मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं।
लेकिन आश्चर्य एवं अफसोस की बात है कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
माननीय ऊर्जा मंत्री जी एवं ऊर्जा प्रबंधन के बीच आपसी लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश की जनता एवं बिजली कर्मचारियों का हो रहा है, इस समय पूरे ऊर्जा विभाग में बिजली कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है, बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न चरम पर है, ऊर्जा निगमों में तानाशाही का माहौल है, जिससे बिजली कर्मियों के अंदर ही अंदर गहरा रोष व्याप्त हो रहा है, और वह कभी भी फूट सकता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि व्यापक हस्तक्षेप करते हुए हुए तत्काल अग्रिम कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे अनवरत प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा सके तथा बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न भी रोका जा सके।
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2014 में आशा के जिस सूरज का उदय हुआ, वह आज नए आत्मविश्वास के प्रकाशपुंज में बदल चुका है। बीते 12 वर्षों में भारत के लोगों ने पहली बार यह देखा है कि जब सही नीयत से सरकार चलती है तो तेज गति से विकास भी होता है।
Every illuminated home, every running fan, and every powered workspace reflects the dedication of UPPCL's field teams. Working round the clock in challenging conditions, these power heroes ensure reliable electricity reaches consumers across the state.
#UPPCL#PowerHeroes #FieldHeroes #PoweringLives #DedicatedToServe
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Theft of electricity is most anti social and anti national act dragging our economy too . People involved in such types of activities should not be spared. Social activists are requested to come forward and act accordingly to eradicate this social evil.
⚡ बिजली चोरी एक दण्डनीय अपराध है ⚡
बिजली चोरी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ता है, राजस्व की हानि होती है तथा ईमानदार उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति प्रभावित होती है।
✅ वैध विद्युत कनेक्शन का उपयोग करें।
✅ बिजली चोरी की सूचना विभाग को दें।
✅ सुरक्षित एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति में अपना सहयोग प्रदान करें।
"बिजली चोरी रोकें, राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।" @myogioffice@aksharmaBharat@CMOfficeUP@MVVNLHQ@MVVNLmd@mduppcl@ChairmanUppcl@UPPCLLKO@ashish_for_u
क्या आपको पता है ? बिजली चोरी करने वाला सिर्फ विभाग को नहीं,बल्कि हर ईमानदार उपभोक्ता को नुकसान पहुँचाता है जो नियमित बिल जमा करता हैँ ! बिजली चोरी मजाक नहीं है! यदि आपके आसपास कोई बिजली चोरी कर रहा है तो अब बिना नाम बताए निम्न पोर्टल पर शिकायत करें! M
क्या आपको पता है ? बिजली चोरी करने वाला सिर्फ विभाग को नहीं,बल्कि हर ईमानदार उपभोक्ता को नुकसान पहुँचाता है जो नियमित बिल जमा करता हैँ ! बिजली चोरी मजाक नहीं है! यदि आपके आसपास कोई बिजली चोरी कर रहा है तो अब बिना नाम बताए निम्न पोर्टल पर शिकायत करें! M
ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद मनमाने ढंग से हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए - संघर्ष समिति : 2017 के निर्धारित मानकों के अनुरूप संविदा कर्मियों की संख्या बहाल करने की मांग:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा बिना कारण संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान निजीकरण की तैयारी और कथित "मैनपावर रेशनलाइजेशन" के नाम पर हटाए गए लगभग 25,000 संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 20 संविदा कर्मियों की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसी मानक के आधार पर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था वर्षों तक सुचारु रूप से संचालित होती रही।
संघर्ष समिति ने बताया कि अक्टूबर 2024 से इन निर्धारित मानकों के विपरीत बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाने का अभियान शुरू किया गया। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया की घोषणा की गई थी। संघर्ष समिति का आरोप है कि उसी के बाद निजीकरण की तैयारी के तहत संविदा कर्मियों की संख्या में कटौती प्रारंभ कर दी गई।
संघर्ष समिति ने बताया कि नए टेंडरों में निर्धारित मानकों को दरकिनार करते हुए शहरी क्षेत्रों में 36 संविदा कर्मियों के स्थान पर मात्र 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मियों के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों की व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है। राजधानी लखनऊ सहित जिन स्थानों पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया है वह शहरी क्षेत्र में संविदा कर्मियों की संख्या घटकर 7.5 कर दी गई है।इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अनुभवी संविदा कर्मियों, जिनमें अनेक ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो 20-25 वर्षों से विद्युत व्यवस्था के संचालन एवं रखरखाव में योगदान दे रहे थे, को सेवा से बाहर कर दिया गया है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में अनिवार्य रूप से हटाने का निर्णय भी पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। अनेक ऐसे संविदा कर्मी, जिन्होंने बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में अपने हाथ-पैर तक गंवा दिए, उन्हें भी सेवा से बाहर कर दिया गया। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि जब निगमों के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, तब संविदा कर्मियों को 55 वर्ष की आयु में हटाने का औचित्य क्या है?
संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान विद्युत आपूर्ति में बाधाओं और फॉल्ट की घटनाओं में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि समस्या यह है कि फॉल्टों को तत्काल ठीक करने वाले अनुभवी संविदा कर्मियों की संख्या लगातार घटा दी गई है। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की परेशानी झेलनी पड़ रही है और विद्युत कर्मचारियों पर भी कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब स्वयं ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना कारण किसी भी कर्मी को सेवा से न हटाया जाए, तब 2017 के निर्धारित मानकों के विपरीत किए गए टेंडरों की समीक्षा कर सभी हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही उपकेंद्रों एवं विद्युत वितरण व्यवस्था में आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाया जाना चाहिए।
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यूपी में बसेंगे तीन और शहर, जानिए क्या है सीएम योगी का नया प्लान
सीएम योगी ने यूपी में तीन और नए शहर बसाने का फैसला लिया है. आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहर विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. योगी कैबिनेट ने 225 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी दी है.
पूरी खबर: https://t.co/L9UlKL9Nws
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It seems that some people are involved in such types of activities to defame government or to create law and ordersituation.Therefore it is must to investigate their motto and act accordingly.
आज तक न्यूज़ चैनल पर प्रसारित खबर जनपद सहारनपुर के सुल्तानपुर नामक स्थान पर 96 घंटे से बिजली नहीं आ रही है का संज्ञान लेते हुए विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा खबर का परीक्षण करने पर खबर पूर्णतया असत्य/निराधार पाई गई। जनपद सहारनपुर के सुल्तानपुर नामक स्थान पर बिजली आपूर्ति सामान्य है जिसकी पुष्टि स्थानीय उपभोक्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई।
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टेंडर रिजेक्ट होने पर जब धीरूभाई अंबानी ने नितिन गड़करी से कहा, सरकार की क्या औकात है कि रोड बना सके?
साल था 1995। महाराष्ट्र की सरकार में युवा नितिन गडकरी को लोक निर्माण मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में देश का सबसे महत्वाकांक्षी मुम्बई पुणे एक्सप्रेस वे बनाने की कार्य योजना तैयार की गई।
उस समय धीरुभाई अंबानी महाराष्ट्र के सबसे बड़े उद्योगपति थे। शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे से उनकी नजदीकी सभी को पता थी। तो इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का टेंडर निकाला गया। धीरूभाई ने सबसे कम 3,600 करोड़ रुपये का टेंडर जमा किया। शिव सेना ने तय कर दिया था कि यह ठेका धीरूभाई को ही जायेगा।
लेकिन नितिन गडकरी ने एक जबरदस्त पेंच फँसा दिया। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में कह दिया कि सड़क 2,000 करोड़ रुपये से कम की लागत से पूरी होगी। लेकिन दिक्कत यह थी सबसे कम निविदा 3,600 करोड़ रुपये की थी। कैबिनेट में सहयोगियों ने कहा कि जिसका सबसे कम टेंडर होगा उसे काम मिलना चाहिए लेकिन गडकरी ने उपमुख्यमंत्री मुंडे को कहा कि 2,000 करोड़ रुपये तक के काम के लिए 3600 करोड़ रुपये बहुत अधिक हैं। निविदा खारिज कर देना चाहिए।
उस समय, धीरूभाई का मुम्बई में जबरदस्त दबदबा था। लेकिन गडकरी ने मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और मुंडे को मना लिया कि वे सस्ती सड़कों का निर्माण करेंगे। उस समय सरकार के पास उतना पैसा नहीं था। तो जोशी ने पूछा कि पैसा कहाँ से आएगा। गडकरी ने कहा कि "मेरे ऊपर विश्वास करें... मैं करता हूँ बंदोबस्त।"
मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने गडकरी की बात को मानते हुए टेंडर कैंसिल कर दिया। ये अम्बानी परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका था।
धीरुभाई के बालासाहेब ठाकरे और प्रमोद महाजन के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। धीरुभाई निविदा की अस्वीकृति से नाराज थे। उन्होंने नाराजगी भी जताई। प्रमोद महाजन ने नितिन गडकरी से कहा कि वे धीरूभाई से मिलें और समझें।
महाजन की बात गडकरी टाल नहीं सकते थे। नितिन गडकरी धीरूभाई से मिलने गए। अनिल, मुकेश और धीरूभाई तीनों के साथ गडकरी ने भोजन किया।
डिनर के बाद धीरूभाई ने नितिन से पूछा कि "सड़क कैसे बनानी है? यदि निविदा खारिज कर दी गयी है, तो अब यह कैसे होगा?"
गडकरी ने धीरूभाई से कहा कि "आप 2000 करोड़ में बनाते हैं तो ये टेंडर में आपको देता हूँ।"
इसके जवाब में धीरूभाई ने कहा कि "सरकार की क्या औकात है, आप क्या रोड बनाएंगे? ये आपके लिए संभव नहीं है। आप बेकार जिद कर रहे हैं।" उन्होंने आगे गडकरी से कहा "मैंने ऐसे कहने वाले बहुत लोगो को देखा है लेकिन कुछ नहीं होगा।" ऐसा कहकर धीरूभाई ने नितिन गडकरी को एक तरह से चुनौती दे दी।
नितिन गडकरी ने भी धीरूभाई की बात को दिल पे ले लिया और कहा कि "धीरूभाई, अगर मैं इस सड़क का निर्माण नहीं कर पाता हूँ, तो मैं अपनी मूँछें कटा दूँगा और अगर बना दिया तो आप क्या करोगे? यह आप सोच लेना।"
उनकी बैठक समाप्त हुई और नितिन अम्बानी को चैलेंज देकर चले आये।
अब सवाल यह था कि सड़क कैसे बनेगी और पैसा कहाँ से आएगा?
नितिन गडकरी ने अपने कौशल के बल पर उस समय राज्य में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की स्थापना की। पब्लिक और कंपनियों के माध्यम से पैसे जुटाए गए। मनोहर जोशी और गोपीनाथ मुंडे की मदद से और मुंगिरवार इंजीनियर की देखरेख में काम शुरू हुआ। नितिन गडकरी ने 2,000 करोड़ रुपये से कम में काम करके दिखा दिया। सब लोग गडकरी की प्रतिभा के कायल हो गए।
धीरूभाई के पास भी बात पहुँची। वे हेलीकॉप्टर से सड़क देखने निकले। एक्सप्रेस वे देख वे आश्चर्य चकित हो गए। उन्होंने तुरंत नितिन गडकरी को मिलने के लिए बुलाया। वे मेकर्स चैंबर में फिर से मिले। जब वे मिले, तो धीरूभाई ने कहा, "नितिन, मैं हार गया, तुम जीत गए। आपने सड़क बनाकर दिखा दी।"
धीरूभाई ने नितिन गडकरी से कहा कि "अगर देश में आप जैसे 4-5 लोग और हो जाएं, तो देश का भाग्य बदल जाएगा।"
सरकारी धन को बचाने के लिए धीरुभाई जैसे बड़े व्यक्ति के साथ पंगा लेने वाले नितिन गडकरी ने जिस चुनौती के साथ अपना काम किया, वह आज भी याद किया जाता है।
A very good initiative 👏 to achieve the goal of self reliant in energy sector.
Each and every roof tops of all residential and commercial buildings should be covered with solar panels.
आपकी अपनी छत बन रही ऊर्जा का घर,
परिवार हो रहा सशक्त और जीवन बन रहा आत्मनिर्भर!
PM सूर्य घर योजना के तहत 40 लाख से अधिक परिवार सोलर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। प्रधानमंत्री @NarendraModi जी के नेतृत्व में ये नया भारत सिर्फ बिजली नहीं बचा रहा, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की नई क्रांति भी लिख रहा है।
#40LakhsPMSuryaGhar
हम काफी समय पहले बांग्लादेश से भारत आए थे,
बांग्लादेश से आकर हमने वोटर कार्ड भी बनवा लिया था।
लेकिन अब बंगाल में सरकार बदल गयी है, वो हमें यहां रहने नहीं दे रही।
: बांग्लादेशी घुसपैठिया
Every one is requested to use electricity judiciously. Less consumption means more availability for others. Wastage of any resources is a crime against society and this lesson should be remembered by all of us.
Save electricity along with money & help in environmental issues
24-26 डिग्री पर रखें AC, दिन में लाइट रहें बंद... दिल्ली सरकार का 'बिजली बचाओ' आदेश
दिल्ली सरकार ने सभी विभागों को बिजली की बर्बादी रोकने और जरूरत के हिसाब से बिजली इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं. आदेश के तहत दिन में अनावश्यक लाइटें बंद रखने, प्राकृतिक रोशनी का उपयोग बढ़ाने और AC को 24-26 डिग्री सेल्सियस पर चलाने को कहा गया है. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत अपील के बाद लिया गया है.
पूरी खबर https://t.co/BT0v45tDYb
#DelhiGovernment #PowerSaving #ElectricitySaving
#DRDO के वैज्ञानिकों द्वारा एक और उपलब्धि की गयी, जो हेडलाइन में छूट गई। अब भारत एक विशिष्ट समूह का हिस्सा है, भारत सातवां ऐसा देश है जो गैलियम नाइट्राइड चिप टेक्नोलॉजी को उपलब्ध कर पाया। यह तकनीक आधुनिक लड़ाकू विमानों, उन्नत राडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) प्रणालियों की रीढ़ है।
AESA राडार: आधुनिक फाइटर जेट्स (जैसे राफेल, तेजस मार्क-2) में Active Electronically Scanned Array (AESA) राडार का उपयोग होता है। GaN चिप्स इन राडार की रेंज और टारगेट को ट्रैक करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली: दुश्मन के राडार को जाम करना हो या उनके सिग्नल्स को ब्लॉक करना हो, GaN तकनीक से लैस सिस्टम बहुत ज्यादा घातक और सटीक साबित होते हैं।
चिप (Semiconductor) निर्माण की तकनीक दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही है, और युद्ध या तनाव की स्थिति में कोई भी देश अपनी सबसे एडवांस तकनीक दूसरे को नहीं देता।
Elite Club में एंट्री: भारत का इस विशिष्ट क्लब में 7वां देश बनना यह सुनिश्चित करता है कि अब हमें इन क्रिटिकल कंपोनेंट्स के लिए किसी दूसरे देश की शर्तों या प्रतिबंधों के आगे झुकना नहीं पड़ेगा।
लागत में कमी: स्वदेशी तकनीक होने के कारण रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही रहेगा और आयात पर निर्भरता खत्म होगी।
ये चिप्स प्रासंगिक हैं क्योंकि इन्हें आधुनिक लड़ाकू विमानों में उन्नत राडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली में उपयोग किया जाता है। भारत की GaN #technology क्लब में प्रवेश आत्मनिर्भरता के बारे में है। यह #DRDO और वैज्ञानिक डॉ. मीना मिश्रा द्वारा संभव हुआ।
@DRDO_India@DefenceMinIndia
माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेशवासियों से ऊर्जा संरक्षण में सहभागिता निभाने का आह्वान करते हुए कहा है कि जितनी आवश्यकता हो, उतनी ही बिजली का उपयोग करें। जिम्मेदारी और समझदारी के साथ बिजली का उपयोग करना हम सभी का नागरिक दायित्व है। आइए, अनावश्यक बिजली खर्च से बचें और ऊर्जा संरक्षण में अपना योगदान दें, ताकि सभी को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
#SaveElectricity #EnergyConservation #ResponsibleCitizen #UPPCL
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