दिल्ली की हवा पर चेतावनी 🚨
आज दिल्ली के लगभग सभी ४१ स्टेशन PM2.5 के WHO सीमा से ऊपर — और PM10 तो NAAQS मानक से भी।
• मौसम का असर हटाने पर दिल्ली का AQI पिछले साल से +१३ अंक और बदतर (de-weathered १३७ बनाम १२४)
• मौसम हटाने पर ७ में से ५ प्रदूषकों में हालत जस की तस या बदतर — PM10 +१७%, CO +१३%, SO₂ +१२%
• सबसे ख़राब: Anand Vihar २६९ — ‘ख़राब’, PM10; पिछले साल से +५६ अंक ऊपर
• मौसम हटाने पर २९ में से २९ स्टेशन पिछले साल से बदतर — कोई असली सुधार नहीं
सरकार से माँग — PM10 के स्रोत (निर्माण-धूल/सड़क-धूल) पर तुरंत सख़्ती; Anand Vihar जैसे इलाक़ों में स्थानीय कदम + स्वास्थ्य-चेतावनी; WHO मानकों की ओर AQI लक्ष्य कठोर।
साँस लेना मौलिक अधिकार है — सुविधा नहीं।
#DelhiAQI #AirQuality #CPCB #वायुप्रदूषण #दिल्ली
The people of Karnataka placed their trust in us, and that trust remains our greatest responsibility.
Warm congratulations to CM Shri D.K. Shivakumar ji and the Council of Ministers, who will carry forward the aspirations of the people of Karnataka.
My sincere thanks to Shri Siddaramaiah ji, whose leadership and service have strengthened Karnataka and improved millions of lives.
The Congress party’s guarantees remain the foundation of our governance and commitment to social justice.
We will keep listening, delivering, and serving the people of Karnataka.
कांग्रेस ने 60 सालों तक किया महंगाई पर कंट्रोल, भाजपा के 12 साल में महंगाई आउट ऑफ़ कंट्रोल!
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट!
#ModiHaiToMehngaiHai
सोना मत खरीदो, तेल मत खाओ, यात्रा मत करो- हमें ये सब बताकर मोदी खुद विदेश घूमने निकल लिए।
मुसीबत आते ही मोदी हाथ खड़े कर देते हैं और झोला उठाकर चल देते हैं।
- देश की जनता ने कहा
कांग्रेस ने 60 सालों तक किया महंगाई पर कंट्रोल, भाजपा के 12 साल में महंगाई आउट ऑफ़ कंट्रोल!
गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से दालें भी हुई गायब!
#ModiHaiToMehngaiHai
दिल्ली की जनता के समक्ष अब ये साफ हो जायेगा कि माननीय शीला दीक्षित जी के 15वर्ष के शासनकाल में जो विकास की रफ़्तार दिल्ली नें पकड़ी थी उस रफ़्तार को झूठे वादों और सपने दिखाने वाली APP और भाजपा सरकारों नें किस प्रकार ठप्प करने का कार्य किया है
अब 5 दिनों में जनता जान जाएगी कि पिछले 14 वर्षों में दिल्ली की समस्याओं के लिए कौन और कैसे जिम्मेदार है
🙏 यह पाँच-भाग की शृंखला मेरी मार्गदर्शक, श्रीमती शीला दीक्षित
जी को समर्पित — मेरी नज़र में, आज के आधुनिक दिल्ली की निर्माता।
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली सरकार ने ईंधन संकट को लेकर कई सलाहें जारी की हैं — मेट्रो लीजिए, साथ में सवारी कीजिए, ग़ैर-ज़रूरी सफ़र कम कीजिए। ये सलाहें अपने-आप में ग़लत नहीं हैं। पर ये "हमें", यानी आम लोगों को, बताती हैं कि हमें क्या करना है। पहले सवाल का जवाब इनमें नहीं है — क्या वह "विकल्प" है भी? क्या दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन इतना तैयार है कि परिवार जब अपनी गाड़ियाँ घर पर छोड़कर निकलें, तो उन्हें ढो सके?
एक बात पहले ही साफ़ कर दूँ। आगे जो भी मैं रखूँगा, उसका मक़सद आलोचना नहीं है। ये सुझाव हैं, सद्भावना के साथ, दिल्ली सरकार के लिए — ताकि वह काम आगे बढ़ाया जा सके जो 2013 में शीला जी के कार्यकाल के समाप्त होने तक चल रहा था। यहाँ जो भी आँकड़े आप देखेंगे, वे सिर्फ़ सरकारी दस्तावेज़ों से हैं : भारतीय रिज़र्व बैंक, दिल्ली सरकार के अपने ऑडिटेड खाते, दिल्ली मेट्रो की वार्षिक रिपोर्टें, और दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण।
आँकड़ों से पहले एक छोटी सी बात समझ लेते हैं। CAPEX — यानी पूँजीगत व्यय — सरकार के बजट का वह हिस्सा है जो "बनाता" है। मेट्रो लाइनें, डिपो, फ़्लाईओवर, सड़कें। ऐसी संपत्तियाँ जो दशकों तक चलती हैं।
दूसरा हिस्सा, राजस्व व्यय, ख़र्च होता है वेतन, सब्सिडी और बिजली
के बिल पर। दोनों ज़रूरी हैं — शहर चलाने के लिए दोनों चाहिए। पर
शहर "बनाता" सिर्फ़ CAPEX है।
अब देखिए — तीस सालों में दिल्ली की चार चुनी हुई सरकारें रहीं। हर सरकार ने परिवहन पर जो रुपया ख़र्च किया, उसमें से वास्तव में
"बनाने" पर कितने पैसे लगे :
🔸 बीजेपी, 1993–98 : 54 पैसे।
🔸 शीला दीक्षित / INC, 1998–2013 : 73 पैसे। दिल्ली की किसी भी
सरकार से सबसे ज़्यादा, और बहुत बड़े अंतर से।
🔸 आम आदमी पार्टी, 2014–25 : सिर्फ़ 33 पैसे। सबसे कम, बहुत बड़े
अंतर से।
🔸 बीजेपी, 2025–26 (बजट अनुमान) : 51 पैसे अनुमानित। पर यह सिर्फ़
एक बजट-अनुमान वर्ष है, आँकने के लिए बहुत जल्दी। दिन 2 में हम इसकी ईमानदारी से जाँच करेंगे।
यही, एक आँकड़े में, फ़र्क़ है — एक बने हुए शहर में, और एक उस
शहर में जो ज़्यादातर सिर्फ़ "घोषित" हुआ हो।
2013 के अंत में शीला जी ने पद छोड़ा। और उसके बाद से, दिल्ली में बुनियादी ढाँचे के विकास की रफ़्तार बस ठहर सी गई है। मेट्रो का
फ़ेज़ चार — जिसकी योजना-स्तर की मंज़ूरी उनकी सरकार ने 2011 में दे दी थी — केंद्र की मंज़ूरी के लिए 2019 तक इंतज़ार करता रहा।
डीटीसी का बेड़ा आज 2010–11 के अपने शिखर से, चौदह साल बाद, अब भी छोटा है। और बजट का जो हिस्सा कभी निर्माण पर ख़र्च होता था, वह अब लगभग ग़ायब है।
अगले चार दिन, एक दिन एक सवाल :
📊 दिन 2 · CAPEX, पैसा-पैसा। दिल्ली ने वास्तव में क्या बनाया,
क्या बनाना बंद किया, और क्या सिर्फ़ "घोषित" किया। रसीदों और
ऑडिट के साथ।
🚇 दिन 3 · दिल्ली मेट्रो। मंज़ूरी किसने दी, बनाया किसने, और
फ़ेज़ चार को सिर्फ़ एक मंज़ूरी के लिए छह साल इंतज़ार क्यों करना
पड़ा।
🚌 दिन 4 · डीटीसी। सर्वकालिक शिखर, उसके बाद की गिरावट, और जो ऑडिट रिपोर्टें अब चुपचाप प्रकाशित नहीं हो रहीं।
🧍 दिन 5 · बसें और लोग। दिल्ली को कितनी बसें चाहिए, कितनी हैं, और क्यों ज़्यादातर दिन आपको एक भी बस नहीं मिलती।
हर आँकड़ा सरकारी रुपये में होगा। कुछ वर्षों में अंतराल हैं — हर
एक को मैं वहीं ईमानदारी से बताऊँगा।
पाँच सवाल, पाँच दिन। आँकड़े बोलेंगे। उसके बाद फ़ैसला आप कीजिए।
दिल्ली परिवहन — तीस साल, तीन दौर — मामला अब खुला है।
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@PTI_News दिल्ली की जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री देवेंद्र यादव जी के नेतृत्व में दिल्ली का प्रत्येक कांग्रेसजन हर क़ुरबानी के लिए तैयार है
आज @INCDelhi के नव-नियुक्त पदाधिकारियों से मुलाक़ात कर संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया और नव-दायित्व की शुभकामनाएँ प्रेषित की।
इस दौरान नव नियुक्त महासचिव: पीके मिश्रा जी, प्रमोद जैन जी, उपाध्यक्षगण: आभा चौधरी जी, कमल कांत शर्मा जी, जगजीवन शर्मा जी उपस्थित रहे।