पिछले 35 सालों चुनावी परिणामों की मैंने कभी परवाह नहीं की।
कार्टूनिस्ट होने के नाते मुझे हमेशा विपक्ष में ही रहना है।
पर इस बार मैं दिल से चाहता हूँ कि इन चुनावों में मेनस्ट्रीम मीडिया बुरी तरह हारे। इसने पूरे देश को ऐसे गड्ढे में धकेल दिया जहां से निकलने में दशकों लगेंगे... अगर आज से बाहर निकालने की कोशिश शुरू हो तो।
Wild animals feel obliged. They have strong emotions💕
Here the deer comes with his entire herd and expresses gratitude to the man who had saved him❤️
(WA fwd)
माननीय जनता,
मेरे होने में आप सभी शामिल हैं। आपका प्यार ही मेरी दौलत है। आप दर्शकों से एकतरफ़ा और लंबा संवाद किया है। अपने यू- ट्यूब चैनल पर। यही मेरा नया पता है। सभी को गोदी मीडिया की ग़ुलामी से लड़ना है।
आपका
रवीश कुमार
https://t.co/39BKNJdoro
माना कि चुनौती बड़ी थी
हमारी टीम भी कहाँ शांत खड़ी थी
रास्ते अगर चट्टानी थे
तो इरादे हमारे फौलादी थे
सभी की दुआओं और रेस्क्यू टीम के अथक, समर्पित प्रयासों से राहुल साहू को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है।
वह जल्द से जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ हो, ऐसी हमारी कामना है।
देश की जनता टैक्स वसूली के बोझ से परेशान है जबकि मोदी सरकार के लिए ये टैक्स की कमाई एक बड़ी उपलब्धि है।
नज़रिए का अंतर है- उन्हें जनता का दर्द नहीं सिर्फ़ अपना ख़ज़ाना दिखता है।
#EconomicSurvey2022
‘पेट पर लात मत मारिए, पेट की लात बहुत ख़राब होती है’
‘मां बीमार होती है तो इलाज नहीं करवाती, उसे हमारे लिए पैसा भेजना होता है’
रेलवे भर्ती परीक्षा को लेकर नाराज़ बिहार के एक युवा का गुस्सा कुछ इस तरह फूट पड़ा.
वीडियोः दिलनवाज़ पाशा और विष्णु नारायण
बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जाएगा।
कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते- कोई बात नहीं…
हम अपने सैनिकों के लिए अमर जवान ज्योति एक बार फिर जलाएँगे!
"लुटे हुए को लूटा
पिटे हुए को पीटा,
फरियादी रोता-रोता
गांव लौट गया रीता।" ...
यह कविता मैंने पुलिस अधीक्षक झाबुआ रहते हुए लिखी थी और पुलिस अधिकारियों को सुनाई भी।
नोट- इसे केवल कविता की तरहं पढ़े 😊
Today in the Rajya Sabha the Chair didn’t even allow a vote on the Opposition motion to send the Electoral Roll-Aadhaar Bill to a Select Committee. The Opposition walked out in protest. Like the farm Bills, this Bill too was passed most undemocratically!
अपने लिए ‘साले’ और ‘चोर’ जैसे शब्द सुनने के बाद भी आज कुछ बड़े वाले पत्रकार टेनी मोह दिखाएँगे। या चुप पकड़ लेंगे। फ़ील्ड पर गाली खाए उस स्ट्रिंगर ने आज इसलिए यह सुना क्योंकि स्टूडीओ वालों ने अपना असली काम नहीं किया।
सशक्त कानून व्यवस्था वो है जहां कमजोर से कमजोर व्यक्ति को न्याय मिल सके।
यह नहीं कि न्याय मांगने वालों को न्याय के स्थान पर इस बर्बरता का सामना करना पड़े,यह बहुत कष्टदायक है।भयभीत समाज कानून के राज का उदाहरण नहीं है।
सशक्त कानून व्यवस्था वो है जहां कानून का भय हो,पुलिस का नहीं।