गाड़ी मालिक ने गाड़ी की टंकी फुल कराने को कहा,
क्षमता 70 लीटर थी लेकिन 77 लीटर डाला गया, जांच करने पर वह 57 लीटर ही निकला।
भारत एक ठगों देश बन चुका है, ऐसे ही नहीं सक्षम लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं।
पटना- NEET स्टूडेंट के कातिल कौन, CBI बोली- सबूत नहीं?: छात्रा के कपड़े पर स्पर्म किसका, बॉडी किसने नोची? कैसे पटना पुलिस और CBI ने NEET स्टूडेंट के मौत को शिल्पी-गौतम हत्याकांड की याद दिला दी; जानेंगे 'बूझे की नाही' में
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राज्यसभा की बात करनेवाले उप्र के मुख्यमंत्री जी में अगर रत्ती भर भी लाज-शर्म-हया हो तो भाजपा द्वारा बनाए गए सिक्किम के विवादित ‘राज्यपाल’ के बारे में बोलें।
उत्तराखण्ड की बेटी के प्रति उप्र के मुख्यमंत्री जी का भी तो कोई दायित्व बनता है या नहीं। उत्तराखण्ड छोड़ आए तो क्या नैतिकता भी छोड़ आए हैं।
देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी की आवाज़ किसी बच्ची के साथ हुए पाप के ख़िलाफ़ निकलती है या भयभीत होकर उनकी घिग्घी बंध जाती है। हमारी उनसे अपील है कि यदि उनमें अंश मात्र भी धर्म है तो वो एक आरोपी को राज्यपाल बनाने के फ़ैसले का घोर विरोध करें। ये उनको सीधी चुनौती है, नहीं तो वो सदैव के लिए मौन धारण कर लें। फिर तो यही माना जाएगा कि इसमें उनकी ख़ामोश सहमति भी शामिल है।
दिल्ली का ड्रोन-दूरबीन तो सिक्किम तक नहीं देख पा रहा है देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी का बुलडोज़र वहाँ तक पहुँचाता है या नहीं।
आज पूरे देश की हर बेटी और उनके माँ-बाप भाजपा के इस फ़ैसले से बेहद आक्रोशित हैं कि भाजपा ने घोर निंदनीय निर्णय लेते हुए अपने दल के एक ऐसे व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाया है जिसके घिनौने कुकृत्यों की वजह से एक बच्ची के साथ अन्याय हुआ और उसकी हत्या भी कर दी गई।
भाजपा बेशर्म अपराधियों का गिरोह है।
उत्तराखण्ड की बेटी के साथ न्याय हो!
अंकिता भंडारी केस में बीजेपी लीडर विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य को उम्र क़ैद की सजा हुई।
जांच के दौरान दो व्यक्तियों के फ़ोन कभी नहीं मिले।
1. पुलकित आर्य
2. अंकिता भंडारी
अंकिता भंडारी की डुप्लीकेट सिम बनवा कर पुलिस ने साल भर की कॉल डिटेल, वॉट्सएप मेसेज निकलवा लिए।
लेकिन पुलकित आर्य के मामले में ऐसा नहीं किया गया!
क्यों?
क्योंकि पुलकित आर्य की कॉल डिटेल्स और मेसेज से पता चल जाता कि कौन कौन VIP इसमें शामिल था।
ये भी पता चल जाता कि क्या मामला सिर्फ अंकिता के शोषण का था या और भी युवतियों को मजबूर किया जाता था।
इसीलिए उत्तराखंड में इस मामले में रोष है।
इसीलिए अंकिता के माता पिता आंदोलित हैं।
पुलिस ने तो VIP के नाम उजागर नहीं किए। लेकिन जब बीजेपी के अपने नेताओं ने पिछले साल दुष्यंत गौतम का नाम उजागर कर दिया, तो पूरे उत्तराखंड में जनता सड़कों पर उतर आई।
तब जनवरी 2026 में CBI जांच की घोषणा की गई।
लेकिन दस महीने हो गए, जांच आगे नहीं बढ़ी।
अंकिता के पिता को पहली बार CBI ने पिछले हफ़्ते 9 अक्टूबर को संपर्क किया!
और फिर 12 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बना कर जाँच के दायरे से बाहर कर दिया। राज्यपाल को संवैधानिक immunity होती है। कोई CBI या SIT उनसे पूछताछ नहीं कर सकती है।
राज्यपाल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और IB ने दुष्यंत गौतम को चुपचाप क्लीन चिट भी दे दी!
ऐसा क्यों किया, यही सवाल अंकिता के माता पिता राष्ट्रपति जी पूछना चाहते हैं।
राष्ट्रपति महोदया,
19 साल की अंकिता भंडारी ने एक VIP के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई। चार साल बाद भी CBI की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो VIP कौन था।
अंकिता के परिवार समेत कई लोग मानते हैं कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति से मैं स्तब्ध हूं। राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि महिलाओं की सुरक्षा की उन्हें बिल्कुल परवाह ही नहीं है।
मैं आपसे अपील करता हूं कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न देने की सलाह दें।
अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए।
आरएसएस ने किये दीक्षाभूमि पर कब्ज़ा; किये ताले बंद. मैं बौद्धों को पूरी छूट देता हूँ आरएसएस को इस अपमान का जवाब देने का!
कल रात नागपुर में धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की पूर्वसंध्या पर जब हज़ारों बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि दीक्षाभूमि के गेट पर ताले लगे हुए थे!
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि RSS ने दीक्षाभूमि स्मारक समिति पर कब्ज़ा कर लिया है और उनका पिट्ठू उनके इशारों पर काम कर रहा है।
14 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने दीक्षाभूमि पर अपने लाखों अनुयायियों के साथ धम्म अपनाया था। कल रात जो हुआ, वह RSS की एक सोची-समझी साज़िश थी, जिसका मकसद धम्म चक्र परिवर्तन दिवस की पूर्व संध्या पर न सिर्फ़ बाबासाहेब बल्कि बौद्ध धर्म का भी अपमान करना था।
इससे पहले भी RSS के कब्ज़े वाली समिति ने पार्किंग की व्यवस्था के बहाने दीक्षाभूमि की ज़मीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की थी। तब वंचित बहुजन आघाड़ी ने नागपुर को झकझोर कर रख दिया था।
कल हमारे नागपुर शहर अध्यक्ष मंगेश वानखेड़े ने भंतेगण के साथ दीक्षाभूमि पर ताला होने की वजह से वहाँ बाहर से ही बाबासाहेब को अभिवादन किया और वंदना की।
कल की घटनाएँ केवल महाराष्ट्र के बौद्धों का ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के बौद्ध समाज का अपमान था।
मैं देशभर के सभी बौद्धों से कहता हूँ कि वे बाबासाहेब और बौद्ध धर्म का अपमान करने के लिए RSS को सबक सिखाएँ। आपको पूरी छूट है।।
जय भीम। नमो बुद्धाय।
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ये है फिरोज खान, पुलिस विभाग में ड्राइवर। लोकायुक्त इंदौर उज्जैन ने छापा मारा। संपत्ति मिली 29.75 करोड़। नौ वाहन मिले। 15 मकान, प्लॉट, जमीन मिली
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ट्रेन में ₹10 के चावल की बिरयानी ₹100 में: टेंडर किसी का, पेंट्री चला रहा कोई और; दावा- कंपनी को सिर्फ किराए से मतलब, चाय बेचें या शराब, किसी को परवाह नहीं; 5 साल में खराब खाने की 19,427 शिकायतें, पढ़ें पूरा भास्कर इन्वेस्टिगेशन...
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इंदौर का भागीरथपुरा याद है! देश के सबसे साफ शहर में गंदा पानी पीने से ३६ लोगों की मौत हुई थी,सरकार ने तत्काल एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को सस्पेंड किया था,८ महीने बाद इनाम देकर प्रमोशन-कलेक्टर बना दिया, कल तबादला सूची आई,कुछ दिन पहले न्यायिक आयोग ने भी लापरवाही की बात कही थी
अंकिता भंडारी के माता पिता इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे हैं . कुछ पुलिस वाले उन्हें समझा बुझाकर हटाने की कोशिश कर रहे हैं .
उनकी नाराजगी दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल बनाए जाने को लेकर है.