“कृष्ण की पुकार है,
ये भागवत का सार है,
कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है !
कौरवों की भीड़ हो,
या पांडवों का नीड़ हो,
जो लड़ सका है वो ही तो महान है!!
जीत की हवस नहीं,
किसी पे कोई वश नहीं!!
क्या ज़िन्दगी है ठोकरों पे मार दो!!
मौत अंत है नहीं तो,
मौत से भी क्यूँ डरें,