निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
#stop_privatization_of_uppcl
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दो बार शिकायत की, एक हफ्ते बाद आए, खानापूर्ति की, वृद्ध माता जी को समझा दिया कि एक घंटे में पानी कम हो जाएगा।चाय के नाम पे १०० ले लिए। समस्या जस की तस। वर्षों से भी अधिक समय से लंबित समस्या का निराकरण नहीं।इसकी वजह बदबू और गंदगी के कारण डेंगू के मच्छरों का खतरा अलग से बना हुआ है
स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए का एरियर खतरे में पड़ने की आशंका : निजीकरण हेतु प्रीपेड मीटर लगाकर डाउन साइजिंग करने की साजिश : निजीकरण के विरोध में प्रान्त भर में विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आशंका जताई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाले के चलते विद्युत वितरण निगमों का 115000 करोड़ रुपए का एरियर खटाई में पड़ सकता है। संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर डाउन साइजिंग की जा रही है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सीतापुर, गोण्डा आदि स्थानों पर पकड़ा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला निजी कंपनियों और दोषी उपभोक्ताओं की मिलीभगत के साथ किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह ध्यान देने की बात है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे सबसे बड़ा तर्क घाटे का दिया जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि वैसे तो पावर कार्पोरेशन प्रबंधन घाटे के झूठे और मनगढ़ंत आंकड़े दे रहा है। किन्तु स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों की पुराने मीटर की रीडिंग शून्य करने या नष्ट करने के समाचार बहुत खतरनाक संदेश दे रहे हैं जिसे समय रहते न रोका गया तो बिजली राजस्व का बकाया वसूलना नामुमकिन हो जाएगा और वस्तुतः घाटा और बढ़ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में विद्युत वितरण निगमों का उपभोक्ताओं पर लगभग 115000 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन के आंकड़ों के अनुसार लगभग 110000 करोड रुपए का घाटा है। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह बात कह रही है कि 115000 करोड रुपए का राजस्व वसूल लिया जाए तो कोई घाटा नहीं रहेगा, उल्टे पावर कॉरपोरेशन 5000 करोड रुपए के मुनाफे में आ जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार लगभग 34 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और इनमें से लगभग 06 लाख स्मार्ट मीटर अभी तक वापस नहीं किए गए हैं। कितने लाख मीटर में पुरानी रीडिंग शून्य की गई है या नष्ट की गई है यह एक बड़ी जांच का विषय है।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर निजीकरण की प्राथमिक शर्त है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद निजीकरण होने पर निजी कंपनियों को राजस्व वसूली में किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें स्वतः राजस्व मिलता रहेगा।
स्पष्ट है कि निजीकरण हेतु स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और इस नाम पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण के पहले बड़े पैमाने पर डाउनसाइजिंग करना प्रारंभ कर दिया है।
वर्ष 2017 के मापदंडों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 20 कर्मचारी और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों का नियम था। बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की डाउन साइजिंग करने के लिए मापदंड में प्रतिगामी परिवर्तन किया गया। उपभोक्ताओं की संख्या 2017 की तुलना में कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद अब शहरी क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 18:30 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति सबस्टेशन 12.5 कर्मचारी का मापदण्ड बनाकर बड़ी संख्या में संविदा कर्मी निकाले जा रहे हैं। यह सब निजी घरानों की मदद के लिए किया जा रहा है।
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने निकाली तिरंगा रैली : विधान सभा में विजन - 2047 में बिजली व्यवस्था में सुधार की चर्चा के बाद निजीकरण का अध्याय तुरंत बन्द करने की मांग :
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने कहा है कि उप्र विधान सभा में रखे गये विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विजन-2047 में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की विस्तृत चर्चा की गयी है ऐसे में जब सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने पर 08 अगस्त से प्रारम्भ कर तिरंगा सभा अभियान के समापन पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर तिरंगा रैली निकाल कर निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। राजधानी लखनऊ में बिजली कर्मी राणा प्रताप मार्ग स्थित हाईडिल फील्ड हॉस्टल पर एकत्र होकर हाथ में तिरंगा लिये हुए जीपीओ पार्क स्थित काकोरी क्रांति स्मारक तक रैली के रूप में गये।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियो ने बताया कि अवैध ढंग से नियुक्त झूठा शपथ पत्र देने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की मदद से पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा तैयार कराये गये निजीकरण के दस्तावेज के अनुसार निजीकरण के बाद भी प्रदेश सरकार को निजी कम्पनियों को सस्ती दर पर बिजली मुहैया करानी पड़ेगी जिसका भार सरकार उठायेगी। इसके अतिरिक्त सरकार को वित्तीय मदद भी करनी पड़ेगी। यह सब भार उप्र सरकार उठायेगी। सवाल यह है कि निजीकरण के ऐसे प्रयोग से उप्र को क्या मिलने वाला है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि उल्लेखनीय है कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर कारपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। विगत 08 वर्षों में एटी एण्ड सी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्ड सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। ऐसे में राष्ट्रीय मानक के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने का कोई औचित्य नहीं है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मी तिरंगा लेकर निजीकरण के विरोध में निकले। बिजली कर्मियों के हाथ में तख्तियां थीं जिनपर लिखा था कि निजीकरण का निर्णय निरस्त करो, विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है।
#stop_privatisation_of_uppcl
#stop_victimization_of_uppcl_employees
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पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा श्री निधि नारंग के सेवा विस्तार हेतु भेजे गए पत्र से बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त : निजीकरण के नाम पर हो रही लूट को रोकने की मुख्य सचिव से अपील : निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के नए मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल से अपील की है कि वह पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दें और उत्तर प्रदेश में निजीकरण के नाम पर हो रही है भारी लूट को रोकने की कृपा करें।
संघर्ष समिति ने निधि नारंग को सेवा विस्तार देने का पत्र भेजने के मामले में डॉक्टर आशीष गोयल पर गंभीर आरोप लगाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसा लगता है कि पॉवर कारपोरेशन का अध्यक्ष रहते हुए डॉक्टर आशीष गोयल ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम कर रहे हैं और निजी घरानों का हित देख रहे हैं। संघर्ष समिति ने सवाल किया कि आखिर डॉक्टर आशीष गोयल एक व्यक्ति विशेष को बार-बार सेवा विस्तार देने के लिए क्यों लालायित हैं । कहीं यह सब निजी घरानों से मिली भगत का परिणाम तो नहीं है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि यह पता चला है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने शासन को एक पत्र भेज कर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग का कार्यकाल छह माह और बढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया है।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा श्री निधि नारंग के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल के 14 जुलाई के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह पता चला है कि श्री निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है और श्री निधि नारंग निजीकरण हेतु बनाई गई टेंडर मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष है। अतः उनका कार्यकाल 06 महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए जिससे निजीकरण की प्रक्रिया सुगमता से पूरी हो सके।
संघर्ष समिति ने नव नियुक्त मुख्य सचिव श्री शशि प्रकाश गोयल को प्रेषित पत्र में कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया में निदेशक वित्त श्री निधि नारंग की भूमिका प्रारंभ से ही बहुत विवादास्पद रही है।
संघर्ष समिति ने पत्र में लिखा है कि श्री निधि नारंग की निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया में हितों के टकराव का प्राविधान हटवाने में बड़ी भूमिका रही है। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को झूठा शपथ पत्र देने के मामले में भी श्री निधि नारंग ने ही क्लीन चिट दी है।
संघर्ष समिति ने लिखा है कि निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की निदेशक वित्त श्री निधि नारंग से बहुत व्यक्तिगत निकटता है। यह आम चर्चा रही है कि ग्रांट थॉर्टन के लोग अधिकांश समय श्री निधि नारंग के कमरे में ही बैठकर काम करते थे और श्री निधि नारंग उन्हें गोपनीय पत्रावली भी दिखते थे।
संघर्ष समिति ने कहा कि श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार देने का पत्र भेज कर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल घोटाले के केंद्र बिंदु में आ गए हैं। निधि नारंग को निजीकरण के नाम पर पहले ही दो बार आशीष गोयल की अनुशंसा पर सेवा विस्तार दिया जा चुका है। अब एक बार फिर निजीकरण के नाम पर श्री निधि नारंग को छह माह का सेवा विस्तार देना सर्वथा अनुपयुक्त होगा। विशेषतया तब जब श्री निधि नारंग की कॉर्पोरेट घरानों के साथ निकटता जग जाहिर है और ट्रांजैक्शन कंसलटेंट, कॉर्पोरेट घराने, निधि नारंग और डॉ आशीष गोयल की निजीकरण की प्रक्रिया में मिली भगत है।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए श्री निधि नारंग को किसी भी कीमत पर सेवा विस्तार न दिया जाय।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए।
जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण।
लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।
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ये हमारा हिन्दुस्तान है...अमेरिका नहीं..अभी भी समय है..सोच समझ कर निर्णय लेना ही जनहितकारी होगा..कहीं बेपटरी ना हो जाए..बिजली व्यवस्था..😳..@aksharmaBharat ..जैसा अन्य शहरों में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्थाओं से हो रही अव्यवस्थाओं की चल रही खबरें हैं..कहीं लखनऊ वासियों को ही संकट ग्रस्त ना बना डाले..करंट विभाग..@EMofficeUP
..तो क्या ऐसे ही..उपभोक्ताओं पर किए जा रहे...इस नए महा प्रयोग "वर्टिकल" व्यवस्था से..राजधानी लखनऊ में भी..चरमरा जाएगी करंट व्यवस्था..🤔..@UPPCLLKO
क्योंकि करंट विभाग का नया महा प्रयोग..आम जनता को एक माह में ही लगने लगा..बोझ..🙄..@MVVNLHQ
नई व्यवस्था के अंतर्गत एक ही एक्सईएन पूरे डिविजन की 11 केवी और एलटी लाइनों के फाल्ट की जिम्मेदारी संभालेगा..एसडीओ और जेई को शहर के अलग-अलग सब स्टेशन दिए गए हैं..ऐसे में समय से फाल्ट नहीं बन पा रहे..बरेली शहर में चार डिवीजन के अधिशासी अभियंताओं के साथ एसडीओ, जेई और कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को देखते थे..अब नई व्यवस्था के तहत शहर के चारों खंडों का अलग-अलग काम एक ही एक्सईएन को दे दिया गया है।
नई व्यवस्था में एक्सईएन 33 केवी, एक्सईएन 11 केवी और एलटी लाइन, एक्सईएन बिलिंग, एक्सईएन राजस्व और एक्सईएन शिकायत निस्तारण को अलग अलग जिम्मेदारी दी गई हैं।
तो क्या..बिजली व्यवधान की जानकारी/पूछताछ हेतु बिजली घरों में उपभोक्ताओं को जानकारी तक ना मिलेगी..🙄..शिकायत किसको करेगा? निस्तारण की जिम्मेदारी एक ही एक्सईएन सुनेगा/समझेगा/निस्तारण करेगा..🤔..वर्टिकल व्यवस्था का चार्ट देख कर समझने में ही आ रहा..चक्कर..फॉल्ट के बाद तो ..किसी की ना रहेगी जिम्मेदारी..उपभोक्ता बन ही जाएगा.. घन चक्कर..😷
संज्ञानार्थ @myogiadityanath@CMOfficeUP@mduppcl@MVVNLmd
विद्युत नियामक आयोग पर निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन का दबाव: संघर्ष समिति ने नियामक आयोग पर मौन प्रदर्शन कर विरोध दर्ज किया और ज्ञापन दिया: उत्पीड़न और लेने देन के आरोप के घेरे में आए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में वाराणसी में सत्याग्रह जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने नियामक आयोग पर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि निजी घरानों के दबाव में निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग से अभिमत लेने की तैयारी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
उधर बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से किए गए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर एवं लेनदेन की बात वायरल होने के विरोध में आज वाराणसी में बिजली कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संगठन समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग को तत्काल अभिमत देने के लिए निजी घरानों और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन दबाव डाला जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि संभावना बताई जा रही है कि निजी घरानों के दबाव में विद्युत नियामक आयोग किसी भी समय अपना अभिमत पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को दे सकता है।
इसके विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर मौन प्रदर्शन किया। बिजली कर्मी अपने हाथ में तख्तियां लिए हुए थे जिसमें लिखा था कि "कारपोरेट के दबाव में निजीकरण स्वीकार्य नहीं स्वीकार्य नहीं।"
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल निगम के निजीकरण हेतु इतना उतावला हो गया है कि पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष निदेशक वित्त निधि नारंग के साथ मिलकर अधिकारियों पर गलत संस्तुति पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डलवा रहे हैं। यह जानकारी मिली है इसी दबाव के चलते पावर कारपोरेशन के डायरेक्टर फंड सचिन गोयल ने त्यागपत्र दे दिया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में निजीकरण से उपभोक्ताओं को और किसानों को होने वाले नुकसान की तो चर्चा होगी ही साथ ही निजीकरण के पीछे होने वाले मेगा घोटाले का भी पर्दाफाश किया जाएगा।
उधर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की दृष्टि से बड़े पैमाने पर हजारों की संख्या में किए गए स्थानांतरण आदेशों के विरोध में आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा मंत्री की बातचीत का ऑडियो वायरल होने के साथ ही ट्रांसफर आदेशों में लेनदेन की बात भी सामने आ गई है। ट्रांसफर घोटाले के विरोध में आज सैकड़ो बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया। बिजली कर्मचारियों के गुस्से से घबराए हुए प्रबंध निदेशक ने मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। सैकड़ो बिजली कर्मी मुख्य द्वार पर ही बैठ गए हैं।
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सप्ताहांत में संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री और प्रबंधन से पूछे पांच नये सवाल: 22 जून की बिजली महा पंचायत में बिजली कर्मियों के परिवार भी सम्मिलित होंगे: अवकाश के दिन आवासीय कालोनियों में सभाओं का दौर:
निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संघर्ष समिति ने सप्ताहांत में निजीकरण को लेकर ऊर्जा मंत्री और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से पांच नए सवाल पूछे हैं। 22 जून को लखनऊ में हो रही बिजली महापंचायत में बिजली कर्मियों के साथ उनके परिवार माता, पिता, पत्नी और बच्चे भी सम्मिलित होंगे।
घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। पहला प्रश्न है - क्या यह सच है कि वर्ष 2024 - 25 में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने कई निजी घरानों के उत्पादन घरों से एक भी यूनिट बिजली नहीं खरीदी और इन निजी घरानों को फिक्स कॉस्ट के एवज में 6761 करोड रुपए का भुगतान किया है ? यदि यह सच है तो इतने बड़े घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
सरकारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन निगम से 04 रुपए 26 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलती है और जल विद्युत की बिजली मात्र 01रुपए प्रति यूनिट की दर पर मिलती है। सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम में नए बिजली घरों की स्थापना नहीं की ।इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर निजी घरानों से काफी महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है । दूसरा प्रश्न है- क्या यह सच है कि के एस के महानंदी से 11 रुपए 58 पैसे प्रति यूनिट, बजाज के छोटे बिजली घरों से 10 रुपए प्रति यूनिट, ललितपुर से 06.50 रुपए प्रति यूनिट,रोजा से 06.05 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है ? यदि यह सच है तो इससे होने वाले हजारों करोड़ रुपए के घाटे की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप कर निजीकरण क्यों किया जा रहा है ?
ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि सरकार ने पाया है कि निजी कंपनियों के पास समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर तकनीक और प्रबंध कौशल है। दिल्ली में रिलायंस बीएसईएस की दो कंपनियां बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर पिछले 23 वर्ष से काम कर रही है। 23 वर्ष काम करने के बाद रिलायंस की इन दोनों कंपनियों का बेहतर प्रबंधन कौशल यह है कि इन कंपनियों पर दिल्ली जैसे छोटे राज्य में 25000 करोड रुपए से ज्यादा का दिल्ली की पावर यूटिलिटीज का बकाया हो गया है। दिल्ली ट्रांस्को का 10000 करोड रुपए का बकाया है, प्रगति पावर जनरेशन लिमिटेड का 5600 करोड रुपए का बकाया है और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी का 5000 करोड रुपए का बकाया है। तीसरा प्रश्न है - क्या यह सच है कि दिल्ली की भाजपा सरकार निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए बीएसईएस यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर का लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करने जा रही है ? यदि यह सच है तो भारत की राजधानी में निजी क्षेत्र की इतनी बड़ी विफलता को देखते हुए भी उत्तर प्रदेश के बेहद गरीब 42 जनपदों पर निजीकरण क्यों थोपा जा रहा है ?
ग्रेटर नोएडा का निजीकरण 1993 में किया गया था। ग्रेटर नोएडा एक औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा में बिजली का लगभग 84% भार औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का है जिनसे मुनाफा मिलता है। ग्रेटर नोएडा में कार्य कर रही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का घाटे वाले क्षेत्र मसलन किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं के प्रति बिजली आपूर्ति का व्यवहार अच्छा नहीं है। चौथा प्रश्न है - क्या यह सच है कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोएडा में नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कराने का मुकदमा लड़ रही है ? यदि यह सच है तो जो निजीकरण औद्योगिक और वाणिज्य क्षेत्र में विफल हो गया है उसे पूर्वांचल और बुंदेलखंड की बेहद गरीब जनता पर क्यों थोपा जा रहा है ?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कई निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीद रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लेने के बाद यह पता चला है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सबसे सस्ते बिजली क्रय करार आवंटित किए गए हैं । पांचवा प्रश्न है - यदि यह सच है तो निजीकरण के ठीक पहले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की सबसे सस्ते पावर परचेज एग्रीमेंट आवंटित करना क्या प्रस्तावित निजीकरण के बाद निजी घरानों की परोक्ष रूप से मदद करना नहीं है ?
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