एक तरफ मोदी जी जनता से पेट्रोल डीजल की खपत कम करने की अपील कर रहे है वहीं दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के नेता मध्यप्रदेश में निगम मंडल के पदभार समारोह में 100 गाड़ियों के काफिले के साथ जा रहे है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव जनता को सादगी का संदेश देने के लिए बेटे की शादी सामूहिक सम्मेलन में करते है वहीं उन्हीं के विधायक गोलू शुक्ला बेटे की शादी पर करोड़ रुपया खर्च करते हे।वैसे ये व्यक्तिगत मामला है लेकिन सवाल राजनीतिक दोगलेपन का है। @P0LITICAL_ADDA
सोनिया/प्रियंका/राहुल गांधी या अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे या संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने क्या आज तक कभी किसी चुनाव वाले राज्य में रात रुक कर स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया कभी? क्या उन्होंने किसी कांग्रेस के बागी को कॉल कर के निर्दलीय फॉर्म उठवाया?
PM मोदी, HM शाह और अध्यक्ष नड्डा तमाम अन्य सरकारी जिम्मेदारियों के साथ उपरोक्त काम भी बखूबी करते हैं।
राहुल गांधी फ्री है मगर फिर भी उनकी हफ्ते में पब्लिक अपीयरेंस या पार्टी मीटिंग भी बमुश्किल एक ही होती है, जबकि 75 के PM मोदी हर रोज 1 तो जनसभा निपटा ही लेते हैं किसी न किसी राज्य में।
गांधी परिवार के बस की नहीं है कांग्रेस अब मगर जब तक गांधी है तब तक डर के साए में नेता बैठे हैं और जिस दिन गांधी परिवार ने कांग्रेस को फ्री छोड़ा उस दिन हर राज्य में कांग्रेस के नेता तब्दील होकर नए क्षेत्रीय दल बनाएंगे और कांग्रेस लुप्त हो जाएगी देश से।
राहुल पार्टी से ज्यादा परिवार और निजी जीवन को वक्त देते हैं जो गलत है। पार्टी, कार्यकर्ता और जनता ही उनका परिवार है। आप राजनीतिक जीवन में आए हो तो आपको हर वक्त लोगों के लिए सार्वजनिक जीवन जीना होगा, सुरक्षा कारणों के अलावा आपका कुछ भी निजी नहीं हो सकता। आपका सबकुछ जनता का, तभी जनता आपकी होगी। मुंहदिखाई करने वालों को जनता स्वीकार नहीं करेगी चाहे आप कितने ही ईमानदार, शरीफ और सीधे, सरल हो जाओ।
राहुल को भरी जवानी में मौका मिला मगर अब वो अधेड़ उम्र में आ गए हैं, अब भी उनके समझ नहीं आ रही है राजनीति तो अब उन्हें खुद के जीवन और पार्टी दोनों को ज्यादा बर्बाद न करके पार्टी को अलविदा कह कर अपनी निजी जिंदगी विदेश में बढ़िया काटनी चाहिए और पार्टी को भी अपने हालत पर छोड़ देना चाहिए क्या पता दिन सुधर जाए पार्टी के भी वैसे भी अभी वेंटिलेटर पर ही है।