DSP सुनील झाझड़िया जी को अपनी #महिला_सहकर्मी के साथ किया गया ये व्यवहार देकर महसूस होता है की माननीय को अब #पुलिस_रत्न_सम्मान के साथ प्रमोट करते हुए SP बना देना चाहिए
@bobby_shabnam@KraantiKumar किसी की जान लेना,उसका मानसिक/शारिरिक शोषण करना बिल्कुल गलत है।
पर इतिहास में लगाये गए आम के पेड़ों के फल आम ही होंगे न कि अंगूर।
@bobby_shabnam@KraantiKumar पुरुष महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार बनाते है,ससुराल वाले दहेज हत्या कर देते है जो कि हर दिन हो रहे है ये भारतीय संस्कृति को लज्जित नही कर रहे?
@JayManikpuri2@RaipurDistrict भारतीय समाज को अब ये चीजें स्वीकार कर लेनी चाहिए,क्योकि ऐसे मामले अब धीरे धीरे बढ़ेंगे ही।
लोगो को चाहिए कि हर किसी की मान मर्यादा का ख्याल रखा जाए।
महिला को वापस आ कर अपने बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए ,साथ ही पति को महिला के फैसले का सम्मान।
रायगढ़ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर कीचड़ पोतने की शर्मनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है।
संविधान निर्माता और भारत रत्न बाबासाहेब के अपमान का यह कृत्य न केवल असामाजिक तत्वों की गंदी मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या भाजपा सरकार के शासन में दलितों और संविधान के प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल क्यों रही है !
यह घटना उस विचारधारा को उजागर करती है, जो समता और न्याय के सिद्धांतों को कुचलने का प्रयास करती है।
बाबासाहेब ने संविधान के माध्यम से देश को एकता और समानता का मार्ग दिखाया, लेकिन भाजपा के शासन में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, जो संविधान के मूल्यों पर हमला प्रतीत होती हैं। हमारी मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
छत्तीसगढ़ के @MahasamundDist में लोक कलाकार संरक्षण समिति, बागबाहरा द्वारा लगातार चार वर्षों से आयोजित की जा रही आवासीय लोक संगीत कार्यशाला एक अनुकरणीय प्रयास है। यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक विधाओं के संरक्षण का कार्य कर रहा है, बल्कि कलाकारों को प्रशिक्षण और रोजगार का माध्यम भी बन रहा है। अब तक 500 से अधिक प्रशिक्षार्थी इससे लाभान्वित हो चुके हैं।
इस वर्ष 12 जिलों से आए 250 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में हिस्सा लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ी लोक विधाओं के साथ शास्त्रीय संगीत, रामचरित मानस, तबला, ढोलक, ऑर्गन जैसे वाद्ययंत्रों की भी गहन शिक्षा दी गई। यह आयोजन बिना किसी शासकीय सहायता के केवल समाज और संस्कृति प्रेमियों के सहयोग से संचालित होता है, जो इसे और भी प्रशंसनीय बनाता है।
संस्था के संरक्षक धनराज साहू सहित लोक गायक टीकम पटेल, डिमान सेन और अन्य सदस्यों की अगुवाई में समिति जिस समर्पण से कार्य कर रही है, वह बागबाहरा को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित कर रहा है। ऐसे आयोजनों से लोक संस्कृति सुरक्षित रहती है और युवाओं में अपनी जड़ों से जुड़ने की भावना जागती है। प्रदेशवासियों को इस प्रयास से जुड़कर इसे और भी सशक्त बनाना चाहिए।
#Chhattisgarh
"सभी बड़ी मुद्राएं खत्म कर देनी चाहिए, 500 रुपए के नोट की भी जरूरत नहीं है"
◆ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा
#NChandrababuNaidu | @ncbn | N. Chandrababu Naidu
@askrajeshsahu वैसे तो ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन कम दहेज मिलने पर कार या बाइक न मिलने पर या शक करने पर एक तो दुल्हनों की हत्या नहीं होती
तो मेरा कहना है जब भीख चाहिए तो सिग्नल पर जाइए
किसी को मारना क्यों ??
और जब लड़का पसंद नहीं तो पसन्द वाले से कीजिए हत्या क्यों ??
हत्या दोनों कर रहे है
@TarunaaSahu08 हा पर इतना भी परुषो पर अत्याचार नही बढ़ा है जितना महिलाओं पर होता है।
हर दिन के अखबार में कम से कम 1 चौथाई खबरे तो सिर्फ महिलाओं पर अत्याचार की ही रहती है।
अच्छी बात है महिलाएं अब विरोध कर रही है पर हा जान लेना ये नही होना चाहिए।
पर आमने सामने की लड़ाई कमजोर जीत भी तो नही सकता।
@masijeevi इन मामलों पर अब हर कोई बोल रहा है पर कुछ सालों पहले जब सिर्फ महिलाएं ही शिकार होती थी तो ये बात कहकर टाल दिया जाता था कि ये तो उनका आपस का मामला है।।
@triptisoni6194 2/2 और सबसे ज्यादा इस विषय मे गहन चिंतन की जरूरत पुरुष समाज को है कि आखिर आज के इस आधुनिक जमाने मे अभी भी महिलाओं पर घरेलू हिंसा,काम करने की जगहों पर शोषण,ब्लात्कार,रेप थ्रैट ये सब आखिर रुक क्यों नही आ रहा।
इज़्ज़त करोगे तो इज़्ज़त मिलेगी न।
आम का पेड़ आम का ही फल देगा,सेब नही।
@triptisoni6194 1/2
पुरुषों को महिलाओं द्वारा प्रतिरोध करना रास नही आ रहा अब,कुछ तो लेखों में प्रतिरोध तक को सह नही पा रहे,हद है।
आप सही है,आपसे 100% सहमत हूं
आखिर एक महिला जो शारिरिक रूप से, सदियों से कमजोर रही है,कमजोर है वो अब पुरुषों का प्रतिरोध,प्रतिशोध करने को मजबूर हो रही है,ये सोचनीय हैं
यह माही घने हैं, जो आदिवासी समाज से आती हैं और अपनी आवाज़ के ज़रिए सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को मुखरता से उठा रही हैं। हाल ही में माही ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर बढ़ती गर्मी और हीट वेव पर एक रैप सॉन्ग गाया है, जो न सिर्फ दिल को छूता है बल्कि आपको गहराई से सोचने पर मजबूर करता है। उनके शब्दों में दर्द है, चेतावनी है और एक आवाज़ है उन सभी के लिए जो जलवायु संकट की मार झेल रहे हैं। माही का यह रैप न सिर्फ एक गीत है, बल्कि एक चेतावनी है कि अब भी अगर हम नहीं जागे, तो आने वाला कल और भी भयावह हो सकता है।
@CGVOICE00777 कुछ नही होने वाला।
ये रहिस वाले क्लब में आ चुका है,बड़े लोग नही चाहेंगे कि घर टूटे।
इससे बड़े लोगो के वर्ग पर हमला होगा जो आगे चलकर और बड़े लोगो के घर पर बुलडोजर चलने का उदाहरण बन सकता है और ऐसा बिल्कुल नही चाहेगा सम्पन्न वर्ग।।।
@niteshj33056093@JayManikpuri2 बहुत बढ़िया जयदास भाई।
आपने यहाँ एक स्वर्गीय व्यक्ति की ज़िंदगी की गरिमा रखी।
वरना लोग तो चाहते है आप मरे व्यक्ति को भी गाली दे।
विरोध करते करते लोग अपने सिद्धान्त,अपनी सीमाय,अपने आदर्श भूलकर बस अंधभक्त बने पड़े है।
सच मे अंधभक्ति का जमाना है जयदास भाई
मिस्टर अन्नू चंद्रा बात यहाँ न्यूज़ चैनल और अखबार में दिखाए जा रहे समाचारों में श्री/श्रीमान/जी/ शब्दों की हो रही है। आप मौखिक रूप से किसी भी नेता, अधिकारी को कैसे भी संबोधित करे। वह आपका निजी मामला है लेकिन क्या वे शब्द हम हमारे अखबारों और टीवी न्यूज़ चैनलों में लिख बोल सकते है?
कृपया पहले आप पत्रकारिता की इथिक्स समझें।
पत्रकार होकर अगर आप किसी नेता, मंत्री, सांसद, विधायक या अधिकारी के नाम के आगे श्रीमान, माननीय, जी, श्री जैसे शब्दों का सजावटी इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अफसोस! आप पत्रकार नहीं, दरबारी हैं। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनने आए थे या चरण वंदना करने? पत्रकारिता सम्मान के बदले सवाल पूछती है, और आप सम्मान में ही घुलते जा रहे हैं। जब कलम सत्ता के तलवे चाटने लगे तो न तो सच बचेगा, न ही समाज। पत्रकार का धर्म है तीखा सवाल, सत्ता से टकराव ‘श्रीमान जी कृपा करें’ टाइप चापलूसी। जब नेता ग़लत करते हैं, तब पत्रकार का ‘शब्द’ हथियार बनता है, गुलदस्ता नहीं।
नाम के आगे “श्रीमान जी” लगाकर आप अपनी निष्पक्षता नहीं, अपनी नपुंसकता साबित कर रहे हैं।
तय कीजिए आप पत्रकार हैं या प्रचारक?
#Chhattisgarh