त्यागी कौन है?
किसी भी देहदारी प्राणी के लिये,अपने नियत कर्म का परित्याग करना सम्भव नही हैं।
परन्तु जो मनुष्य अपने कर्मो के फल का परित्याग करता है।
वह वास्तव में त्यागी है।
जो अपने कर्म के फल का त्याग नही करता है।
उसे मुत्यु के बाद,अपने द्वारा किये गये कर्म का फल भुगतना पड़ता है।
मैं इस ब्रह्माण्ड का पिता और माता हूँ।
समस्त कर्मों का फल देने वाला,पूर्वज और समस्त ज्ञान का विषय मैं हूँ।
पवित्र करने वाला ॐ,ऋग्,साम
और यजुर्वेद ये सभी निश्चित रूप से मैं ही हूँ।
क्रतु मैं हूँ,यज्ञ मैं हूँ,मंत्र मैं हूँ,घृत मैं हूँ।
अग्नि मैं हूँ और हवन रूप क्रिया भी मैं ही हूँ।
मैं ही वैदिक कर्मकांड हूँ।
मैं ही यज्ञ हूँ।
पितरों को अर्पित मैं ही हूं।
मैं औषधीय जड़ी बूटी हूँ।
मैं वैदिक मंत्र हूँ।
मैं ही घी,अग्नि और अर्पण की क्रिया हूँ।
इस ब्रह्मांड का माता और पिता मै हूँ।
पालनकर्ता भी मैं हूँ।
मैं शोधक,ज्ञान का लक्ष्य,पवित्र शब्दांश ॐ हूँ।
चारो वेद हूँ।
मैं दमन करने वालों का "दंड" अर्थात् दमन करने की "शक्ति" हूँ।
जीतने की इच्छा वालों की "नीति" हूँ।
गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक "मौन" हूँ।
ज्ञानवानों का "तत्त्वज्ञान" मैं ही हूँ।
सब भूतों के हृदय में स्थित सबकी "आत्मा" मै हूँ।
संपूर्ण भूतों का,आदि एवं मध्य और अंत भी मैं ही हूँ।
मैं कर्म के अच्छे बुरे प्रभाव से परे हूँ।
न कर्म मुझे दूषित कर सकते हैं।
न मुझे किसी कर्मफल की कोई कामना है।
जो मेरे इस सत्य को जानता है।
वह कभी कर्म के बंधन में नही पड़ता है।
जो जिस भाव से मेरी शरण मे आता है।
मैं उसे उसी भाव के अनुरूप फल देता हूँ।
🌷🥀🌹|| हरि ॐ तत् सत् ||🌹🥀🌷
🥀🌷🌹|| श्रीकृष्ण वाणी ||🥀🌷🌹
मैं इस ब्रह्मांड का पिता और माता हूँ।
मैं सभी कार्यों के फल का सबसे अच्छा,सबसे आगे और सभी ज्ञान की वस्तु हूँ।
मैं शुद्ध करने वाला प्रतिनिधि "ॐ" हूँ।
ऋग्वेद,सामवेद,अथवर्वेद और यजुर्वेद निश्चित रूप से मैं ही हूं।
🌷🌹🥀|| हरि ॐ तत् सत् ||🌷🌹🥀
सूर्य का तेज,जो पूरे ब्रह्मांड को प्रकाशित करता है।
वह मुझसे ही निकलता है।
चन्द्रमा तथा अग्नि के तेज भी मुझसे उत्पन्न होता हैं।
मैं प्रत्येक लोक में उपस्थित हूँ।
मेरी शक्ति से सारे लोक अपनी कक्षा में रहते हैं।
मैं चन्द्रमा के रूप में समस्त वनस्पतियों को जीवन-रस प्रदान करता हूँ।
🌺🌼🔱🐚|| शुभ माँ मातंगी जयंति ||🐚🔱🌺🌼
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फ़ट् स्वः।
ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग फ़ट् स्वः।
🌺🌹🌷🔱🐚|| भगवान मातंग और माता मातंगी की कृपा से आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण हो। ||🐚🔱🌷🌺🌹🥀
मैं अपनी दिव्य योगमाया ऊर्जा से वशीभूत होकर सबके सामने प्रकट नहीं होता।
इसलिये अज्ञानी मूर्ख लोग नहीं जानते कि,मैं अजन्मा और अविनाशी हूँ।
मैं भूत,वर्तमान और भविष्य को जानता हूँ।
मैं सभी जीवित प्राणियों,समस्त समुदाय को भी जानता हूँ।
लेकिन मुझे कोई नहीं जानता है।
||हरि ॐ तत् सत् ||
मैं दमन करने वालों का "दंड" अर्थात् दमन करने की "शक्ति" हूँ।
जीतने की इच्छा वालों की "नीति" हूँ।
गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक "मौन" हूँ।
ज्ञानवानों का "तत्त्वज्ञान" मैं ही हूँ।
सब भूतों के हृदय में स्थित सबकी "आत्मा" मै हूँ।
संपूर्ण भूतों का,आदि एवं मध्य और अंत भी मैं ही हूँ।