An Interesting ARREST from Kerala !!
“If you publicly draw attention to a vegetarian restaurant named 'Aryas' that has a Ganesha idol at the reception counter and reveal that it is actually owned by Abdurahiman, you could face arrest”
A YouTuber named VK Baiju, who operates the channel News Cafe Live and hails from Malappuram, was arrested by the Kerala police.
After Abdurahiman filed a complaint, the Kerala Police apprehended Baiju under IPC section 153A for allegedly "spreading disharmony or inciting enmity, hatred, or ill-will between different religious groups."
If I expose a person who deceives members of other communities by placing an idol of Lord Ganesha in the reception counter and using a Hindu name for their restaurant, am I guilty?
How did IPC 153 come into play in this situation?
Is Abdurahiman, who deceived people by using a Hindu name for the restaurant and placing a Ganesha idol, not automatically considered guilty?
This kind of religious appeasement is happening in Kerala for vote bank purposes!
#kerala #keralanews #keralastory #keralaPolice #No1kerala
Hailakandi, Assam: Yesterday, Muslim youths abducted and gangraped two minor Hindu girls (14 and 16) while they were returning from school.
They were dragged into Roskandi garden, raped brutally. One of the minor Hindu girl has died.
Family members alleged that a total of 5 to 6 youths were involved in this brutal rape.
Two accused - Jabir Ahmed Barbhuiya and Ansar Uddin Mazumder arrested by Police.
One more accused Jubair Ahmed Talukdar is absconding and wanted.
https://t.co/kz9wlC5tk4
गोतिया @ajitanjum आप मानसिक रूप से विकृत व्यक्तित्व के हैं, ऐसा दाहिने साइड वाले रंगीन अजीत अंजुम का मानना है। सामान्य भाषा में इसे दोगलापन भी कहा जाता है, पर आपको कहूँगा तो आप ये कह देंगे कि मेरे किसी अंगोछे का रंग भगवा है। इसकी चिकित्सा उपलब्ध है।
When MusIims settle in an area :
Can Hindus raise religious slogans?
-No it hurts their sentiments
Can Hs do Hawan-Puja?
-No it hurts their sentiments
Can Ms do 5 time Namaz using loudspeakers?
-Ofcourse, it's their right
Can Ms sIaughter animals?
-Ofcourse, it's their right
After this incident I stopped treating patients from that particular religion.
I don't know i did right or wrong but for me safety of my family comes first.
बैठ जा LKFC! कल को कोई सूअर या गाय ले कर उसी लिफ्ट से गया तो तुरंत तुम्हें ‘इस्लामोफोबिया’ याद आ जाएगा।
सोसायटी है, बुआ का बगीचा नहीं कि बकरी टहला रहे हो। वो बकरी काट भी देते तो तुम कहते कि अपने बाथरूम में ही काटा। बात वही है कि लोगों को बकरी के बलात्कार के भी समाचार सुनने को मिलते हैं। इसलिए वो सचेत हैं।
तुम स्क्रीनशॉट ले कर खेलते रहो। ये तो बताओ @zoo_bear कि वो जो वीडियो डाला था कटा हुआ, उसके लिए टीवी स्टूडियो को मेल किया था पूरे वीडियो के लिए? छः हिन्दुओं की हत्या हुई थी उसके बाद! याद है? आज साल हो गए उस घटना के।
याद है 2022 का 28 जून जब मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट दिया था कन्हैया लाल का गला, साल भर बाद भी नंगे पैर न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है बेटा
#KanhaiyaLal
https://t.co/Z51U32EMAv
ये अशोक कुमार पाण्डेय है. चर्चित लेखक और कवि. कहानियों के भी संग्रह छपे हैं. कश्मीर के इतिहास पर "शोधवृत्ति" के चलते काफ़ी मशहूर हुए.
एक इतिहासकार के रूप में हम इनसे यही अपेक्षा करेंगे कि वो समय को नीर-क्षीर दृष्टि से देखें और सम्यक वस्तुस्थिति रखें. किन्तु अशोक पाण्डेय के विचार एक ही महत्व के विषय पर दो तरह के नज़र आऍंगे. ऐसा एक बार नहीं अनेक बार. यह किसी चूक या भूल की परिणति नहीं बल्कि ये अत्यंत सूझबूझ और अपनी जानकारी में ऐसा करते हैं.
पाण्डेय को पर्यावरण की बड़ी चिंता रहती है. सुंदर बात है. जब दीवाली का त्योहार आता है तो अशोक पाण्डेय पर्यावरण के प्रति इतने चिंतित हो जाते हैं कि पूछो मत. पटाखे न जलाने की हिदायत देते हैं. और धर्म-ध्वजा के वाहकों को कोसते हैं और पटाखों से उपजी घुटन को महसूस करते हैं. जबकि यहीं नहीं रुकते, गधा कहते हुए यह भी ताना मारते हैं कि दिखाओ वो हिंदू-शास्त्र? कहां है पटाखों का ज़िक्र? और फिर यह भी कहते हैं कि तुम धार्मिक नहीं गधे हो.
अशोक पाण्डेय को पर्यावरण की कितनी चिंता है. कोई भी पर्यावरण प्रेमी इस बात से मुतमईन होगा ही कि दीवाली के दिन अनावश्यक पटाखे जलाना और अति-हुड़दंग किस काम की? मैं तो सहमत हूॅं कि ‘ग्रीन-दीवाली’ की ओर बढ़ना चाहिए. यह न केवल हमारे स्वयं के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है बल्कि पर्यावरण के लिए शुभ है. मैं श्री अशोक जी की चिंता और उनके दुख में सहभागी हूॅं. ऐसे पर्यावरण-प्रिय व्यक्ति का कौन साथ नहीं देगा?
लेकिन अशोक पाण्डेय का दोहरा चरित्र तब निष्कवच हो जाता है जब पशु-वध और माॅंसाहार पर सवाल किया जाता है या उस संदर्भ में इनकी राय परखी जाती है. स्क्रीनशॉट्स में देखिए कि कवि-हृदय श्री अशोक जी माॅंस छुपकर नहीं खाते बल्कि सोशल मीडिया पर माॅंसभक्षण की तस्वीरें भी लगाते हैं. बकरीद या होली के ही दिन या हर वर्ष नहीं, बल्कि हर हफ़्ते इनकी थाली में कई बार मीट सजता है. इस बात को गौरवबोध से स्वीकारते हैं. अपराधबोध, विनित भाव या आत्मग्लानि बरामद नहीं होती.
पशु-वध करुणा, नैतिकता, न्याय और संवेदना जैसे मूल्यों के आधार पर तो बुरा है ही किंतु पर्यावरण की दृष्टि से भी बुरा है. क्लाइमेट-चैंज और ग्लोबल-वार्मिंग माॅंसाहार से बड़े स्तर पर प्रभावित होते हैं. यह हव्वाबाज़ी नहीं किंतु वैज्ञानिक-शोधों से पुष्ट तथ्य है. मॉंसाहार शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. किन्तु श्री अशोक जी मॉंसाहार के जबरदस्त समर्थक हैं. बकरीद के मौक़े पर कोई ‘गधा’ इन्हें नहीं मिलता जिससे ये पूछ सके कि बकरीद के दिन कुर्बानी करना किस धर्मशास्त्र में लिखा है?
पटाखे बुरे हैं. किन्तु जीवहत्या की तुलना में क्रूर और दर्दनाक नहीं. बकरीद के दिन करोड़ों जानवरों की बलि दी जाती है. न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में. अशोक पाण्डेय की चिंता में पर्यावरण शुमार नहीं होता. इस दोहरे चरित्र की ग्रंथी कहॉं है, मुझे समझ नहीं आई. दिन की रौशनी की तरह साफ़ है कि अशोक कुमार पाण्डेय कितनी बेईमानी कर रहे हैं.
पटाखों की आवाज़ और उनसे निकले धूॅंए से इनका दम घुटता है. किन्तु एक अबोल, निरीह जीव की गर्दन पर चलती छूरी से निकली आह इनके कानों को भेदती नहीं और करोड़ों जीवों के बहते ख़ून के गंध से सांस घुटता नहीं.
नीचे, तमाम स्क्रीनशॉट्स दे रहा हूॅं. स्वयं मूल्यांकन कीजिए. केवल अशोक पाण्डेय ही इस तरह के व्यक्ति नहीं है, अनेक हैं. यूॅं कहूॅं कि पशुवध के संदर्भ में मनुष्य एकमत है कि पशुओं की हत्या ही न्यायसंगत है.