जिला बुलंदशहर में छेड़छाड़ के एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की पुलिस की कार्यप्रणाली पर माननीय उच्चतम न्यायालय की नाराज़गी इतनी गंभीर रही कि सुनवाई के दौरान अदालत ने यहां तक कहा कि “क्या हमें उत्तर प्रदेश पुलिस को ही भंग कर देना चाहिए?” जब आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया था, तो FIR में उसे ‘अज्ञात’ क्यों बताया गया? माननीय उच्चतम न्यायालय ने पुलिस की जांच और जवाब पर गंभीर सवाल उठाए।
सोचिए, जब यही पुलिस SC-ST Act के मामलों की विवेचना करती होगी तो पीड़ितों के साथ क्या होता होगा? कमजोर विवेचना, साक्ष्य जुटाने में लापरवाही और लचर पैरवी का लाभ आरोपितों को मिलता है, जबकि पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं। ऐसी ही लापरवाही बाद में इन मामलों को ‘झूठा’ बताकर खारिज करने वालों को भी मौका देती है।
Ready for an indefinite strike from October 2026. ✊
Indian banking history has witnessed struggles lasting 17, 18, 21, 42 and even 63 days.
Now, after nearly four decades, another chapter may be in the making.
History will remember the stand we take today.
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Public Sector Banks are the backbone of India’s economy—serving farmers, workers, tribals & backward classes at the grassroots.
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