@Syeda_Nasreen__ ताकतें तुम्हारी है और खुदा हमारा है।
अक्स पर मा इतराओ आयेना हमारा है
आप की गुलामी का भोज हम ना धोएंगे
आबरू से मारने का फैसला हमारा हा
अपनी रहनुमाई पर अब गुरूर मत करना
आप से बाहोत आगे नक्श ए पा हमारा है
उम्र भर तो कोई भी जंग लड़ नहीं सकता
तुम भी टूट जाओगे ताजरूबा हमारा है।
नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत, ज्ञानेश कुमार, अजीत डोभाल - इस कहानी के खलनायक - अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं। इनके चारों तरफ़ से दायरा सिमट रहा है।
जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए - 10 हज़ार, 20 हज़ार, 50 हज़ार, जितनी चाहें बुला लीजिए।
सारे नेताओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। सारे युवाओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। हम सबको गिरफ़्तार कर लीजिए।
हिंदुस्तान के युवाओं, मुझे आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ खड़े हैं।
हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सरकार और हमारे संविधान पर हमला करने वालों को शिकस्त मिले।
-- LoP श्री @RahulGandhi जी
Why are Muslim citizens being questioned if they will be joining the protests tomorrow? Why are cops using loudspeakers in mosques to dissuade muslims from participating ? Are they not equal citizens in this country ? Oh wait
ایرانی صدر مسعود پزشکیان نے اسرائیل اور امریکہ کو ’’دنیا کا حقیقی دہشت گرد‘‘ قرار دیتے ہوئے کہا کہ وہ شام، لبنان، غزہ، عراق، قطر اور ایران میں جو کچھ کر رہے ہیں، اس میں کوئی فرق نہیں۔
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज करने पर कहा, यह कोर्ट का मामला है लेकिन सिर्फ तौकीर रजा पर कार्रवाई हो रही है. और लोग किस तरह से बोलने का काम कर रहे हैं, कितनी नफरत बोने का काम कर रहे हैं लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं होती।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद 1911 में याकूब और वालिद खान की ज़मीन पर बनाई गई थी। बाद में उन्होंने डीएम कार्यालय के लिए अपनी ज़मीन दान कर दी। यानी सरकारी इमारत से पहले ही वहां मस्जिद मौजूद थी। इसके बावजूद मस्जिद को हाईकोर्ट में अपील का मौका दिए बिना गिरा दिया गया। यह बेहद शर्मनाक है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित प्राचीन मस्जिद का ध्वस्तीकरण अत्यंत अफसोसजनक है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं तो उनके लागू करने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है? आज बुलडोजर न्याय की निशानी कम और बदले, भेदभाव और नफरत की राजनीति का हथियार बनता जा रहा है।
यह मामला केवल एक मस्जिद का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका का सवाल है।
1991 का Places of Worship Act आज भी मौजूद है। इसी तरह नए वक्फ कानून में भी “वक्फ बाई यूजर” की धारा मौजूद है। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है जिसका नंबर 451 है। जबकि जमीन के पुराने रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के से जमीन दर्ज हैं। मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 से संबंधित दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करके यह पक्ष रखा था। ऐसे ऐतिहासिक और कानूनी साक्ष्यों को नजरअंदाज करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्याय की उसूलों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर अवैध कब्जा या अतिक्रमण ही कार्रवाई का मापदंड है तो यही मापदंड हर धर्म और हर वर्ग के लिए समान होना चाहिए। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी जमीनों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर दशकों से मौजूद दूसरी धार्मिक निर्माणों के खिलाफ भी क्या प्रशासन इसी जल्दबाजी, सख्ती और मापदंड से कार्रवाई करता है? अगर नहीं, तो किसी एक धार्मिक स्थल के खिलाफ असाधारण सख्ती समान न्याय के सिद्धांत के विपरीत महसूस होती है।
भारत किसी एक धर्म या वर्ग का नहीं, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्मों को मानने वालों का साझा वतन है। संविधान ने किसी को पहले और किसी को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बनाया है।
हम किसी विशेष रियायत के इच्छुक नहीं हैं, केवल समान न्याय चाहते हैं। हमारा सवाल सीधा है: जो कानून मस्जिद के लिए है, वही हर धार्मिक स्थल के लिए क्यों नहीं? जो मापदंड मुसलमान के लिए है, वही दूसरे नागरिक के लिए क्यों नहीं? संविधान और कानून अगर सभी के लिए हैं तो उनका संरक्षण और लागू करना भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
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जिस आदमी ने Delhi Protest के दौरान एक व्यक्ति का सर फोड़ा, मुस्लिम के खिलाफ बयान बाजी करता है, उसकी हालत देखिये
स्वतंत्र भारद्वाज कपिल मिश्रा के सम्पर्क में था
स्वतंत्र भारद्वाज सम्राट चौधरी के सम्पर्क में था
स्वतंत्र भारद्वाज चिराग पासवान के सम्पर्क में था
स्वतंत्र भारद्वाज T राजा सिंह के सम्पर्क में था
स्वतंत्र भारद्वाज को अंजना अपने शो में बुलाती थी
स्वतंत्र भारद्वाज का इंटरव्यू ANI कर रही है
स्वतंत्र भारद्वाज के लिए दिल्ली पुलिस फैक्ट चैक कर रही है
मतलब मुस्लिम से अगर आप नफरत करते हैँ
मतलब मुस्लिम के खिलाफ आप बयान दे सकते हैँ
मतलब मुस्लिम मुक्त भारत की अगर बात करते हैँ
तो मुबारक़ हो, आप दिल्ली पुलिस छोड़िये, बीजेपी आरएसएस के सरक्षण में हैँ, आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
इस टिन्डे के अगर मैं ही दो झापड़ मार दूँ तो पैंट में ही मूत देगा और ऐसे लोग Rss बीजेपी के भविष्य के हिन्दू सिपाही हैँ.
देश को नर्क बनाने के लिए धन्यवाद मोदीजी 🙏