Two Brahmins, Rajat Shukla & Nihal Shukla, died inside a septic tank in Prayagraj today, yet these people still claim GCs are privileged.
Time to expose these fake narratives, one by one.
आरक्षण उन लोगों को मिलना चाहिए जो उस के हकदार हैं जो लोग एक बार आरक्षण का फायदा ले चुके हैं उन को आरक्षण बंद कर देना चाहिए.....
Remove Reservation Movement'
#ReservationReforms
जब से आरक्षण शुरू हुआ है, इसकी लिस्ट तिगुनी हो चुकी!
एक भी जाति का उद्धार नहीं हुआ, एक भी जाति अगड़ी नहीं बनी!
अब सवाल ये कि ये जो नई नई जातियाँ दिन पर दिन शोषित वाला टैग ले रहीं हैं, इनका शोषण कौन कर रहा है??
और दूसरा सवाल ये कि क्या फायदा ऐसी व्यवस्था का, जो एक भी जाति को ऊपर नहीं उठा सकी?
@SurajKrBauddh सबसे बड़े बक्चोद तो तुम हो भोरसारी वाले, आरक्षण सरकार की छाती में चढ़कर लेगा... भले ही इसके मुफ्तखोरी के आरक्षण के कारण देश में गिरानी ही क्यों न आ जाय!
तुम जैसे बकचोदों को दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के न्याय की लड़ाई बकचोदी ही लगेगी। दया और भीख नहीं, आरक्षण हमारा हक है और हम ये हक सरकार की छाती पर चढ़कर लेंगे। तुमने यह किस डेटा और रिपोर्ट में पढ़ा कि बहुजनों की फीस सरकार सवर्णों के टैक्स से देती है? इस देश में 50 पैसे की टॉफी खरीद रहा बच्चा भी टैक्स देता है और कटोरे में भीख मांग रहा भिखारी भी। इसलिए टैक्स की लफ्फाजी कहीं और देना। हवा में कुछ भी बक देना ही तुम लोगों की मेरिट है।
और हाँ, जब तक जाति है, तब तक भागीदारी के लिए हमारा प्रोटेस्ट जारी रहेगा। अभी तो निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लेंगे, उच्च न्यायपालिका में भी लेंगे। सरकार हमारी सारी बात मानेगी। लगा लो जितना जोर लगा सकते हो, लेकिन SC, ST और OBC का आरक्षण इसी तरह जारी रहेगा।
सबसे बड़े बक्चोद तो तुम हो भोरसारी वाले, आरक्षण सरकार की छाती में चढ़कर लेगा... भले ही इसके मुफ्तखोरी के आरक्षण के कारण देश में गिरानी ही क्यों न आ जाय!
तुम जैसे बकचोदों को दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के न्याय की लड़ाई बकचोदी ही लगेगी। दया और भीख नहीं, आरक्षण हमारा हक है और हम ये हक सरकार की छाती पर चढ़कर लेंगे। तुमने यह किस डेटा और रिपोर्ट में पढ़ा कि बहुजनों की फीस सरकार सवर्णों के टैक्स से देती है? इस देश में 50 पैसे की टॉफी खरीद रहा बच्चा भी टैक्स देता है और कटोरे में भीख मांग रहा भिखारी भी। इसलिए टैक्स की लफ्फाजी कहीं और देना। हवा में कुछ भी बक देना ही तुम लोगों की मेरिट है।
और हाँ, जब तक जाति है, तब तक भागीदारी के लिए हमारा प्रोटेस्ट जारी रहेगा। अभी तो निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लेंगे, उच्च न्यायपालिका में भी लेंगे। सरकार हमारी सारी बात मानेगी। लगा लो जितना जोर लगा सकते हो, लेकिन SC, ST और OBC का आरक्षण इसी तरह जारी रहेगा।
"Reservation has nothing to do with poverty??
ABSOLUTELY WRONG!!
One of the criteria for SC as well as ST reservation is "Economic backwardness"!!!
Also, why take economic benefits when reservation has nothing to do with poverty??
Start paying full fees & stop taking freebies associated with your caste category!!
अब हम तुमको इसी अंदाज में जवाब दे देंगे, तो "हाय हमरा सोसन हो गया" चिल्लाकर एक्ट लगाने दौड़ पड़ोगे 😂
वैसे मुझे नीचा दिखाने की कोशिश से तुम्हारी अपनी पहचान तो बदलेगी नहीं!
इसलिए सलाह है कि दूसरों को नीचा दिखाने की बजाय, अपनी पहचान पर गर्व करना सीखो औऱ साथ में थोड़े संस्कार भी🙏
एक प्राइवेट स्कूल में एक क्लास टीचर एक जनरल की और एक SC/ST की अलग लाइन बनाई, दोनों को आरक्षण पर बोलना था।
जहां SC लड़की ने कहा कि जनरल को EWS का फायदा मिलता है
इसके तुरंत बाद जनरल वर्ग की लड़की ने जवाब दिया कि फिर हर SC/ST को आरक्षण क्यों मिलता है?
उनमें अमीर-गरीब का कोई फर्क नहीं माना जाता, जो गलत है। सिर्फ गरीबों को ही आरक्षण मिलना चाहिए।
इसपर SC/ST वालों की तरफ से किसी के पास जवाब नहीं था।👍
अबे पीड़ित शोषित क्रांति कुमार,
ये काट पीट के अधूरा-अधूरा इतिहास और जाति वाला जहर मत बताया कर।
अर्चना जी की सफलता पर खुशी दिखाकर तुरंत “सवर्ण संस्कृति महिलाओं की पढ़ाई का विरोध करती थी” ठोक देना सस्ती चाल है।
थोड़ा इतिहास पढ़:
•1848 में सावित्रीबाई फुले पहली महिला टीचर बन चुकी थीं। जो दलित थी। जब फुले को किसीने पढ़ने से नहीं रोका तो तुम्हारी औरतों को किसने रोका।
•1820-30 में राजा राम मोहन राय महिलाओं की शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ रहे थे।
•1840-50 में ईश्वरचंद्र विद्यासागर गर्ल्स स्कूल खोल रहे थे और विधवा पुनर्विवाह कानून के लिए संघर्ष कर रहे थे।
इन सबके समय बाबा साहेब का जन्म भी नहीं हुआ था। हिंदू कोड बिल 1950 के दशक की बात है।
मतलब महिलाओं की शिक्षा की लड़ाई आंबेडकर से पहले ही हिंदू समाज में चल रही थी। तुम भीमता लोग सिर्फ उनका नाम लेकर बाकी सुधारकों को मिटा देना चाहते हो।
और अर्चना जैसी महिला गरीबी-पिटाई से निकलकर 4.8 मिलियन सब्सक्राइबर बना ले, तो वो “गलत संस्कृति” की रक्षक हो गई?
तुम्हारा असल दर्द ये है कि कोई सवर्ण महिला बिना तुम्हारे बाबा साहेब के आशीर्वाद के सफल ना हो जाए।
इतिहास चुन-चुनकर मत बेच। पूरा पढ़ा कर समझा।
आरक्षण भीख ही है:
१. मेरिट पर सीट ले नहीं पाते, कोई छोड़ता है तब मिलता है
२. फॉर्म का दाम कम, हॉस्टल-कोर्स फी फ्री, सवर्णों के टैक्स के पैसे से सब्सिडाइज होता है
३. फ्री कोचिंग भी भीख ही है क्योंकि टैक्स का पैसा जाता है
४. हर स्तर पर जितनी भी आर्थिक छूट है, वह भीख ही है जो मेरे जैसे टैक्सदाताओं के पैसे से दी जाती है।
सामान्य वर्ग के बच्चों का संघर्ष भी कम नहीं होता। बिना किसी सहारे के, सिर्फ अपनी मेहनत के दम पर अवसरों की तलाश करना उनका सबसे बड़ा इम्तिहान है। आरक्षण की वजह से उनकी योग्यता का कोई मतलब नहीं रह जाता!
#EndReservation
एक प्राइवेट स्कूल में एक क्लास टीचर एक जनरल की और एक SC/ST की अलग लाइन बनाई, दोनों को आरक्षण पर बोलना था।
जहां SC लड़की ने कहा कि जनरल को EWS का फायदा मिलता है
इसके तुरंत बाद जनरल वर्ग की लड़की ने जवाब दिया कि फिर हर SC/ST को आरक्षण क्यों मिलता है?
उनमें अमीर-गरीब का कोई फर्क नहीं माना जाता, जो गलत है। सिर्फ गरीबों को ही आरक्षण मिलना चाहिए।
इसपर SC/ST वालों की तरफ से किसी के पास जवाब नहीं था।👍