फंडों के फंडर सोरोस,
अगर दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन के पीछे आपका हाथ है तो कृपया गोदी ऐंकरों को DM करें। अगर नहीं है तो गृहमंत्री को DM कर दीजिए।
पुलिस के डर से प्रदर्शन न करने वाले जल्दी से जाकर दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन के वीडियो बना लें। अपन मोबाइल में सेव कर लें। जब आपको पुलिस प्रदर्शन करने से रोकने आए तो उसे वीडियो दिखा दें। दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर बता दिया है कि डरने की ज़रूरत नहीं है। जो ग़लत है, उसे ग़लत कहा जाएगा। पुलिस के इस प्रदर्शन का साथ दीजिए।
बाकी तो सब ठीक ही है।
Thank you for turning out in such record numbers to raise your voice against Vote Chori.
This groundswell ensures democracy will prevail, truth will prevail. INDIA will prevail!
टाटा चोरी ! तो अब क्या होगा? मुझे उम्मीद है कि टाटा को बचाने के लिए कनॉट प्लेस मार्केट संघ और चाँदनी चौक व्यापार संघ आगे आएगा। टाटा को घाटा किससे हो रहा है, इस पर बहस चलाएगा।
ज्ञानेश कुमार के पास एक ही तर्क है। उन्हें हटाया नहीं जा सकता है। मगर यह तर्क तो चुनाव आयोग के आयुक्तों के लिए है। इस तर्क से आप SIR का जवाब नहीं दे सकते। कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों में डांट खाते रहे, फैसलों से राहत पाते रहे, इसके बाद भी SIR का भांडा फूट गया है। पीलीभीत मॉडल और बंगाल मॉडल के बीच वोट चोरी के बहुत सारे मॉडल हैं। नियम बदल कर और नियम बना कर वोट चोरी की गई है। इसका बचाव किसी के पास नहीं है। यह आदमी भारत के इतिहास में सबसे शर्मनाक तरीके से दर्ज हो रहा है। ऐसे लोगों को इतिहास की चिंता नहीं होती है। लोकतंत्र का इतिहास मिटाने वाला इतिहास के किताब की चिंता क्यों करेगा, मगर वर्तमान में जो जी रहे हैं, हांफ रहे हैं, दौड़ रहे हैं, खांस रहे हैं, उन्हें दिख रहा है कि SIR ने वोट चोरी के कैसे-कैसे एक्सप्रेस वे बनाए हैं।
हमने सब लोगों से कहा कि जब आप मार्च और महारैली के लिए यहां आएंगे, चीजें खरीदें, खरीदारी करें।
मगर, यहां Connaught Place में आते हुए हमें पता लगा कि BJP ने सारी की सारी दुकानें जबरदस्ती बंद करवा दी।
तो traders का नुकसान कौन कर रहा है, कैसे हो रहा है, यह आप जान लीजिए!
विदेशी मुद्रा भंडार में 28 साल की सबसे बड़ी गिरावट हुई है.
सिर्फ 7 हफ्ते में 66 अरब डॉलर स्वाहा हो गए, क्योंकि हम रुपए की गिरावट को धीमा करने के लिए डॉलर बेच रहे हैं.
ये सब इसलिए किया जा रहा है कि मोदी की छवि को बचाया जाए. डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के पार ना जाए.
Due to incessant rain the Public Impeachment of Gyanesh Kumar organised by the INDIA janbandhan has been rescheduled to tomorrow October 31st at 230pm. This will be followed by the चलो दिल्ली Ramlila March on Sunday Nov 1st.
The countdown to the exit of Gyanesh kumar who has so blatantly and brazenly subverted and sabotaged the Constitution of India on the instructions of the PM-HM duo is accelerating.
It is not at all surprising that the BJP ecosystem organised a mock Parliament today. After all, the PM-HM have consistently mocked Parliament since 2014, bulldozing Bills through, denying debates on urgent issues of public importance, denigrating Parliamentary institutions and converting both chambers into arenas for self-glorification.
In Dec 2023 a Bill to provide an unprecedented life-long immunity to the CEC was pushed through both Houses while 145 Opposition MPs had been suspended. Soon thereafter, Gyanesh Kumar was positioned as CEC to implement the nefarious Modi-Shah designs to strip crores of Indians of their Constitutional right to vote.
दूसरी जगहों पर अनुमति नहीं मिलने के बाद INDIA जनबंधन शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे 10 राजाजी मार्ग, नई दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित करेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया है। उन्होंने हमारी सुनियोजित तरीके से चुनावी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को ही खोखला किया है। साफ़ शब्दों में कहें तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से झूठ बोला है। उन्होंने उस द्वेषपूर्ण जोड़ी के इशारे पर काम करते हुए उनके हाथों का औज़ार बनने का काम किया है। अगली बारी उन दोनों की होगी।
Dear Mrs. Sitarama,
1.Which "legal and commercial matter" required Tata Trusts and Tata Sons to be hosted at Amit Shah's residence?
2.When is crony number 1 going to appear in the game and which pieces of Tata is he going to get?
Finally, all India's businesses except 3-4 of your cronies, already hate all of you and don't need any incitement.
Tata is being criminally destroyed, and no business leader dares say a word.
How long will you stay silent? Until they own you?
Indian business is not Modi and Shah's plaything. You lack courage. We don't. We will ensure justice for these crimes.
The CM must bring transparency to this mindless destruction of the ecosystem near Karjat.
1) Publish the full report of the public hearing of the project.
2) Publish the Environmental Impact Assessment and the Environmental Clearance application/ report of the project.
3) Publish the Alternate Sites proposed by the consultant of the project proponent.
4) Has the regime thought of battery storage technology instead of pump storage technology for excess solar power?
5) Show us where, in the past decade of the regime, any compensatory afforestation program has been successful to achieve an ecosystem like the ones being destroyed by the regime.
6) Where in the world, apart from construction labour, have an excess of 60 jobs been created for pump storage technology, with modern day tech.
This project is being forced onto Maharashtra to destroy the ecological balance of the Sahayadris that is the ecological, spiritual and historical crown jewel of Maharashtra.
The Western Ghats being destroyed, with practically over 6 lakh trees in the project area, even while the regime claims about 45,000 is shocking.
Many trees cut and left around yesterday, were not numbered!
While cutting has been stopped by our locals and our local unit for the last 2 days, I urge Maharashtra to intervene and prevent the regime from snatching away the Sahayadris and giving its ownership to a private project that will destroy it.
This is not just about cutting trees, this is about the ecosystem being destroyed, that we have to protect.
दिल्ली के त्रिलोकपुरी में आज SIR को लेकर जनसुनवाई में वोट चोरी के जीते-जागते सबूत देखकर आया हूं।
हैरान रह जाएंगे! सिर्फ़ 4 बूथों पर 416 वोट काट दिए गए। बिना किसी जायज़ कारण के, ग़ैरक़ानूनी तरीके से।
इसीलिए हर बूथ का ऑडिट ज़रूरी है। तभी BJP-EC की वोट चोरी का असली पैमाना सामने आएगा।
ज्ञानेश कुमार जी, जितना छिपना है, छिप लीजिए। जाना तो पड़ेगा ही।
माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी 60,000 कर्मचारियों को निकाल रही है। जो निकाले जा रहे हैं, वो कहाँ जा रहे हैं, पता नहीं। स्टार्ट अप के नाम पर गाड़ी स्टार्ट हो रही है या यह भी एक बहाना जैसा बनता जा रहा है। स्टार्ट अप के लिए इतने अवसर हैं तो बड़ी कंपनियाँ 60,000 को निकालती क्यों? वो भी अपने भीतर स्टार्ट अप क्रिएट कर सकती हैं। उन्हें नए और छोटे अवसरों से बैर तो है नहीं। आई टी मंत्री को बताना चाहिए कि सरकार ने ऐसा कुछ अध्ययन किया है? नए अवसर कहाँ बन रहे हैं? किस स्तर के बन रहे हैं? भारत भर में फैले बी और सी ग्रेड के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लाखों की फीस देकर पढ़ने वाले छात्रों को क्या करना चाहिए?
आई टी मंत्रालय को सोशल मीडिया के पोस्ट हटवाना छोड़ ये सब ज़रूरी काम करने चाहिए। सरकार को इंजीनियरिंग कॉलेजों के ऐसे कोर्स तुरंत बंद कर देने चाहिए जिनका कोई भविष्य नहीं है। वरना नोएडा से लेकर मेरठ तक में फैले औसत और बेहद ख़राब इंजीनियरिंग कॉलेज सपना बेच कर लाखों रुपये ठगते रहेंगे। माँ-बाप भी इस उम्मीद में बच्चों को भेजते रहेंगे कि कुछ न कुछ हो जाएगा। उन्हें सच्चाई बताई जाए नहीं तो ज़मीन बेच कर, लोन लेकर इंजीनियरिंग पढ़ाने की ज़िद उनके परिवार को और ग़रीब कर देगी। इन कॉलेजों का कुछ नहीं बिगड़ रहा है।इस लूट पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद अख़बार में ख़बर छपी थी कि बीजेपी जेन ज़ी से संवाद बढ़ाएगी। अपने मंत्रियों को कॉलेजों में भेजेगी। कितने मंत्री गए हैं? इस देश में जितने कबाड़ कॉलेज ज़िले ज़िले में फैले हैं, दुनिया के किसी भी देश में रद्दी कॉलेजों की इतनी भरमार नहीं होगी। जानबूझ कर कबाड़ किया गया है, औसत मास्टर भरे गए हैं ताकि भारत की जवानी अपनी कहानी लिखने लायक भी न रहे। दो चार की सफल कहानियाँ सुना-सुना कर सबको सुलाते रहो। भारत के युवाओं को बर्बाद किया है शिक्षा मंत्रियों ने। शिक्षा सचिवों ने। वाइस चांसलरों ने। पर्ची से भरे गए अयोग्य शिक्षकों ने। इस कड़वी सच्चाई से इंकार कर कोई फायदा नहीं है। हम सब देख रहे हैं कि खराब शिक्षा ने भारत की क्षमता को औसत कर दिया है। हर आदमी अपनी क्षमता से 70 प्रतिशत कम पर प्रदर्शन कर रहा है। केवल शिक्षा नहीं है, घूस से लेकर टैक्स का सिस्टम, फर्ज़ी केस में फंसाने का विधिवत सिस्टम भी भारत की क्षमता को नीचे कर रहा है।
हम इन सभी का ईमानदारी से मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे। इसकी क्षमता भी समाप्त हो चुकी है। आप इतने सारे वाइस चांसलर को रातों रात बर्ख़ास्त नहीं कर सकते। मंत्रिमंडल में बदलाव की ख़बर मई के महीने से ही चल रही है, उसी में इतना चैलेंज है। अगर राष्ट्रपति और राज्यपाल एक साथ सभी वाइस चांसलरों को SACK कर दें, माइक्रो सॉफ्ट की तरह तो कितना बड़ा संदेश जाएगा। इतने सारे वाइस चांसलर को बर्ख़ास्त करने का मतलब होगा कि आर एस एस को बर्ख़ास्त कर देना। RSS को ही यह काम करना चाहिए। देखना चाहिए उससे निकटता के नाम पर कितने अयोग्य लोग चांसलरी का सुख प्राप्त कर रहे हैं। संघ यह काम कर देगा तो उसकी शाखा में जाने के लिए कोई बचेगा नहीं। संघ में साहस नहीं कि जिसे अपनी निष्ठा के नाम पर वाइस चांसलर बनाया है, उससे पूछे कि पाँच साल में आपके कॉेलेज ने क्या किया क्योंकि पूछेगा तो क्या पूछेगा, और चांसलर क्या बताएगा? यही कि संस्कृति पर इतने कार्यक्रम किए, इतने प्रचारकों को बुलाया। बात इसकी नहीं है, सेमिनार की लिस्ट मत दीजिए, बताइये कि पढ़ाई का स्केल कितना सुधरा है। भारतीयकरण के नाम पर शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आया है। विचारों पर अंकुश लगाने के तरीके अपनाकर यूनिवर्सिटी सिस्टम को बर्बाद कर दिया गया। इस सच्चाई का सामना कीजिए कि भारत रद्दी कॉलेजों का महादेश बन कर रह गया है। पहले भी नहीं किया, आज भी नहीं कर रहा है और कल भी अपनी क्षमता के उच्चतम स्तर पर प्रदर्शन नहीं करेगा।
एक आसान रास्ता भी है। हर कॉलेज में भजन क्लबिंग शुरू कर देनी चाहिए। हर दिन पहली कक्षा भजन क्लबिंग की हो, हर महीने भजन क्लबिंग का बड़ा कार्यक्रम हो। जिसमें ख़राब गाने वाले गायकों और तुकबंदी करने वाले कवियों को खूब पैसा देकर बुलाया जाए जो भजन के माधुर्य को ख़त्म कर क्लब का यौवन दे सकें। भाई लोग उपनिवेशवाद से लड़ रहे थे, कोलोनियल माइंडसेट से लड़ रहे थे, शिक्षा का भारतीयकरण कर रहे थे और भजन का क्लबीकरण करने लग गए। एक हिन्दी नाम तक नहीं मिला, संस्कृत तो छोड़िए। जेन ज़ी जवानियों को लुभाने के लिए पूरब के गिलास में पश्चिम नहीं,पश्चिम के गिलास में पूरब को मिला दिया। सुधा शरबत की जगह जिंजर मिक्स मोइतो बना रहे हो तुम लोग। ख़ूब समझते हैं। भजन की आत्मा क्लब में मुक्ति पा रही है और भारत का युवा थर्ड क्लास कॉलेज में एडमिशन लेकर थर्ड क्लास पढ़ाई करते हुए राष्ट्रवाद का परचम लहरा रहा है। जो मन में आए, करो, लेकिन बात यही है।
Look at the crowd, there's zero enthusiasm on seeing his face
Everyone is just putting their hands up like they have been told to do so. Poor ANI even had to mute the video to hide the embarrassment 😂