसरा भगत सिंह को एनकाउंटर कर दिया
भरत तिवारी के पिता और भाई पर भी FIR हो गई है।
जिन अपराधियों पर केस चल रहे हैं, वे चुनाव लड़ रहे हैं, संसद में बैठे हैं।
लेकिन भरत तिवारी ने सरेंडर किया, उसका एनकाउंटर कर दिया गया।
अगर यह तानाशाही नहीं है, तो और क्या है?
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील कि सृष्टि मिश्रा पास के ही गांव का एक लड़का ब्लैकमेल कर प्रताड़ित कर रहा था ! Bsc टॉप कर दूसरे दिन आत्महत्या कर लेती है लेकिन अब सुसाइड नोट और उसके फोन पर मिले वीडियो उसकी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं! @DrMohanYadav51 जी क्या सृष्टि मिश्रा को न्याय मिलेगा?
❤️ इंसानियत आज भी ज़िंदा है ❤️
टीटीई जितेंद्र मिश्रा ट्रेन में टिकट चेक कर रहे थे।
एक युवक बिना टिकट मिला। आँखों में आँसू थे। पूछने पर बोला
साहब, होटल वाले ने मारपीट करके नौकरी से निकाल दिया। गाँव जाना है, लेकिन टिकट के पैसे नहीं हैं। माफ कर दीजिए।
नियम तो कहता है कि जुर्माना लगाया जाए।
लेकिन मिश्रा जी ने इंसानियत दिखाई।
उन्होंने पहले उसे खाना खिलाया, फिर अपनी जेब से टिकट बनवाया और जाते-जाते ₹200 भी दे दिए।
वर्दी तो बहुत लोग पहनते हैं, लेकिन वर्दी में इंसानियत निभाने वाले बहुत कम होते हैं। 🙏
सलाम है टीटीई जितेंद्र मिश्रा जी को। ❤️
क्या आज के समय में ऐसे लोग ही असली हीरो नहीं हैं? ❤️
मैथिली केवल भाषा नहि, हमर इतिहास, संस्कृति, साहित्य आ पहचान अछि। आब समय आबि गेल अछि जे हम सभ एकजुट भऽ कऽ अपन भाषा केर सम्मान आ अधिकार लेल आवाज उठाबी।
#Maithili_In_Census#जनगणना_के_भाषा_मैथिली
मैथिली एकटा संवैधानिक भाषा छै तैं जनगणना फार्म मैथिलीयोमे हेबाक चाही। अहाँ (सरकार) जनगणना फार्म मैथिलीमे नइँ बनेलिए ताकि लोक कंफ्यूज रहय आ अपन मातृभाषा मैथिली नइँ भरय। मुदा से नइँ हएत। हम मिथिला वासी दोसर भाषा मे फार्म भरब आ मातृभाषा कॉलम मे मैथिलीए लिखा।#जनगणना_के_भाषा_मैथिली #Maithili_In_Census
वृंदावन के पावन धाम में स्थित वंशीवट वह दिव्य स्थान माना जाता है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपनी मधुर बांसुरी बजाते थे। बांसुरी की मोहक धुन सुनकर गोपियाँ और भक्त उनकी ओर खिंचे चले आते थे। मान्यता है कि यहीं से भगवान श्रीकृष्ण ने प्रेम, भक्ति और दिव्य आनंद का संदेश दिया। आज भी वंशीवट श्रद्धालुओं के लिए आस्था, प्रेम और कृष्ण-भक्ति का पवित्र प्रतीक है। 🙏🌿🦚✨
बांकीपुर के उपचुनाव में न तो भाजपा के जीत जाने से सरकार को कोई फर्क पड़ेगा ना ही राजद के जीत जाने के सरकार गिरेगी। लेकिन एक बार सोच के देखिए की यदि प्रशांत किशोर जी विधानसभा पहुंच जाते हैं तो उसका क्या असर होगा।
जनता जानती है की प्रशांत जी को यदि विधायक, सांसद या मंत्री बनना होता तो उनके लिए ये मुश्किल काम नहीं था। लक्ष्य यदि सत्ता का सुख ही भोगना होता तो प्रशांत जी 2014 के प्रचंड जीत के बाद सबके नजरों के केंद्र हों जाने के बावजूद मोदीजी से अलग नहीं होते। यदि सत्ता ही लक्ष्य होता तो जदयू में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो बन जाने के बावजूद विलग नहीं होते। यदि कुर्सी और उसकी ताकत ही प्यारी होती तो देश में 13 मुख्यमंत्रियों को कुर्सी तक पहुंचाकर सबसे एक सेफ डिस्टेंस नहीं रख रहे होते। आज भी प्रशांत जी का राजनीतिक रसूख ऐसा है की भारत के मैप में जिस राज्य पर उंगली रख दीजिए, उस राज्य से रातोंरात राज्यसभा पहुंच सकते हैं। कल को चाह लें की राज्य में मंत्री बनना है तो खुद नीतीश जी तैयार हो जाएंगे निशांत को मेंटर और प्रोटेक्ट करने के शर्त पर। इसी केंद्र की सरकार में चाह लें तो कल सुबह केंद्रीय मंत्री बन जा सकते हैं। मोदीजी नहीं तो नीतीश जी, नीतीश जी नहीं तो नायडू जी स्वागत को तैयार होंगे। लेकिन प्रशांत जी का लक्ष्य न तो मंत्रीपद, पावर या सत्ता है और ना ही वो कुछ वर्षों के लिए इस क्षेत्र में आए हैं।
बांकीपुर का उपचुनाव प्रशांत किशोर जी के विधायक बनाने को लेकर महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है बिहार के लिए, बिहार की जनता के लिए, बिहार के मुद्दों के लिए, बिहार के भविष्य के लिए।
तस्वीरें पटना के बांकीपुर विधानसभा की है जिसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जीने पेरिस बना दिया है।