जानिए हमारे देश के मुद्दे—
👥 जनता के मुद्दे :-
1. शिक्षा
2. स्वास्थ्य
3. रोजगार
4. महंगाई
5. गरीबी
6. पेपर लीक और भर्ती में भ्रष्टाचार
7. किसान की आय
8. महिला सुरक्षा
9. साफ पानी और हवा
10. सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाएँ
🏛️ सरकार के मुद्दे :-
1. वंदे मातरम्
2. पाकिस्तान
3. हिंदू राष्ट्र
4. नेहरू को कम दिखाना
5. विपक्ष ने 70 साल में क्या किया?
6. राष्ट्रवादी कौन, देशद्रोही कौन ?
7. सवाल पूछने वाला कहीं “दिमागी नक्सल” तो नहीं
🗳️ विपक्ष के मुद्दे :-
1. EVM
2. वोट चोरी
3. जातिगत जनगणना
4. संविधान खतरे में है
5. सरकार गिराओ-बचाओ
6. कौन किस पार्टी में चला गया
7. संसद में किसने क्या बोल दिया
📺 मीडिया के मुद्दे :-
1. सीमा हैदर का छठा बच्चा
2. मोदी जी के reel का रिकॉर्ड बना
3. हिंदू-मुस्लिम डिबेट
4. पाकिस्तान में क्या चल रहा है
5. नेता की रैली में कितनी भीड़ आई
6. सोशल मीडिया पर कौन-सा बयान , बन्दा वायरल है उसको जल्दी बुलाओ ।
राजनीति के मुद्दे बहुत हैं साहब…
बस जनता के मुद्दे ही राजनीति के मुद्दे नहीं बन पा रहे।
देश की राजनीति में नैतिकता होनी चाहिए।राजनीति स्वच्छ होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हमारे राजनेताओं से सीख सके।एक बेहतर समाज बने।घृणा और ध्रुवीकरण की राजनीति ना हो।लेकिन ये सारी उम्मीदें सिर्फ राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से ही क्यों की जा रही है ? देश तो सबका है…
गोदी मीडिया पर बकवासबाज़ी में हिस्सा लेने वाले विपक्षी दल के नेता उन चैनलों को अपनी तरफ़ से लेजिटिमेसी देते हैं
गोदी मीडिया के साथ कंन्क्लेव करनी वाली पार्टियां उनको करोड़ों देकर उनकी आर्थिक मदद करती हैं
ऐसी पार्टियां और उनके नेता असल में गोदी मीडिया की गोदी में खेलते हैं
वे ख़ुद गोदी के लोभ से तो निकल नहीं पाते और दूसरों को नसीहत देते हैं
कुतर्क देते हैं कि हम अपनी बात कहने जाते हैं... ऐसा है तो फिर लताड़े जाते हो तो रोते क्यों हो?
अगर इतना बड़ा और प्रभावी सोशल मीडिया है रखो न अपनी बात यहां पर
डरो मत, नए नए रास्ते बनाओ, दूरदर्शी हो तो अपनी दूरदर्शिता दिखाओ
अगर गोदी ही चाहिए तो फिर गोदी गोदी क्यों करते हो? बैठते रहो उनकी गोद में
तथास्तु
गोदी मीडिया पर बकवासबाज़ी में हिस्सा लेने वाले विपक्षी दल के नेता उन चैनलों को अपनी तरफ़ से लेजिटिमेसी देते हैं
गोदी मीडिया के साथ कंन्क्लेव करनी वाली पार्टियां उनको करोड़ों देकर उनकी आर्थिक मदद करती हैं
ऐसी पार्टियां और उनके नेता असल में गोदी मीडिया की गोदी में खेलते हैं
वे ख़ुद गोदी के लोभ से तो निकल नहीं पाते और दूसरों को नसीहत देते हैं
कुतर्क देते हैं कि हम अपनी बात कहने जाते हैं... ऐसा है तो फिर लताड़े जाते हो तो रोते क्यों हो?
अगर इतना बड़ा और प्रभावी सोशल मीडिया है रखो न अपनी बात यहां पर
डरो मत, नए नए रास्ते बनाओ, दूरदर्शी हो तो अपनी दूरदर्शिता दिखाओ
अगर गोदी ही चाहिए तो फिर गोदी गोदी क्यों करते हो? बैठते रहो उनकी गोद में
तथास्तु
झारखंड के मुख्यमंत्री अपने राज्य में सत्ता में हैं और केंद्र में विपक्ष में हैं. उनके पास ये मौक़ा था दिखाने का कि अपने युवाओं की अपेक्षाओं को कैसे ठीक से डील किया जाता है. आवाज़ उठाना लोगों का, पत्रकारों का काम है. नेता से तो हल की उम्मीद है, जहाँ वो सत्ता में है. 15 दिन हो चुके हैं. लोग भूख हड़ताल पर हैं. पेपर लीक, भर्ती में गड़बड़ी, नौकरियाँ वक़्त से ना निकलना कोई आज की दिक़्क़त नहीं है. सभी को पता है लेकिन एक्शन के लिए क्या हर बार अनशन ही करना पड़ेगा?
सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा हैं
प्रदर्शन ख़त्म हो गया, मीडिया के कैमरे चले गए, उसके बाद सूने पड़े जंतर मंतर की सफाई की सेवा इस तरह की गई। इससे पार्टी को वोट नहीं मिलना क्योंकि सड़कें वोट देने नहीं आतीं, लेकिन शाबाशी तो मिलनी चाहिए @CongressSevadal के कार्यकर्ताओं और संगठक @srinivasiyc को
मूल बात क्या है? मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
आप अगर-मगर के सहारे इससे नहीं बच सकते। कुछ अच्छे लोग हमेशा हैं, रहेंगे।उन्हें निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। तब भी गोदी मीडिया की सच्चाई नहीं बदल जाएगी। जनता को हर दिन जागना होगा। आज इस मीडिया पर आप गर्व नहीं कर सकते. इसके न्यूज़ रूम के लोग भी शर्म से सहमे रहते हैं। अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए। एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए। इस गोदी मीडिया ने लोकतंत्र के हर कोने में सड़न पैदा कर दी है। इसके कारण कुर्सी पर बैठा हर शख़्स ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा है। सांसद तक लूटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियाँ लूट ली जा रही हैं। वोट का अधिकार छीना गया है। इसी मीडिया के सामने। इसलिए मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।