1991 का वीडियो कही न कही आज सच साबित हो रहा है
तुम अपने बच्चों की हिफाज़त नहीं कर पाओगे, तुम अपनी मस्जिदों की हिफाज़त नहीं कर पाओगे, तुम नमाज पड़ना चाहोगे लेकिन तुमको मस्जिद मे दाखिल होने की इज़ाज़त नहीं दी जायेगी
और आज यही सब मोब्लिचिंग, मस्जिदों की शाहदत हो रही है
#SaveUjjainShahiMosque
अहले हदीस (वहाबी) मौलवी इशाक मिर्जा इंजीनियर के उस्ताद का कहना है कि;
*मर्द और औरत की नमाज़ में फर्क है*
ये इज्मा का मसअला है -
* सहाबा, तबा'-ताबि'इन से ले कर चारो इमाम तक सब इस पर मुत्तफिक़ हैं कि औरत की नमाज़ अलग है, पर्दा वाली है।
ये नया फितना है कि कुछ लोग कहते हैं
क्या नबी ए करीम ﷺ के लिए इख़्तियार मानना कुफ़्र है... !?
सूरज उल्टे पांव पलटे चांद इशारे से हो चाक,
अंधे नज्दी देख ले कुदरत रसूलुल्लाह की
तुझसे और जन्नत से क्या मतलब वहाबी दूर हो,
हम रसूलुल्लाह के जन्नत रसूलुल्लाह की
शिर्क क्या है??
शिर्क की मुक़म्मल तफ़्सील...!
मुर्दा ज़िंदा करना,दिल का हाल जानना और नबी ए पाक ﷺ का मदद करना कुछ भी शिर्क नहीं है बशर्तें की आपका अक़ीदा दुरुस्त हो....!!
तौहीद की बात कहना गुनाह कब से हो गया?
मशहूर इन्फ्लुएंसर मारूफ रज़ा ख़ान ने इस्लाम के बुनियादी अक़ीदे तौहीद का ज़िक्र किया, जिसके बाद बरेली पुलिस ने उन्हें धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया।
सवाल ये है कि अपने मज़हबी अक़ीदे का इज़हार करना भी अब जुर्म है?
अगर कोई क़ानून तोड़ा गया है तो निष्पक्ष जाँच और अदालत के ज़रिए फ़ैसला होना चाहिए, इंसाफ़ हो, क़ानून सबके लिए बराबर हो।
चलो हम अपने प्रधानमंत्री की 10th क्लास की मार्कशीट पर थोड़ा सा गौर करते है।
✓मार्कशीट में दिखा रखा है कि 10th क्लास में टोटल 6 सब्जेक्ट है
✓ हर सब्जेक्ट का पूर्णांक 100 है तो 6 सब्जेक्ट का पूर्णांक 600 होना चाहिए लेकिन इसमें पूर्णांक 500 दिखा रहा हैं
✓ 600 में से 421 अंक प्राप्त हुए इस प्रकार टोटल 70% बनता है लेकिन मार्कशीट में 82% बता रखा है
✓ 15 मार्च 1968 को , जिस दिन रिजल्ट आया उससे 1 दिन पहले होलिका दहन था तो रिजल्ट के के दिन धुलंडी होगी तो यह तो छुट्टी का दिन है तो उस दिन रिजल्ट कैसे आ सकता है
इन सभी तथ्यों को देख तो यह मार्कशीट पूरी तरह से फेक है।
भक्तों तुम्हें fake डाक्यूमेंट circulate करने की कहा जरूरत हैं।
बोल दो के तुम्हारे पापा अनपढ़ है कभी school ही नहीं गए।
एक इस फेंटा की भी डिग्री चैक होनी चाहिए..
और सबसे बड़ी बात तो ये है की ये आदमी अगर पढ़ाई के समय पढ़ने मे होशियार था तो अंधभक्ति का खुमार कैसे चढ़ा इसने गोबर, गौमूत्र, हिन्दू मुस्लिम किसे सीखा क्यों राजनीति को को एक सही दिशा नहीं दे सका?
जिनके बाप दादाओं ने जेल जाने के डर से अंग्रेजों के तलवे चाटे हो और माफ़ीनामे लिख कर अपने लिए आजादी हासिल की हो!
उनकी औलादों का इतिहास से कोई लेनादेना नहीं है उनको स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में क्या ही पता होगा?
नागौर, राजस्थान में मुस्लिम प्रिंसिपल मोहम्मद अख्तर नदीम के तबादले के विरोध में हिंदू गांव वालों ने धरना दिया।
गांव वालों का कहना है कि मोहम्मद नदीम बच्चों को प्राइवेट स्कूल से बेहतर शिक्षा देते थे इसलिए आस पास के प्राइवेट स्कूल बंद हो चुके थे।
गांव वालों का ये भी कहना है कि मोहम्मद नदीम गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाते थे साथ ही उनका कहना है कि वो हमारे गांव के लिए कलाम से कम नहीं है।