मारे जाएँगे / राजेश जोशी 🌻
जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे
मारे जाएँगे
कटघरे में खड़े कर दिये जाएँगे, जो विरोध में बोलेंगे
जो सच-सच बोलेंगे, मारे जाएँगे
बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि किसी की क़मीज़ हो
'उनकी' क़मीज़ से ज़्यादा सफ़ेद
क़मीज़ पर जिनके दाग़ नहीं होंगे, मारे जाएँगे
धकेल दिए जाएँगे कला की दुनिया से बाहर, जो चारण नहीं
जो गुन नहीं गाएँगे, मारे जाएँगे
धर्म की ध्वजा उठाए जो नहीं जाएँगे जुलूस में
गोलियाँ भून डालेंगी उन्हें, काफ़िर क़रार दिए जाएँगे
सबसे बड़ा अपराध है इस समय
निहत्थे और निरपराध होना
जो अपराधी नहीं होंगे
मारे जाएँगे।
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गिरी हुई है सोच बहुत ही,
गिरा हुआ है उनका कद,
सत्ता के मद में बौरा कर,
पार कर रहे अपनी हद,
फ़िर भी होगी जीत हमारी, सुन शासक,
जंग हमारी रहेगी जारी, सुन शासक,
तानाशाही चरम यहाँ पर,
अहम का पर्दा छाया है,
सत्ता के अंधे बंदे में,
डर का पूरा साया है,
फ़िर भी नहीं है हिम्मत हारी,सुन शासक,
जंग हमारी रहेगी जारी, सुन शासक,
लीक हुआ है सिस्टम सारा,
वीक है पूरा तंत्र तुम्हारा,
अपने मन की बात सुनाकर,
बेच रहा है देश हमारा,
नहीं चाहिए ये लाचारी, सुन शासक,
जंग हमारी रहेगी जारी, सुन शासक,
बेच दिया जंगल,जमीन सब,
बेच दिया अपना जमीर अब,
नाकाबिल शासक पर लानत,
जुल्म करोगे ऐसे कब तक,
पाकर हुए सत्ता अंहकारी,सुन शासक,
जंग हमारी रहेगी जारी, सुन शासक,
- डॉ. शिवांकित तिवारी ‘शिवा’
@SHIVANKITVOICE
ये चादर सुख की मौला क्यूँ सदा छोटी बनाता है?
सिरा कोई भी थामो, दूसरा ख़ुद छूट जाता है
तुम्हारे साथ था तो मैं ज़माने भर में रुसवा था
मगर अब तुम नहीं हो तो ज़माना साथ गाता है
- कुमार विश्वास
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जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे
मारे जाएँगे
कटघरे में खड़े कर दिए जाएँगे,
जो विरोध में बोलेंगे
जो सच-सच बोलेंगे, मारे जाएँगे
सबसे बड़ा अपराध है इस समय
निहत्थे और निरपराध होना
जो अपराधी नहीं होंगे मारे जाएँगे।
— राजेश जोशी
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जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है
उन का हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है
चाँद तारे मिरे क़दमों में बिछे जाते हैं
ये बुज़ुर्गों की दुआओं का असर लगता है
माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नहीं होता है तो डर लगता है
- अंजुम रहबर
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स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे
- गोपालदास 'नीरज'