Can they leave the little girl alone now?
She has said enough and been through enough. She needn't do any more.
For the love of God, let her return to anonymity. Let her recover.
संसद से गृह मंत्री अमित शाह जी के जाने पर हाथ बाँधे चलती हुई यह आज्ञाकारी मंडली कार्यकर्ताओं की नहीं, बीट रिपोर्टर्स की है
लेकिन क्या इनमें से किसी एक ने भी शाह से पूछा “सर पैलेट चलाने का ऑर्डर किसने दिया था”?
सवाल पूछना तो दूर बेचारे कैमरा उठाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाये
One of the largest Qur'an celebrations in Türkiye's history.
More than 700,000 children completed summer Qur'an courses across Türkiye, and their achievement was celebrated in a historic gathering at Istanbul's RAMS Park Stadium.
A nation that invests in faith, knowledge and character is investing in its future. May Allah bless these students, their families and everyone who teaches Qur'an.
और ये “पत्रकार” हैं!
अमित शाह जी के सामने हाँथ बाँधे ठिठियाते हैं! शाह ने इनकी तरफ़ एक नज़र देख भी लिया तो फूले नहीं समाते! और इनको क्रिसमस विशिंग से आपत्ति है!
सोचिए, लोकतंत्र का कितना नुक़सान ऐसे “पत्रकारों” ने किया है जो सत्ता की ताल पर हर पल नाचने को तैयार बैठे है!
पीडित छात्रा:- एक पुलिस वाले ने मेरे पिछले हिस्से मे लाठी घुसेडी...💔
ठीक ऐसी ही घटना प्रोटेस्टर के दौरान जंतर-मंतर पर और भी छात्राओ के साथ भी हुई
हमें ₹@डी बोला गया है, हमे मारते वक्त ये बोल रहे थे कि और मारो इन बहन की लौ@डी को 💔
एक लडकी को ये तक बोला गया कि घर चली जा वर्ना थाने ले जा कर नं&गा करके मारूंगा
औरतो की छाती पर पैर रखे गए है और ये सब पुरूष पुलिस के द्वारा किया गया था और जो इनमे से तमाम बिना वर्दी के भी थे !!
इस पीडिता की आवाज प्रधानमंत्री के कानो तक जरूर पहुचनी चाहिए, उनको अपने ऊपर पडी गालियां तो सुनाई दे गई...
पर प्रधानमंत्री की पुलिस ने इन छात्राओ के साथ जो सुलूक किया उसके बारे मे प्रधानमंत्री के क्या विचार है ?
नई पीढ़ी यानि Gen Z को मर्ज़ का पता चल गया है. मर्ज़ ये है कि उनके पेरेंट्स और दादा-दादी ‘केबल टीवी’ से न्यूज़ कंज्यूम करने के आदी थे और हमेशा यही मानते थे कि उसमें आने वाली हर ख़बर सच होती है.
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये कहानी बदल गई. न्यूज़ सच्चाई की जगह नैरेटिव की तरफ़ जाने लगी और देश लोकतंत्र से दूर जाने लगा.
अब जब इस पीढ़ी ने मर्ज़ पकड़ लिया है, तो इलाज़ भी ढूँढ लेगी.
सरकार अब क़ायदे से समझ ले, Gen Z इलाज़ करके ही रहेगी.
#GenZKiAwaaz #NarrativeVsTruth
"जिसको हाथ में तंबाकू देना माना है, उसके हाथ में नशा कहां से आया....स्मैक कहां से आई..... गांजा कहाँ से आया.... "
इरफ़ान जब सामाजिक बुराईयों पर बोलता है तो सामाजिक विकृति विज्ञान (Social Pathology) का चलता-फिरता प्रोफेसर प्रतीत होता है l
इरफ़ान की यही विशेषता उसे आज भीड़ से अलग खड़ा कर रही है। जहाँ अधिकांश लोग केवल नशे के शिकार युवाओं को दोषी ठहराते हैं, वहाँ इरफ़ान यह सवाल उठाता हैं कि आखिर वह ज़हर उनके हाथों तक पहुँचा कैसे ?
इरफ़ान जब सामाजिक बुराई पर बोलता हैं तो ऐसा लगता है, मानो वह केवल किसी बुराई पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, बल्कि समाज के भीतर पल रही बुराईयों का एक्स-रे खींचकर शासन -प्रशासन के चेहरे की और उछाल रहा हो....
चलिए आपको जादूगरी दिखाते हैं। ANI का कैमरा सामने हैं। नड्डा जी और मोदी जी एक ही गाड़ी से आते हैं। दोनों पीछे बैठे हैं। नड्डा जी बाएं दरवाजे से बाहर निकल फ्रेम से ग़ायब हो जाते हैं।
कैमरा मोदी जी पर है। मोदी जी निकलते हैं तब तक नड्डा फिर से प्रगट हो जाते हैं इस बार उनके हाथ के गुलाब है। अब सोचना आपको है कि
1-यह गुलाब कहां से आया?
2- नड्डा उतरकर अचानक विलुप्त कैसे हो गए?
3- जब साथ ही आ रहे हैं तो यह स्वागत कैसा? जैसे इंतजार हो रहा हो
4- क्या ANI का कैमरा परमानेंट गुरुजी के साथ रहता है?
बीजेपी की भूंजा गैंग ने क्या हालत कर दी है सम्माननीय की? कितने क्रुर और खुदगर्ज लोग है वो?? तरस आता है, सहानुभूति शब्द भी कम पड़ता है इनकी दशा और दिशा देखकर! अफ़सोसजनक स्थिति!
अपने होश-ओ-हवास में ऐसा हरगिज नहीं करते?
दबी जुबान में मूल जेडीयू के लोगों ने बताया कि वो प्रचार करने नहीं जाना चाहते थे, इसलिए जबरन उनसे यह वीडियो बनवाया गया है, यहाँ भी ज़्यादती।
ये तो गज़ब हो गया🤨
अवतारी पुरुष अब अगली सीट छोड़कर बीच में बैठे नजर आ रहे हैं।
वीडियो में एक सुपर तमाशा भी देखिए👇🏻
जेपी नड्डा इसी कार में साथ में बैठे थे पर जैसे ही कार रुकी ,झट से दूसरी तरफ से उतर कर फूलों का गुलदस्ता लेकर साहेब को रिसीव करने का नाटक करने लगे...😂
मतलब साहब की इमेज बनी रहनी चाहिए😅
महंगाई के दौर में, जहाँ 30 रुपये में एक कप कॉफी तक नहीं मिलती, वहाँ एक शख़्स 30 रुपये में 4 रोटी, चिकन, सलाद और पैक्ड पानी खिलाकर हज़ारों लोगों की दुआएँ कमा रहा है।
उनका नाम है मोहम्मद इरफान।
जब उनसे मुलाक़ात हुई तो महसूस हुआ कि कुछ लोग कारोबार नहीं करते... इबादत करते हैं। उनके लिए थाली में रखा हर निवाला सिर्फ़ खाना नहीं होता, बल्कि किसी मेहनतकश की इज़्ज़त, किसी मज़दूर की थकान और किसी गरीब की भूख का जवाब होता है।
बातों-बातों में समझ आया कि समाजवाद उनके लिए कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि जीने का तरीका है। समाज के सबसे आख़िरी पायदान पर खड़े इंसान की फ़िक्र उनकी बातों में भी दिखी और उनके काम में भी।
यह बातचीत आज से तीन साल पुरानी है। वक़्त बदला, हालात बदले, लेकिन एक चीज़ नहीं बदली - मोहम्मद इरफान का इंसानियत पर यक़ीन।
इरफान तब भी कोहिनूर थे...और आज भी हैं।
#MohammadIrfan #PoojaMathur
बच्चो ने कुछ भी ग़लत किया है तो गिरफ्तार करते इस तरह जानवरों की तरह कौन मारता है ये सब के सब सस्पेंड होने चाहिए मैं तो कहता हूँ टर्मिनेट होने चाहिए
विपक्ष को ये वीडियो पार्लियामेंट में रखनी चाहिए और शकल की पहचान करवा के इन पर कार्यवाही की माँग करनी चाहिए .
ये अत्याचार है बच्चों ने कुछ भी ग़लत किया हो पुलिस केवल गिरफ्तार कर सकती है
जेन ज़ी और जंतर मंतर आंदोलन के बारे में आरएसएस के नेता क्या कह रहे हैं अगर आपने इस पर गौर नहीं किया तो समझिए कि आप बहुत बड़ी गफ़लत में हैं।
आरएसएस के प्रमुख नेता, सलाहकार एस गुरुमूर्ति को सुनिए। वे कह रहे हैं कि जेन ज़ी के आंदोलनकारी अपराधी, रेपिस्ट, हत्यारे, गुंडे और गैंगस्टर थे।
इसके पहले केरल का एक संघी नेता कह चुका है कि मैं होता तो छात्रों पर फायरिंग करवाता।
संघियों के इस बयान का सीधा सा मतलब है कि अब वे आंदोलनकारियों के साथ क्या करने जा रहे हैं। कई जगहों से वीडियो आ चुके हैं जिनमें आंदोलन में हिस्सा लेने वालों का बजरंगियों ने मारा-पीटा है।
ये सरकार भी अंदरखाने तैयारी कर ही रही होगी। फेस रिक्गनीशन मशीनों के ज़रिए वह आंदोलनकारियों की शिनाख़्त कर सकती है और फिर एक ऐसा अभियान चलाया जा सकता है जिसमें चुन-चुनकर निशाना साध जाए।
A man on a scooter sexually harassed a woman waiting for a cab in Ramamurthy Nagar, Bengaluru by asking, "What's your rate?" She recorded the incident. The accused identified as Vijay Ragav was soon arrested by police.