“हम किसी के खैरात पर नहीं पल रहे, हम इस देश के मज़दूर हैं!"
दिल्ली के जंतर-मंतर से मोहम्मद इरफ़ान की यह दहाड़ देश के हर उस हाथ की आवाज़ है जो दिन-रात पसीना बहाता है।
4 ट्रिलियन की इकॉनमी का ढिंढोरा पीटने वालों के पास ₹500 दिहाड़ी कमाने वाले मज़दूरों की 'गरिमा' के लिए कोई वक़्त क्यों नहीं है?
आज इनकी बात कोई क्यों नहीं करता?
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देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से जो अपने जंतर मंतर के उस video से viral हो रहा है, जिसमे वह संविधान की प्रस्तावना को जिस लय में सुना रहा है, वो आसपास वालों को बांध लेती है l
एक टूटे हुए से घर में लोकतांत्रिक मूल्यों को हृदय से लगाकर रखने वाला इरफ़ान संघर्ष कर रहा है l इरफ़ान को बस उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर मिलने की देर है , उसके बाद वह अपना रास्ता बना लेगा l
जामिया के कुछ छात्र जंतर मंतर से लौट रहे थे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें डिटेन कर लिया और साथ थाने ले जाने लगी, वहाँ से गुज़र रहीं सामाजिक कार्यकर्त्ता ज़ेबा खान और पत्रकार अफ़ज़ल आलम ने हिम्मत दिखाते हुए उन बच्चों को छुड़ाया, और पुलिस से सवाल पूछा कि प्रोटेस्ट में जाना कैसे जुर्म है?
आज राहुल गांधी जी के साथ हमने जो चर्चा की, वह सार्थक रही।
देश में शिक्षा व्यवस्था को takeover कर और उसपर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही।
हमारे कुछ साथियों ने लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर आज 'बिहार बंद' का ऐलान किया था, लेकिन उससे पहले ही बिहार पुलिस ने उन्हें और बाकी स्टूडेंट्स को हिरासत में ले लिया।
छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नहीं हो सकता।
: @neha_aisa जी