Assalamu_Alaikum
अल्लाह तआ़ला का इरशाद है:
और जब हिसाब किताब का काम फैसल (पूरा ) हो चुकेगा
तब शैतान कहेगा, जो वादा अल्लाह ने तुम से किया था वह तो सच्चा था
और जो वादा मैंने तुम से किया था वह तो झूठा था
और मेरा तुम पर किसी तरह का जोर नहीं था
हाँ मैंने तुम को गुमराही और बातिल (झूठ) की तरफ बुलाया
तो तुम ने जल्दी से और बे-दलील मेरा कहना मान लिया
तो आज मुझे मलामत न करो अपने आप ही को मलामत करो
पता नहीं ईद मीलाद उन नबी ﷺؒ की की तारीख कहां से ली है
जबकि आला वाले हजरत ने कुछ और कहा है
वफात 12 रबी उल अव्वल अहमद रजा खान ने डिक्लेयर किया है
फ़तावा रिज़विया 26 पृष्ठ 412-415
لَا اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ مُحَمَّدُ رَّسُوْلُ اللّٰهُ ۞
कलमे के दो जुज़ {भाग} हैं: पहला जुज़ {भाग}
لَا اِلٰـهَ اِلَّا الـلّٰــهُ
और दूसरा:
مُحَمَّدُ رَّسُوْلُ اللّٰهُ
है ,
" अल्लाह के सिवा कोई मा'बूद नहीं " का मतलब यह है कि सारी कायनात में अल्लाह के सिवा कोई हस्ती...
" اِلٰہ"
यअ़नी मा'बूद { जिस की इबादत की जाए नहीं है }
वह वाजिबुल वजूद है_ वह एक है _उस जैसा कोई नहीं_ उसकी ज़ात व सिफ़ात में कोई शरीक नहीं_ वह एक व तंहा है_ नेज़ वह बेनियाज़ (किसी पर आश्रित नहीं )है; इसलिए उसे किसी की ज़रूरत नहीं , वह हर ऐब , ज़वाल , नुक़सान , ख़ौफ़ , ज़ईफ़ , {बुढ़ापा}, कमज़ोरी , ज़रूरत हाजत , ग़रज़ कि हर क़िस्म की मोहताजगी से पाक है_ वह तमाम ख़ूबियों का मालिक है_ वह फ़ाइले हक़ीक़ी है_ इस कायनात में मासिवा {सिवा उसके} जो कुछ है , उसकी ख़ल्क़ {बनाई} है और अपने वजूद , बक़ा , हरकत , फ़ना , वग़ैरह में उसके एक अम्र {हुक्म} महज़ की मोहताज हैं_ और हर शय {चीज़} पर क़ादिर है कोई चीज़ उसकी क़ुदरत से बाहर नहीं_ वह सब कुछ के बग़ैर सब कुछ कर सकता है_ मुख़तसर यह कि अल्लाह उसके ज़ात व सिफ़ात के साथ कमा हक़्क़हु {जैसा मानने का हक़ है} माना जाए
हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम...
को अल्लाह का रसूल मानने का मतलब यह है कि ज़िन्दगी के हर मुआ़मलात में सुबह से शाम तक , पैदाइश से मौत तक और सर के बाल से पैर के नाख़ुन तक , हर काम आन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीक़े पर ज़िन्दगी बसर की जाए , उनके तरीकों में पूरी कामयाबी है , और इसके अलावा जितने तरीके हैं , उनमें नाकामी है_ चौथी क़ाबिले लिहाज़ बात यह है कि कलमा के तक़ाज़े का इ़ल्म हो_ कलमा का तकाज़ा यह है कि अल्लाह के अवामिर {हुक्मों} को आन हज़रत {ﷺ} के तरीकों पर बजा लाना_ और जिन कामों से अल्लाह اَللّٰهُ ﷻ ने मना फ़रमाया है उन कामों से इजतनाब { बचना, दूर रहना} करना_
फ़ाइले हक़ीक़ी = असल कर्ता धर्ता , असल काम बनाने वाला
कमा हक़्क़हु = जैसे अल्लाह को मानने का हक़ है {कहीं पर कुछ भी ऐसा नहीं होना जहां अल्लाह की वहदानियत में शरीकत हो}
अम्र = हुक्म
अवामिर = हुक्मों पर
﴿إِنَّ ﷲ وَمَلاَ ئِكَتَهُ يُصَلُونَ عَلَى النَّبِيِّ يَا أَيُهَا الِّذِينَ آمَنُو صَلُّوا عَلَيهِ وَسَلِّمُوا تَسلِيمًا﴾
#Assalamo_alaikum
لوگ تمہارا حسب نسب اور حیثیت دیکھتے ہیں اور اللہ تمہاری نیت دیکھتا ہے..
लोग तुम्हारा हस्ब निस्ब और हैसियत देखते हैं और अल्लाह तुम्हारी नियत देखता है....
#Assalamu_Alaikum________
फ़ज्र की नमाज़ दिन की शुरुआत अल्लाह"
की "इबादत" और याद से करवाती है...
ये अपने ,आप में बहुत, बड़ी नेमत है...
जिस इंसान की सुबह सजदे से शुरू हो उसके
दिन में "सुकून और "बरकत की
उम्मीद कितनी खूबसूरत होती है
Good morning friends
Assalamu_Alaikum
अल्लाह तआ़ला का इरशाद है:
और हम ज़रूर तुम्हें आजमाएंगे कुछ ख़ौफ़ और भूख से,
और कुछ मालों और जानों और फलों के नुकसान से,
सब्र करने वालों के लिए ख़ुश-ख़बरी है_
अल बक़रा: 155
Assalam o alaikum 🌹 🌹
کتنا عجیب رشتہ ہے نہ تیرا اور میرا اے رب!
میرا گناہ کرتے جانا ، اور تیرا چھپاتے جانا ، میرا بولتے جانا ، اور تیرا سنتے جانا ، میرے شکوے کرنا ، اور تیرا حکمت دیکھانا ، میرا دنیا سے تنگ آنا ، اور تیرا جنت کا دلاسہ دینا ،
میرا بیزار ہونا ، اور تیرا مجھے خوش کرنا ، میرا بے چین ہونا، اور تیرا مجھے قرار دینا ، میرا لوگوں سے بداخلاقی کرنا ، اور تیرا مجھے اخلاق سکھانا ، میں جان کر بھی نہ جان پاؤ ، تیرا مجھ سے رشتہ کیا ہے ۔۔۔
کیوں میں گناہ کروں ، اور کیوں تو مجھے چھپاتا جائے ۔۔۔؟
میں بیزار ہوں دنیا سے اپنے آپ سے ۔۔۔
میرا اپنی طرف آنا آسان کر ۔۔۔
مجھے خوف سے نجات دے ۔۔۔
میری ذات کو اپنے لیے چن لے ۔۔۔
اداس ہوں پر تجھ سے ناراض نہیں.
تیرے دل میں ہوں پر تیرے پاس نہیں...
جھوٹ کہوں تو سب کچھ ہے میرے پاس..🌹
سچ کہوں تو ایک تیرے سوا کچھ خاص نہیں
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