बैंक यूनियनों ने सेंट्रल गवर्नमेंट की NPS स्कीम को तो अपना लिया, पर इसके अच्छे हिस्से को शामिल करना भूल गए। अब वक्त है अपने यूनियन को याद दिखाएं कि सेंट्रल गवर्नमेंट के NPS प्रावधानों को बैंकों ��ें भी लागू करे। ये एक बहुत बड़ी गलती थी, जिसे अब सही करने का समय आ गया है।
लेकिन सरकारी बैंकों में, बैंकर्स के पास सिर्फ़ NPS होता है, मौत होने पर ऐसी कोई ���्कीम को लागू नहीं किया जाता। ऐसे में अगर नौकरी की अवधि कम होती है तो पर्याप्त NPS फण्ड जमा नहीं कर पाते और NPS रिटर्न भी कम रहता है, और पेंशन की रकम भी कम रहती है, ये परिवार के लिए नाकाफी होता है।
दुर्घटना के बाद अगर केंद्रीय कर्मचारी, OPS चुनते हैं, तो कर्मचारियों का NPS योगदान और उस पर मिलने वाला रिटर्न कर्मचारी के परिवार को दिया जाता है। पर विभाग का योगदान और उस पर मिलने वाला रिटर्न विभाग को वापस मिल जाता है और कर्मचारी के परिवार को OPS स्कीम के अनुसार पेंशन मिलती है।
���ेंद्र सरकार के कर्मचारियों के पास सर्विस के दौरान मौत होने और इनवैलिडेशन/विकलांगता/लापता होने के मामले में डिस्चार्ज/रिटायरमेंट होने पर उनका NPS पेंशन OPS में बदलने का प्रावधान होता है।
एक NPS, पर दो पेंशन!
एक सरकारी बैंककर्मी और दूसरा केंद्र सरकार में, दोनों की बेसिक सैलरी 40k और दोनों NPS में, पर किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जान चली जाये तो उनके परिवार को पेंशन मिलेगी:
बैंक कर्मचारी - ₹5,188
सरकार�� कर्मचारी - ₹20,000 + DA
आखिर ये असमानता क्यों है! 👇
Working Days in Week 👇
▶️RBI- 5days
▶️DFS - 5 days
▶️LIC - 5 days
▶️CVC - 5 days
▶️SEBI - 5 days
▶️BSE- 5 days
▶️NSE- 5 days
▶️NPCI - 5 days
▶️IRDAI- 5 days
▶️Ministry - 5 days
▶️State Govt - 5 days
▶️NABARD-5 days
15 Lac Bankers still waiting....
For #5DaysBankingNow
Why Is Haryana Gramin Bank Withholding Scale IV–V Promotion Results?
For 5+ years, Haryana Gramin Bank has followed a clear and consistent rule:
Promotion results are declared on the same day or on the last day of interviews.
This practice was followed in 2025 for every cadre:
✔ Scale I-II
✔ Scale II-III
✔ Scale III-IV
❗ Only Scale IV to V stands out as an exception
📌 Interview completed on 22 Dec 2025
📌 Vacancies: 6
📌 Candidates interviewed: 5
📌 Result not declared till date
Interviews are over.
Candidates are fewer than vacancies.
Yet the result is being withheld without any official explanation.
❓ Why has a settled promotion process suddenly been altered?
❓ Who decided to delay only this cadre, and on what authority?
❓ Why is there no transparency or communication?
When rules change silently, confidence in the system erodes.
Transparency delayed is transparency denied.
Public sector banks must function on rules, consistency, and accountability not discretion.
@pnbindia @BankSarva @DFS_India@RBI@cmohry
#RRB #BankPromotions #Transparency #Accountability #Governance @CVCIndia
लंबा लिख रहा हूँ, क्योंकि दर्द छोटा नहीं है पूरा पढ़िएगा
सरकारी बैंक (RRB) से Morgan Stanley और फिर अपना बिज़नेस - तीन दुनियाओं का सफर और मेरी कहानी
मैंने अपनी करियर की शुरुआत भारत के सरकारी बैंक (RRB) से फिर किस्मत ने मौका दिया यूरोप में पढ़ने और फिर वहाँ मॉर्गन स्टेनली में काम करने का।
फर्क क्या था?
सिर्फ सैलरी का नहीं।
सिर्फ नाम का नहीं।
सबसे बड़ा फर्क था - इज्जत, माहौल और इंसानियत का।
भा��त के सरकारी बैंकों में क्या देखा?
🔻 रोज़ नए-नए टारगेट
🔻 सीनियर्स के धमकी भरे व्हाट्सएप मेसेज
🔻 “आज 20 PMJJBY अकाउंट क्यों नहीं खुले?” जैसे सवाल
🔻 ऑफिस की हालत - टूटी कुर्सियाँ, टपकती छत, न एसी, न इंटरनेट
🔻 मेमो, सस्पेंशन और ट्रांसफर की तलवार हर वक्त सिर पर
🔻 छुट्टी मांगो तो जुर्म मानो
🔻 काम करो चाहे जान चली जाए - कोई पहचान नहीं, कोई तारीफ नहीं
वहाँ हमें इंसान नहीं, टारगेट मशीन समझा जाता था।
मेंटल हेल्थ?
वर्क-लाइफ बैलेंस?
करियर डेवलपमेंट?
❌ भारतीय बैंकिंग में ये शब्द सुनने तक को नहीं मिलते।
फिर मैंने मॉर्गन स्टेनली यूरोप जॉइन किया।
वहाँ जाकर महसूस हुआ, बैंकिंग का असली मतलब क्या होता है।
✅ अगर किसी दिन देर तक काम करो, तो ओवरटाइम खुद सिस्टम में रिकॉर्ड होता था। फिर मैनेजर से पूछा जाता था - Why did he work late?
✅ अगर काम ज्यादा ��ै, तो मैनेजर खुद कहते थे - Need more staff? Take it. But your team should have work-life balance.
✅ महीने का एंड बहुत बिज़ी होता था, पर फिर मैनेजर खुद कहते - Go for some holiday and we will partially pay.
✅ ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर - सब्सिडाइज़्ड।
✅ ऑफिस में जिम, पूल, स्पा।
✅ कोई ड्रेस कोड का झंझट ��हीं।
✅ “मन नहीं है काम करने का, कोई बात नहीं, आज आराम कर लो। टीम में कोई और संभाल लेगा।
✅ प्रमोशन, इनक्रीमेंट सब कुछ सिर्फ परफॉरमेंस पर बेस्ड।
✅ अगर किसी को बीच में बिज़नेस करना है, या कोई दूसरा वेंचर ट्राय करना है, तो मैनेजर बोलते - जाओ, ट्राय करो। कभी भी वापस आना चाहो, दरवाज़ा खुला है
✅ बिना सीलिंग के फुल मेडिकल फैसिलिटी।
✅ तनाव हो रहा है तो थेरेपी की सुविधा उपलब्ध।
✅ कभी भी किसी से भी संपर्क करने की छूट, कोई हीरार्की नहीं - आप किसी से भी अपनी समस्या शेयर कर सकते हो
✅ रिजाइन करने के बाद भी HR और मैनेजर टाइम-टाइम पर टच में रहते है- सब ठीक तो है? किसी मदद की ज़रूरत है?
ये सब देखकर एक ही बात समझ में आई -
मॉर्गन स्टेनली में जो सपोर्ट और माहौल मिला, उसी ने मुझे कॉन्फिडेंस दिया कि मैं खुद का वेंचर शुरू कर सकूं।
जो आत��मविश्वास मुझे मॉर्गन स्टेनली में मिला, वो भारतीय बैंकिंग सिस्टम में कभी नहीं मिला।
शायद वही माहौल और जॉब सिक्योरिटी थी, जिसने मुझे अपना वेंचर शुरू करने की हिम्मत दी।
आज पिछले डेढ़ साल से यूरोप, अफ्रीका और इंडिया में छोटा ही सही, लेकिन अपना वेंचर चला रहा हूँ - और उस फाइनेंशियल लेवल पर हूँ, जिसकी सरकारी बैंकिंग में रहते हुए कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था।
सरकारी बैंकिंग में रहता, तो शायद आज इत��ी हिम्मत नहीं होती।
बल्कि सच कहूँ, तो शायद डिप्रेशन में या सुसाइड की कगार पर पहुँच गया होता।
क्योंकि सरकारी बैंकिंग में तो सब कुछ उल्टा था:
❌ सबसे बहतरीन स्टाफ लेकिन सबसे ख़राब प्रबंधन
❌ देर तक काम करो, तो पूछने वाला कोई नहीं कि क्यों रुके
❌ स्टाफ कम है तो भी मैनेजर कहेंगे - काम तो करना ही पड़ेगा
❌ छुट्टी लेना जुर्म है
❌ घूमने-फिरने का तो सवाल ही नहीं।
❌ कोई सपोर्ट नहीं, कोई समझ नहीं।
❌ बस टारग���ट, टारगेट, और धमकी।
❌ अपनी खुद की ग्रोथ के बारे में सोचना भी गुनाह।
❌ रिजाइन कर दो, तो बैंक के लिए तुम जैसे कभी थे ही नहीं
Morgan Stanley became a global investment bank not just because of capital and clients - but because it invests in people.
भारत की बैंकिंग सिस्टम टूट रही है, क्योंकि वो अपने ही लोगों को तोड़ रही है।
If you torture your employees with unrealistic targets, verbal abuse, and outdated systems - you destroy morale.
अगर आप लोगों को ही कुचल दोगे, तो कोई सिस्टम टिकेगा नहीं।
भारतीय बैंकिंग पॉलिसी मेकर्स से अपील है -
अगर आप सच में बैंकिंग सिस्टम को सुधारना चाहते हैं, तो शुरुआत उन लोगों से कीजिए, जो वहाँ दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
– कर्मचारियों को इज्जत दो।
– उनका वर्क-लाइफ बैलेंस बचाओ।
– मेंटल हेल्थ को सीरियसली लो।
– रोज-रोज के टारगेट और धमकियाँ बंद करो।
– उन्हें आगे बढ़ने का मौका दो।
बैंक सिर्फ अकाउंट खोलने से नहीं चलते।
बैंक चलते हैं इंसानों से।
उन्हें संभालो - इससे पहले कि देर हो जाए।
नितिन त्यागी
(एक पूर्व बैंककर्मी)
#IndianBanking #RRB #MorganStanley #Bankervoice
बैंकर्स को एक जरा सी बात पर कह देने वाले कि- तुम्हें हमारी वजह से सैलरी मिलती है, आज एयरपोर्ट पर मजबूर से खड़े है अब उनके मुंह से आवाज नहीं निकल रही।
जिन अमीर और “एलीट क्लास” पढ़े-लिखे लोगों को हर रोज़ यह शिकायत रहती है कि सारे सरकारी संस्थान बंद कर दो, सब कुछ प्राइवेट को दे दो। उनको नहीं पता ��ि असली सर्विस सरकारी संस्थान ही देते हैं।
उन्हीं एलीट क्लास लोगों में से कई पिछले चार दिन से एयरपोर्ट पर फंसे पड़े हैं। किसी की फ्लाइट शिफ्ट हो गई, किसी की कैंसिल, कोई टर्मिनल में ही रात काट रहा है।
लेकिन मज़े की बात कि
आज तक किसी को यह कहते नहीं सुना कि हमारे पैसे से तुम्हें सैलरी मिलती है।
(जबकि ये लाइन वे सरकारी बैंक में बेझिझक बोल देते हैं)
🤔 क्यों?
क्योंकि यहाँ सामने सरकारी कर्मचारी नह��ं, एक सुपर प्रीमियम प्राइवेट ब्रांड की यूनिफॉर्म दिख रही है।
और यूनिफॉर्म देखकर व्यवहार भी बदल जाता है।
थोड़े तथ्य भी सुन लीजिए
1️⃣ एयरपोर्ट और एयरलाइंस- 90% प्राइवेट हैं
ज़्यादातर बड़े एयरपोर्ट PPP मॉडल पर निजी कंपनियाँ चलाती हैं।
एयरलाइंस तो पूरी तरह प्राइवेट—और लेट, मिस मैनेजमेंट, ओवर बुकिंग इनके “सुपर सर्विस” का हिस्सा है।
2️⃣ भारत में बैंकिंग- संकट के समय निजी बैंक भागे, बचाया सरकारी ने
YES बैंक डूबा - बचाया SBI ने
ICICI पर संकट आया - स्थिरता सरकार ने दी
निजी बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में शाखाएँ खोलने से बचते हैं
सरकारी बैंक अकेले 60% देश की आबादी तक पहुँच रखते हैं
3️⃣ कोविड के समय- हवाई यात्रा बंद, निजी अस्पतालों ने दुगुना पैसा माँगा लेकिन
सरकारी अस्पताल, सरकारी बैंक, सरकारी बस सबने बिना भेदभाव सेवा दी।
⚡ फिर भी दोष?
लाइन में लगना - सरकारी की गलती
लोन में देरी - सरकारी की गलती
ATM में भीड़ - ��रकार की गलती
लेकिन एयरलाइन घंटों रोक दे, 2–2 दिन एयरपोर्ट पर भटकाओ
“अरे भाई, ये तो अंतरराष्ट्रीय मानक हैं… ऐसा हो जाता है।”
असली सवाल
सरकारी हो तो गाली,
प्राइवेट हो तो “साहब, कोई बात नहीं”…
ये दोहरा रवैया ही सबसे बड़ा मुद्दा है।
इसलिए सरकारी विभाग और सरकारी कर्मचारी से नफरत करना बंद करो।
UPGB में चल रहे भ्रष्टाचार का ताजा नमूना
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में सबसे ट्रांसफर ऑप्शन माँगे गए था, फिर अचानक सिर्फ एक ही आदमी का ट्रांसफ��� “administrative ground” पर क्यों किया?
क्या प्रबंधन पर कोई दबाव है? या GM और Chairman ने अपने पूर्ववर्तियों की तरह पैसा खाया?
और ये यूनियने और इनके नेता चुप क्यों बैठे है?
चेयरमैन डर गए हो क्या? या पहले से सेटिंग कर ली? या सबके मुँह में दही जम गई है?
@YadavThakur7 ये सब तमाशा बंद करो और जवाब दो!
#UPGB #Corruption #BankTransfers
सभी बैंक हड़ताल के लिए परिपत्र निकालते हैं, लेकिन #UPGB ने परिपत्र नहीं, सीधा धमकी भरा फरमान निकाल���। 15 वर्षों की बैंकिंग में ऐसा परिपत्र पहले कभी नहीं देखा। और सोने पर सुहागा कि किसी भी यूनियन ने इस पत्र का विरोध तक नहीं किया। जब नेता चापलूसी में व्यस्त हों, तो उनसे उम्मीद भी क्या की जा सकती है।
⚠️ धमकी भरे फरमान के कुछ अंश देखें:
1.शाखा प्रबंधक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी।
2.हड़ताल के दिन शाखाएँ टाइम पर खुलनी चाहिए - सब हड़ताल पर रहेंगे तो कैसे खुलेंगी?
3.हड़ताल में शामिल होने पर सर्विस ब्रेक की जा सकती है।
4.जब बैंक बने सिर्फ़ 2 महीने हुए हैं, तो पहले बैंक ने इस पर कैसे उदार दृष्टिकोण अपनाया?
5.हड़ताल में शामिल होना घोर कदाचार की श्रे��ी में आ सकता है और DAC की जा सकती है।
6.हड़ताल में शामिल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
7.हड़ताल में भाग लेने हेतु प्रार्थना पत्र तुरंत अस्वीकृत किया जाए।
8.हड़ताल की सूचना अब RO के साथ ALC को भी कर्मचारी द्वारा देना आवश्यक है - वाह रे नया नियम!
9.सीधे तौर पर BM हड़ताल पर न रहें।
10.हड़ताल पर रहने वालों के खिलाफ प्रबंधन उचित व कड़ी कार्रवाई करेगा।
11.9 जुलाई की हड़ताल गैरक़ानूनी है, अतः हड़ताल पर रहने ��ालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे धमकी भरे पत्रों से मैनेजमेंट किस कदर डरा रहा है, ये पहली बार देखा है। और यूनियन नेताओं ने हड़ताल का आह्वान तो रोक दिया, लेकिन प्रबंधन के इस पत्र का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाए।
भगवान ही मालिक है यूपीजीबी का अब!
#UPGB #BankStrike #UnionFail #BankEmployees
आप सभी साथियों से एक जिज्ञासा है -
क्या RRB में पहले AIRRBEA का सदस्य या पदाधिकारी रहना,
आज RM बनकर शोषण करने और प्र��ंधन के चरणवंदन करने का लाइसेंस दे देता है?
अक्सर वही लोग, जो अपने स्केल-1/2/3 में यूनियन का झंडा उठाए घूमते थे,
स्केल-4 में पहुँचते ही मैनेजमेंट के तलवे ऐसे चाटने लगते हैं,
मानो RM की कुर्सी इन्हें विरासत में मिलने वाली हो।
और फिर वही लोग, अपनी पूरी ताकत
अपने ही कर्मचारियों के शोषण में झोंक देते हैं।
हाँ, अपवाद ज़रूर हैं - पर गिनती के एक-दो ही।
सोचिए -
यूनियन में “हक़ की लड़ाई” का भाषण देने वाले,
कुर्सी मिलते ही क्यों बन जाते हैं शोषण के ठेकेदार?
सभी RRB बैंककर्मियों के लिए एक अहम खबर -
अब DFS ने साफ़ कर दिया है:
➡️ कानूनी हड़ताल में भाग लेने पर किसी कर्मचारी की वेतनवृद्धि (increment) रोकी नहीं जाएगी,
और न ही वरिष्ठता (seniority) घटाई जाएगी।
यह नियम probation में रहने वालों पर भी लागू है।
तो मैनेजमेंट और उसके चमचे सुन ले -
अब कर्मचारियों को डराकर, धमकाकर, increment रोकने या seniority घटाने का खेल खत्म!
कानूनी हड़ताल हक़ है, गुनाह नहीं।
अब डरने की बारी तुम्हारी है, हमारी नहीं।
सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर मैनेजमेंट के खिलाफ आवाज उठाने से यूनियन के कुछ नेताओ के पेट में मरोड होने लगा और वो हमे “बाहरी तत्व” बताने लगे-
तो ये उत्तर है उन लोगो को -
हाँ, मैं अब बैंक में नहीं हूँ।
बाहरी हूँ - उतना ही जितना वो यूनियन नेता जो रिटायर हो चुके हैं, लेकिन आज भी एक्टिव बने बैठे हैं और जिनकी आज के ये वर्तमान नेता चापलूसी करते नहीं थकते।
और हाँ - तुम्हारे हिसाब से बाहरी हूँ लेकिन
मैं भी रिटायर्ड यूनियन का सक्रिय सदस्य हूँ,
और कम से कम मैं सत्ता के तलवे नहीं चाटता,
मैं आज भी आवाज़ उठाता हूँ।
❗️मैंने नौकरी छोड़ी थी - ज़मीर नहीं।
❗️आज भी जब कोई RM तानाशाही करता है,
❗️आज भी जब कोई GM देर रात मीटिंग थोपता है,
❗️आज भी जब यूनियन लीडर चुप्पी की दलाली करता है -
तो मेरा खून खौलता है।
मज़बूरी है दोस्त��ं -
आज भी बोलना पड़ रहा है, क्योंकि जिन्हें प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए वो चुप है।
👉 मैंने पद छोड़ा था, पर लड़ाई नहीं।
👉 मेरी आवाज़ आज भी ज़िंदा है - क्योंकि ज़ुल्म आज भी ज़िंदा है।
और हाँ - अगर सच बोलना “बाहरी तत्व” होना है,
तो हाँ, मैं proudly बाहरी तत्व हूँ।
#BankersRevolt
#WeAreNotBhaariTatva
#ChhaviNahiHaqChahiye
#FakeUnionExposed
#StopBankDictatorship
बैंक की छवि धूमिल हो रही है… - वाह रे चमचागीरी की नई स्क्रिप्ट!
मुझे दुख है कि ये संदेश एक मित्र के हाथों आया, शायद किसी के इशारे पर। लेकिन जब कोई मित्र प्रबंधन की ज़ुबान बोलने लगे, तो उसे आईना दिखाना भी ज़रूरी हो जाता है।
जब कर्मचारी
👉 शोषण के खिलाफ बोलें,
👉 देर रात की तानाशाही मीटिंग्स पर सवाल उठाएं,
तो उन्हें कह दो - “बाहरी तत्व”?
और ��ो
👉 चुप रहकर कुर्सी बचाएं,
👉 कर्मचारियों को डरा-धमका कर चुप कराएं -
वो बन जाएं “नेता”?
साहब ये यूनियन है या मैनेजमेंट का डाटा एंट्री डेस्क?
जो अपने ही साथियों की आवाज़ को “विवाद” कहे, वो लीडर नहीं -
घुटनों पर बैठा प्रबंधन का डरा हुआ दलाल है।
कुर्सी की भूख इतनी कि
👉 कर्मचारियों को बोलने से रोक दो,
👉 और खुद मैनेजमेंट के तलवे चाटो?
🔥 अब डराओ मत - कर्मचारी अब जाग रहे हैं।
अगर आज भी हम चुप रहे,
तो ���ल यही “छवि बचाने” वाले
हमारी लाशों पर प्रेस रिलीज़ भेजेंगे।
✊ साथियो, अब समय है
इन नकली नेताओं को बेनकाब करने का,
और असल क्रांति शुरू करने का।
#UnionOrBroker
#ChhaviNahiHaqChahiye
#FakeUnionExposed
#StopBankDictatorship
#WeAreNotBhaariTatva
#BankersRevolt
कुछ सिर इसलिए नहीं झुकते, क्योंकि उन्होंने दुनिया देखी नहीं – समझी है।
Pride isn’t arrogance. It’s awareness.
#Unshaken#UnionPower#WeUnderstandWeLead
जो समझते हैं, वो समझौता नहीं करते। यूनियन आपके आत्मसम्मान की आवाज़ है।
साथियों मैंने RGB में हो रहे अन्याय के खिलाफ GM और RM को खुलकर लिखा -आपसे भी आग्रह है कि इस अन्याय के ख़िलाफ़ आप भी मेसेज करे
��गर आज इन शोषकों के खिलाफ नहीं बोले,
तो कल जब आपके साथ ज़ुल्म होगा -
कोई नहीं बोलेगा। 🚩 🔥
✊ इनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी होगी
📩 इनके वाटसप पर मेसेज भेजने होंगे
🚫 ये मीटिंग रुकवानी ही होगी!
📞 GM: 95493 29900
📞 RM: 80034 90951, 70734 53926
अब नहीं तो कभी नहीं।
#BankersUnite #SpeakUpNow #StopRRBDictatorship #RespectBankers
सरकारी टारगेट RRB & PSB पर - और मलाई प्राइवेट बैंकों को? अब बहुत हुआ!
✅ पहले पंजाब सरकार ने HDFC को निकाला
✅ अब ओडि���ा सरकार ने HDFC, ICICC और AXIS को बाहर फेंका!
👏 यही असली न्याय है -
सरकारी काम = सिर्फ़ सरकारी बैंक।
जब RRB & PSB बैंकर्स से Recovery, Pension, Yojana, DBT सब करवाना है,
तो फिर HDFC-AXIS-ICICI को सरकारी पैसा क्यों?
सरकार सुन ले - अगर PSB कर्मचारी “गुलाम” हैं,
तो प्राइवेट बैंक “बेवकूफ” नहीं हैं जो मुफ्त में सरकार के आदेश मानेंगे।
पंजाब और ओडिशा ने शुरुआत कर दी है - अब बारी पूरे देश की!
अब हर राज्य को यही करना चाहिए -
“सरकारी काम, PSB के नाम!”
#KickOutPrivateBanks
#GovtBusinessToPSB
#HDFCAxisOut
#5DayBanking
#BankersNotSlaves
#PSBRevolution
#StopExploitation
@FinMinIndia @DFS_India @idesibanda @nsitharamanoffc