वक़्फ़ के बारे में एक दूसरी अफ़वाह है कि वक़्फ़ किसी भी ज़मीन को अपनी घोषित कर सकता है और पीड़ित इस बारे में कुछ नहीं कर सकता। ये भी भाजपा द्वारा फैलाया पूरी तरह झूठ है।
--
दरअसल देश में मुस्लिम समाज से आने वाले बहुत से लोगों ने गरीब लोगों और समाज हित के लिए बहुत सी संपत्तियाँ दान में दीं। जिन्हें वक़्फ़ कहा जाता है। जिनमें से बहुत सी संपत्ति पर आज भूमाफ़ियाओं का क़ब्जा है। इसलिए पहले एक छोटा सा कॉनसेप्ट समझना ज़रूरी है। अगर कोई अपनी संपत्ति समाज हित या धर्म के काम में दान करना चाहता है तो ये आसान काम नहीं है। पहले वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से उस संपत्ति का सर्वे किया जाता है, बाद में प्रशासन की तरफ़ से सर्वे किया जाता है, और जब ये क्लियर हो जाता है कि अमुक संपत्ति उसी व्यक्ति की है तभी कोई संपत्ति वक़्फ़ की जा सकती है अन्यथा नहीं।
वक़्फ़ होने के बाद वह संपत्ति अल्लाह के नाम हो जाती है। लेकिन अगर किसी ने उस ज़मीन का अतिक्रमण कर रखा है, या पहले से वक़्फ़ की हुई ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके बैठा है, तो इसकी सूचना मिलने पर- सरकार द्वारा बनाए गये वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से Chief Executive Officer यानी वक़्फ़ का सीईओ उस व्यक्ति को नोटिस भेजेगा जिसने वक़्फ़ की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रखा है। इसके साथ ही वक़्फ़ की तरफ़ से इनक्वायरी की जाएगी कि वह ज़मीन वक़्फ़ की ही है या नहीं। डॉक्युमेंट्स देखे जाएँगे। अगर वक़्फ़ बोर्ड इस बात से कन्विंस हो जाएगा कि हाँ ये संपत्ति वक़्फ़ की है और इसपर क़ब्ज़ा किया हुआ है तो वक़्फ़ बोर्ड, वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के पास एक एप्लिकेशन देगा कि वक़्फ़ की हुई ज़मीन से क़ब्ज़ा हटवाया जाए। वक़्फ़ ट्रिब्यूनल एक सरकारी कोर्ट है जिसमें सरकारी अधिकारी और सरकारी जज होता है। सरकारी जज ही इसका चेयरमैन होता है। कोई मुस्लिम मौलाना नहीं;
अब ये सरकारी- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल तय करेगा कि ज़मीन वक़्फ़ की है कि नहीं, और उसके अकॉरिडिंग ही डिसिजन देगा।
इसके बाद भी अगर किसी को लगता है कि उसके साथ ग़लत हुआ है तो वो हाईकोर्ट जा सकता है। और ये चीज किसी भी धर्म से जुड़ी ज़मीन/संपत्ति को लेकर हो सकती है। हर जगह लगभग यही प्रोसेज है, इसलिए ऐसा कुछ नहीं है कि वक़्फ़ बोर्ड में अलग से है।
वक़्फ़ बोर्ड वैसे ही है जैसे बाक़ी धर्मों के मंदिर मठों के लिए क़ानून और ट्रस्ट बनाए गये- जैसे- Shri Jagannath Puri ACt 1955, Shri SiddhiVinayak Ganpati Temple Trust Act, Jammu and Kashmir Mata Vaishno Devi Shrine Act, अभी हाल ही में जैन बोर्ड बनाए जाने की बात की गई। सिखों के गुरुद्वारों को चलाने का काम भी गुरुद्वारा कमिटी करती है। सब धर्मों के ट्रस्ट और बोर्ड्स को उनके ही धर्म से जुड़े लोग चलाते हैं, ऐसा इसलिए ताकि किसी भी धर्म या वर्ग को ये ना लगे कि सरकार उनके धर्म के काम में हस्तक्षेप कर रही है। वैसे ही वक़्फ़ में है।
ये स्पष्ट है कि कोई ज़मीन वक़्फ़ है या नहीं ये तय करने का काम- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल का है। ना कि वक़्फ़ बोर्ड का इसमें इकतरफ़ा अधिकार है। वक़्फ़ ट्रिब्यूनल पूरी तरह सरकारी ट्रिब्यूनल है, जैसे बाक़ी ट्रिब्यूनल होते हैं, इसके बारे में मैंने एक दूसरे ट्वीट में बताया है। ट्वीट की लिंक- https://t.co/4WG0vAazda
दूसरी बात अगर आप वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं तो इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट जा सकते हैं। हाईकोर्ट देखेगा कि वक़्फ़ ट्रिब्यूनल (सरकारी जज) ने फ़ैसला सही दिया है या नहीं? लीगली दिया है कि नहीं? अगर हाईकोर्ट को इसमें कुछ भी गड़बड़ लगती है तो हाईकोर्ट उस फ़ैसले को बदल सकता है। संसोधित कर सकता है।
अगर वक़्फ़ बोर्ड के कहने से ज़मीन उसकी हो जाती तो आज वक़्फ़ बोर्ड सैकड़ों मामलों के लिए कोर्ट्स में नहीं लड़ रहा होता। ये सिर्फ़ अफ़वाहें, ताकि आप सरकार का समर्थन करने लगें।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संसद द्वारा पारित वक्फ संशोधनों को इस्लामी परंपराओं, दीन और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारत के संविधान के मूल ढांचे पर घातक हमला मानता है।
इसलिए हम सभी धार्मिक, राष्ट्रीय और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इन असंवैधानिक संशोधनों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक इन्हें पूरी तरह वापस नहीं ले लिया जाता।
#WithdrawWaqfAmendments
#SaveWaqfSaveConstitution
नमस्ते! आपने पूछा कि इस्लामिक देशों में वक्फ है या नहीं। मेरे विश्लेषण के अनुसार, हां, इस्लामिक देशों में वक्फ मौजूद है।
- तुर्की में Directorate General of Foundations वक्फ का प्रबंधन करता है।
- मिस्र में Ministry of Awqaf वक्फ संपत्तियों की देखभाल करता है, जैसे अल-अजहर मस्जिद।
- लीबिया, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और इराक में भी वक्फ प्रणाली है, जो सरकारी या धार्मिक निकायों द्वारा संचालित होती है।
हालांकि कुछ दावों में कहा गया कि इन देशों में वक्फ नहीं है, लेकिन तथ्य-जांच से पता चलता है कि ये दावे गलत हैं। वक्फ इस्लामिक देशों में ऐतिहासिक और वर्तमान समय में मौजूद है।
वक़्फ़ के बारे में एक दूसरी अफ़वाह है कि वक़्फ़ किसी भी ज़मीन को अपनी घोषित कर सकता है और पीड़ित इस बारे में कुछ नहीं कर सकता। ये भी भाजपा द्वारा फैलाया पूरी तरह झूठ है।
--
दरअसल देश में मुस्लिम समाज से आने वाले बहुत से लोगों ने गरीब लोगों और समाज हित के लिए बहुत सी संपत्तियाँ दान में दीं। जिन्हें वक़्फ़ कहा जाता है। जिनमें से बहुत सी संपत्ति पर आज भूमाफ़ियाओं का क़ब्जा है। इसलिए पहले एक छोटा सा कॉनसेप्ट समझना ज़रूरी है। अगर कोई अपनी संपत्ति समाज हित या धर्म के काम में दान करना चाहता है तो ये आसान काम नहीं है। पहले वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से उस संपत्ति का सर्वे किया जाता है, बाद में प्रशासन की तरफ़ से सर्वे किया जाता है, और जब ये क्लियर हो जाता है कि अमुक संपत्ति उसी व्यक्ति की है तभी कोई संपत्ति वक़्फ़ की जा सकती है अन्यथा नहीं।
वक़्फ़ होने के बाद वह संपत्ति अल्लाह के नाम हो जाती है। लेकिन अगर किसी ने उस ज़मीन का अतिक्रमण कर रखा है, या पहले से वक़्फ़ की हुई ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके बैठा है, तो इसकी सूचना मिलने पर- सरकार द्वारा बनाए गये वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से Chief Executive Officer यानी वक़्फ़ का सीईओ उस व्यक्ति को नोटिस भेजेगा जिसने वक़्फ़ की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रखा है। इसके साथ ही वक़्फ़ की तरफ़ से इनक्वायरी की जाएगी कि वह ज़मीन वक़्फ़ की ही है या नहीं। डॉक्युमेंट्स देखे जाएँगे। अगर वक़्फ़ बोर्ड इस बात से कन्विंस हो जाएगा कि हाँ ये संपत्ति वक़्फ़ की है और इसपर क़ब्ज़ा किया हुआ है तो वक़्फ़ बोर्ड, वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के पास एक एप्लिकेशन देगा कि वक़्फ़ की हुई ज़मीन से क़ब्ज़ा हटवाया जाए। वक़्फ़ ट्रिब्यूनल एक सरकारी कोर्ट है जिसमें सरकारी अधिकारी और सरकारी जज होता है। सरकारी जज ही इसका चेयरमैन होता है। कोई मुस्लिम मौलाना नहीं;
अब ये सरकारी- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल तय करेगा कि ज़मीन वक़्फ़ की है कि नहीं, और उसके अकॉरिडिंग ही डिसिजन देगा।
इसके बाद भी अगर किसी को लगता है कि उसके साथ ग़लत हुआ है तो वो हाईकोर्ट जा सकता है। और ये चीज किसी भी धर्म से जुड़ी ज़मीन/संपत्ति को लेकर हो सकती है। हर जगह लगभग यही प्रोसेज है, इसलिए ऐसा कुछ नहीं है कि वक़्फ़ बोर्ड में अलग से है।
वक़्फ़ बोर्ड वैसे ही है जैसे बाक़ी धर्मों के मंदिर मठों के लिए क़ानून और ट्रस्ट बनाए गये- जैसे- Shri Jagannath Puri ACt 1955, Shri SiddhiVinayak Ganpati Temple Trust Act, Jammu and Kashmir Mata Vaishno Devi Shrine Act, अभी हाल ही में जैन बोर्ड बनाए जाने की बात की गई। सिखों के गुरुद्वारों को चलाने का काम भी गुरुद्वारा कमिटी करती है। सब धर्मों के ट्रस्ट और बोर्ड्स को उनके ही धर्म से जुड़े लोग चलाते हैं, ऐसा इसलिए ताकि किसी भी धर्म या वर्ग को ये ना लगे कि सरकार उनके धर्म के काम में हस्तक्षेप कर रही है। वैसे ही वक़्फ़ में है।
ये स्पष्ट है कि कोई ज़मीन वक़्फ़ है या नहीं ये तय करने का काम- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल का है। ना कि वक़्फ़ बोर्ड का इसमें इकतरफ़ा अधिकार है। वक़्फ़ ट्रिब्यूनल पूरी तरह सरकारी ट्रिब्यूनल है, जैसे बाक़ी ट्रिब्यूनल होते हैं, इसके बारे में मैंने एक दूसरे ट्वीट में बताया है। ट्वीट की लिंक- https://t.co/4WG0vAazda
दूसरी बात अगर आप वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं तो इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट जा सकते हैं। हाईकोर्ट देखेगा कि वक़्फ़ ट्रिब्यूनल (सरकारी जज) ने फ़ैसला सही दिया है या नहीं? लीगली दिया है कि नहीं? अगर हाईकोर्ट को इसमें कुछ भी गड़बड़ लगती है तो हाईकोर्ट उस फ़ैसले को बदल सकता है। संसोधित कर सकता है।
अगर वक़्फ़ बोर्ड के कहने से ज़मीन उसकी हो जाती तो आज वक़्फ़ बोर्ड सैकड़ों मामलों के लिए कोर्ट्स में नहीं लड़ रहा होता। ये सिर्फ़ अफ़वाहें, ताकि आप सरकार का समर्थन करने लगें।
वक़्फ़ संशोधन बिल भारत के धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और भारतीय संविधान का स्वरूप 12 से 35 मे मौजूद बुनियादी अधिकारों का उनलंघन करता है। साथ ही यह बिल 25 करोड़ से ज्यादा अल्पसंखियांक नागरिको के भावनाओ को कष्ट देने के बराबर है। अर्थात हम इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं और सरकार से तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं।
#RejectWaqfBill
वक़्फ़ संशोधन बिल भारत के धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और भारतीय संविधान का स्वरूप 12 से 35 मे मौजूद बुनियादी अधिकारों का उनलंघन करता है। साथ ही यह बिल 25 करोड़ से ज्यादा अल्पसंखियांक नागरिको के भावनाओ को कष्ट देने के बराबर है। अर्थात हम इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं और सरकार से तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं।
#RejectWaqfBill
@Profdilipmandal अरे भाड़े के टट्टू @Profdilipmandal जब जयपुर-मुंबई ट्रेन में RPF के जवान ने तीन बेगुनाह मुसलमानों और एक आदिवासी अफ़सर की हत्या की तब तेरी ज़ुबान पर लकवा मार गया था। तब तेरी ऐसी पोस्ट आई थी? तूने उस आतंकी को देशद्रोही बोला था? दो कौड़ी के मामूली आदमी।
Chandrayaan-3 Mission:
'India🇮🇳,
I reached my destination
and you too!'
: Chandrayaan-3
Chandrayaan-3 has successfully
soft-landed on the moon 🌖!.
Congratulations, India🇮🇳!
#Chandrayaan_3#Ch3
@rahatindori#Islamophobia_in_india
जिधर से गूजरो धुआँ बिछा दो, जहाँ भी पहुँचो धमाल कर दो,
तुम्हें सियासत ने हक दिया है ,हरी जमीनो को लाल कर दो।
अपील भी तुम दलील भी तुम गवाह भी तुम वकील भी तुम,
जिसे भी चाहो हराम कहदो जिसे भी चाहो हलाल कर दो ।
वाराणसी: ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर किसानों और प्रशासन में झड़प, जमीन खाली करवाने पहुंची टीम पर किसानों ने बोला हमला।
प्रशासन ने किसानों पर लाठीचार्ज किया तो उन्होंने पुलिस टीम पर चलाए पत्थर।
मोहनसराय में किसानों की ज़मीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए किया जा रहा है अधिग्रहण, जिसके खिलाफ आज उन्होंने महापंचायत बुलाई थी।
मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद, क्षेत्र में तनाव की स्थिति बरकरार।
#Varanasi #UttarPradesh #Farmers
‘The Kerala story smacks of propaganda.. makes it a bad watch..’ says India Today film review. Other reviews worse: one calls it ‘an extended WhatsApp forward in guise of a movie. Cringeworthy..’ and yet, the film is being promoted and even used as a poll weapon only because it demonises a community/state.
मेरे शहीद पिता का अपमान संसद में किया जाता है। शहीद के बेटे का अपमान किया जाता है उन्हें मीर जाफर कहा जाता है। मेरी मां का अपमान किया जाता है। आपके मंत्री कहते हैं कि इनके पिता कौन हैं? आपके प्रधानमंत्री गांधी परिवार के लिए कहते हैं कि ये नेहरू उपनाम का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? आप पर तो कोई केस नहीं होता, आपकी सदस्यता रद्द नहीं होती: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, दिल्ली
نفس کی تین اقسام ہیں
نفس اماره
یہ انسان کو بغاوت، سرکشی اور گناہ کے کاموں پر اکساتا ہے۔
نفس لوامه
یہ گناہ اور نافرمانی کے کاموں پر انسان کو علامت (شرمندگی کا احساس دلاتا رہتا ہے
نفس مطمئنه
یہ انسان کو نیکی اور پر ہیز گاری کے کاموں پر مطمئن رکھتا ہے۔
नफ्स की तीन किस्म है
1-नफ्से अम्मारा
ये इन्सान को बगावत, सरकशी और गुनाह के कामों पर उकसाता है ।
2-नफ्से लवामा
ये गुनाह और नाफरमानी के कामों पर इन्सान को शर्मिंदगी का अहसास दिलाता रहता है ।
3-नफ्से मुतमईन्ना
ये इन्सान को नेकी और परहेज़गारी के कामों पर मुतमईन रखता है ۔
दुनिया बदल रही है। ईरान और सऊदी अरब ने हाथ मिला लिया। दशकों की दुश्मनी आज दोस्ती में बदल गई। हतप्रभ करने वाली बात ये है की दोनो कट्टर दुश्मन मुल्कों की दोस्ती करवाई चीन ने। मिडिल ईस्ट में एक दूसरे के दुश्मन अब दोस्त बन रहे हैं। तुर्की से लेकर ईरान तक। सऊदी से कतर तक एक हो रहे हैं
धन्यवाद ,
समस्या के निदान हेतु,
खंडवा नगरपालिका का
धन्यवाद,
पार्षद (खानशाहवली वार्ड क्र 36)
धन्यवाद
समस्त कर्मचारियों का विशेष रूप से नाजीमभाई की टीम का
हम सभी वार्ड वासी आभार प्रकट करते हैं ।
बहुत बहुत धन्यवाद ।
खानशाहवली वार्ड नं 36 खत्री कालोनी खंडवा म प्र
नाली भरी हुई है, कर्मचारी आते है थोड़ा सा पानी निकाल देते है नाली के अन्दर कचरा छोड़ देते है
इसलिए नाली रोज भरी पड़ी रहती है
@KhandwaN@SwachhKhandwa
धन्यवाद ,
समस्या के निदान हेतु,
खंडवा नगरपालिका का
धन्यवाद,
पार्षद (खानशाहवली वार्ड क्र 36)
धन्यवाद
समस्त कर्मचारियों का विशेष रूप से नाजीमभाई की टीम का
हम सभी वार्ड वासी आभार प्रकट करते हैं
बहुत बहुत धन्यवाद ।
@KhandwaN@SwachhKhandwa
खानशाहवली वार्ड नं 36 खत्री कालोनी खंडवा म प्र
नाली भरी हुई है, कर्मचारी आते है थोड़ा सा पानी निकाल देते है नाली के अन्दर कचरा छोड़ देते है
इसलिए नाली रोज भरी पड़ी रहती है
@KhandwaN@SwachhKhandwa