भारतीय रेल के स्लीपर कोच S1 अपराधियों का अड्डा बन गया है KRBA TVCN SF EXP (22647) की घटना!
महिला के अनुसार: कोच खाली था, अचानक एक व्यक्ति मेरे पैर छूने लगा। जब मैं डरकर खिड़की की ओर हटी, तो उसने अपने कपड़े उतार दिए, अश्लील हरकतें कीं और शरीर के निचले भाग से बाल नोंचकर सीट पर फेंकने लगा।
यह भयावह है! क्या आरक्षित कोच में अब महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं? @RPF_INDIA@RailwaySeva
गोपालगंज के SP से मेरी बात हुई है. शख्स की पहचान हो गई है. गिरफ्तारी के लिए टीम काम कर रही है. मेरे सोर्स ने मुझे बताया कि ये शख्स जहां काम करता था, दो दिन पहले उस कंपनी से इसे निकाल दिया गया है. हम खबर भी फाइल कर रहे हैं.
@TeamSaath@Shitu_Mazumdar@Sameeksha_India
Everyone was yelling yesterday: FIND THIS PEDOPHILE, FIND THIS RAPIST.
Today we know his name is Shashi Bhushan Upadhya, and he works as an HR Manager at K.K. Birla Sugar Company.
And now the entire Sanghi Media is quiet?
Is it his caste privilege or religion privilege?
बताया जा रहा है इसका नाम शशि भूषण उपाध्याय है
पूरी ट्रेन खाली थी इसके बावजूद ये आदमी महिलाओं से भारी सीट पर जा बैठा और मासूम बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर अपनी कुहिनी से पुश करता रहा।
बच्ची सहम गई और इससे हट कर बैठने की कोशिश करती रही लेकिन यह आदमी बदतमीजी करता रहा।
शुक्र था कुछ राहगीरों ने इसकी बदतमीजी का वीडियो बना लिया।
@TeamSaath को दिल से सलाम जिसने इस दरिंदे को एक्सपोज करने का इनीशिएटिव लिया।
ट्रेन में एक लड़की का सफ़र कितना मुश्किल है, ऐसे गिद्ध हर जगह अपनी ग़लत नियत के साथ दिख जाते हैं। ये व्यक्ति एक बच्ची के बगल में बैठकर उसे ग़लत इरादे से छूने का प्रयास कर रहा था, गंदी हरकत करते हुए जब कैमरे पर आया तो इसके होश खो गए। ऐसे लोगों कि पहचान होनी चाहिए। इनपर POCSO के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।
मिलिए केरल के एक मशहूर बिज़नेसमैन से। जब इनसे पूछा गया कि आप हर महीने मदरसे के बच्चों को बुलाते हैं, तिलावत-ए-कुरान करवाते हैं, इनके साथ खेलते-कूदते हैं, इसकी वजह क्या है?
उन्होंने कहा कि, "इसमें मुझे इतना सुकून मिलता है जो मेरे इस ख़ाली हवेली के अंदर नहीं मिलता है। वह सुकून मुझे तिलावत-ए-कुरान करते हुए इन बच्चों के साथ बैठकर मिलता है। इनके साथ खेलकर मिलता है। इस वजह से मैं हर आए दिन अपने घर में बच्चों को बुलाता हूँ, इनकी दावत करता हूँ, इनके साथ बैठकर तिलावत-ए-कुरान को सुनता हूँ। उससे जो सुकून मिलता है, वह मेरी लाखों-करोड़ों की दौलत से मुझे सुकून नहीं मिलता।"